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'दुनिया देख रही लिव-इन का कड़वा सच': मोहन भागवत बोले- विवाह ही सिखाता है जिम्मेदारी, LGBTQ पर भी रखी राय
Sun, 26 Jul 2026 11:06 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, हैदराबाद।
पीटीआई, हैदराबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:06 PM IST
सार
मोहन भागवत ने साफ संदेश दिया कि विवाह केवल दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और सामाजिक स्थिरता की नींव है। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का कड़वा सच दुनिया देख रही है। साथ ही नई पीढ़ी, परिवार और LGBTQ समुदाय को लेकर भी संतुलित और जिम्मेदार सोच अपनाने की बात कही।
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मोहन भागवत, सरसंघचालक, आरएसएस
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विवाह संस्था और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि ऐसा अनुशासन है जो व्यक्ति को धर्म, जिम्मेदारी और परिवार के प्रति कर्तव्य का बोध कराता है। इसके विपरीत, लिव-इन रिलेशनशिप की वास्तविकता अब पूरी दुनिया के सामने आ चुकी है। भागवत हैदराबाद में विश्व मांगल्य सभा की ओर से आयोजित 'समकालीन मातृत्व' विषयक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने आधुनिक जीवनशैली, नई पीढ़ी, परिवार और सामाजिक मूल्यों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
'लिव-इन जिम्मेदारी से बचने की मानसिकता'
संघ प्रमुख ने कहा कि आज के समय में लिव-इन रिलेशनशिप को आधुनिकता के नाम पर बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसकी सोच जिम्मेदारी से बचने वाली है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना किसी सामाजिक या पारिवारिक दायित्व के केवल अपनी सुविधा और सुख के लिए साथ रहना चाहते हैं। जब तक संबंध अच्छा लगे तब तक साथ रहें और मन भरने पर अलग हो जाएं। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति समाज के लिए उचित नहीं है। भागवत ने यह भी कहा कि आधुनिकता का विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन परंपराओं को पूरी तरह छोड़ देना भी सही नहीं है। समय के अनुसार बदलाव जरूरी है, लेकिन वह समाज और परिवार को मजबूत करने वाला होना चाहिए।
जेन-जी को लेकर भी रखी राय
मोहन भागवत ने नई पीढ़ी यानी जेन-जी के बारे में कहा कि आज के युवा भावनात्मक रूप से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं और कई बार दूसरों की देखा-देखी फैसले लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवाओं के सामने ईमानदारी और तर्क के साथ सही बात रखी जाए तो वे उसे समझने और स्वीकार करने की क्षमता रखते हैं।
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LGBTQ समुदाय पर क्या कहा?
अपने संबोधन में भागवत ने LGBTQ समुदाय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह समुदाय भी समाज का हिस्सा है और उनके प्रति किसी तरह की हीन भावना या भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
यह भी पढ़ें: PM मोदी ने जारी किया नया वीडियो: परीक्षा सुधारों पर बड़ा एलान, नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन
परिवार में संवाद और डिजिटल अनुशासन जरूरी- भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि बच्चों के साथ बेहतर संवाद आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे स्वयं मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अनुशासन रखें। यदि माता-पिता ही हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे तो बच्चों के साथ संवाद कमजोर होगा। बच्चों के मन में उठने वाले सवालों का जवाब परिवार में खुलकर दिया जाना चाहिए।
इतना ही नहीं, उन्होंने कहा, 'समाज में आप जो बदलाव देखना चाहते हैं, उसे खुद अपनाएं। सोशल मीडिया पर अपना समय कम करें। मोबाइल अनुशासन का पालन करें। हम सरकार की ओर देखते हैं। हमारी परंपरा में सरकार दूसरे स्थान पर है; समाज पहले स्थान पर है। सरकार को यह कानून या वह कानून बनाना चाहिए, हम यह काम अपने घर पर भी कर सकते हैं।'
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'लिव-इन जिम्मेदारी से बचने की मानसिकता'
संघ प्रमुख ने कहा कि आज के समय में लिव-इन रिलेशनशिप को आधुनिकता के नाम पर बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसकी सोच जिम्मेदारी से बचने वाली है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना किसी सामाजिक या पारिवारिक दायित्व के केवल अपनी सुविधा और सुख के लिए साथ रहना चाहते हैं। जब तक संबंध अच्छा लगे तब तक साथ रहें और मन भरने पर अलग हो जाएं। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति समाज के लिए उचित नहीं है। भागवत ने यह भी कहा कि आधुनिकता का विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन परंपराओं को पूरी तरह छोड़ देना भी सही नहीं है। समय के अनुसार बदलाव जरूरी है, लेकिन वह समाज और परिवार को मजबूत करने वाला होना चाहिए।
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जेन-जी को लेकर भी रखी राय
मोहन भागवत ने नई पीढ़ी यानी जेन-जी के बारे में कहा कि आज के युवा भावनात्मक रूप से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं और कई बार दूसरों की देखा-देखी फैसले लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवाओं के सामने ईमानदारी और तर्क के साथ सही बात रखी जाए तो वे उसे समझने और स्वीकार करने की क्षमता रखते हैं।
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LGBTQ समुदाय पर क्या कहा?
अपने संबोधन में भागवत ने LGBTQ समुदाय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह समुदाय भी समाज का हिस्सा है और उनके प्रति किसी तरह की हीन भावना या भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
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परिवार में संवाद और डिजिटल अनुशासन जरूरी- भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि बच्चों के साथ बेहतर संवाद आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे स्वयं मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अनुशासन रखें। यदि माता-पिता ही हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे तो बच्चों के साथ संवाद कमजोर होगा। बच्चों के मन में उठने वाले सवालों का जवाब परिवार में खुलकर दिया जाना चाहिए।
इतना ही नहीं, उन्होंने कहा, 'समाज में आप जो बदलाव देखना चाहते हैं, उसे खुद अपनाएं। सोशल मीडिया पर अपना समय कम करें। मोबाइल अनुशासन का पालन करें। हम सरकार की ओर देखते हैं। हमारी परंपरा में सरकार दूसरे स्थान पर है; समाज पहले स्थान पर है। सरकार को यह कानून या वह कानून बनाना चाहिए, हम यह काम अपने घर पर भी कर सकते हैं।'