{"_id":"6a573fb7142cdc5c540cc2e0","slug":"mumbai-love-story-and-murder-case-involving-a-mumbai-don-s-wife-remain-in-spotlight-last-accused-acquitted-2026-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mumbai: अभी भी जिंदा है मुंबई के डॉन की पत्नी की लव स्टोरी और मर्डर केस, आखिरी आरोपी भी कोर्ट से आरोपमुक्त","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Mumbai: अभी भी जिंदा है मुंबई के डॉन की पत्नी की लव स्टोरी और मर्डर केस, आखिरी आरोपी भी कोर्ट से आरोपमुक्त
Wed, 15 Jul 2026 01:37 PM IST
Pavan
सुनील मेहरोत्रा, अमर उजाला, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Pavan
Updated Wed, 15 Jul 2026 01:37 PM IST
सार
विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर.नवंदर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत के सामने ऐसा कोई सबूत नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियारों का इंतजाम किया या उन्हें जुटाने में मदद की थी।
विज्ञापन
कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को डॉन अश्विन नाइक की पत्नी नीता नाइक की हत्या के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में वर्षों से फरार चल रहे आरोपी धर्मेंद्र सिंह चौधरी उर्फ धर्मेंद्र को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पक्ष आरोपी और इस पूरी साजिश के बीच कोई भी संबंध साबित करने में नाकाम रहा।
गौरतलब है कि बीएमसी कॉर्पोरेटर नीता नाइक की नवंबर 2000 में उसके चिंचपोकली स्थित घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह हत्या अश्विन नाइक के इशारे पर की गई थी, जो उस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था। नाइक पर आरोप था कि उसने अपनी पत्नी के चरित्र पर शक होने और पैसों के लेन-देन के विवाद के चलते इस हत्या की साजिश रची थी। इस मामले में एक अन्य आरोपी किशोर राजपूत को साल 2009 में हुई सुनवाई के दौरान पहले ही बरी किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। अब इस मामले में फरार आरोपी धर्मेंद्र को भी राहत मिल गई है।
विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर.नवंदर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत के सामने ऐसा कोई सबूत नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियारों का इंतजाम किया या उन्हें जुटाने में मदद की थी। इसके अलावा ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे पता चले कि उसने हमलावरों को पनाह दी, हत्या की साजिश में हिस्सा लिया या वारदात को अंजाम देने में किसी भी तरह की मदद की थी।
विज्ञापन
जो तीन लोग इस केस में कनविक्ट हुए थे, उनमें से एक सुनील जाधव उर्फ एक्या को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने 4 जनवरी, 2005 को मुंबई के चारकोप इलाके में एनकाउंटर में मार गिराया था। सुनील जाधव को उम्र कैद की सजा हुई थी। वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद था, लेकिन एनकाउंटर में मारे जाने से कुछ महीने पहले पैरोल पर बाहर आ गया था और फिर बाद में फरार हो गया था। तब से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। इस केस में मनोज भालेकर नामक आरोपी को सात साल और नील रतन मुखर्जी नामक आरोपी को पांच साल की जेल की सजा दी गई है। यह सब अपनी सजा काट चुके हैं। पुलिस के अनुसार, नीता नाइक के मर्डर में एक और शूटर संतोष पांगरेकर भी शामिल था। उसे भी कई साल पहले पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था।
इस पूरे केस में सबसे खास बात यह है कि डॉन अश्विन नाइक को भी अपनी पत्नी के मर्डर में आरोपी बनाया गया था, उस पर भी मुकदमा चला था। उस पर आरोप था कि उसने अपनी पत्नी के चरित्र पर शक के चलते तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए भी उसका मुंबई के चिंचपोकली इलाके में मर्डर करवा दिया था। अश्विन को संदेह था कि उसकी पत्नी का एक पूर्व पुलिसकर्मी लक्ष्मण जीमन के साथ प्रेम संबंध था। हालांकि मुंबई की अदालत ने सबूतों के अभाव में उसे इस केस से बरी कर दिया था।
नीता नाइक एक शिक्षित और मुखर राजनेता थी, जिसने सोफिया कॉलेज से स्नातक किया था। वह शिवसेना की पार्षद थी। नीता को महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा समिति का चेयरमैन भी बनाया हुआ था। लेकिन उसकी हमेशा पहचान मुंबई के खूंखार अंडरवर्ल्ड डॉन अश्विन नाइक की पत्नी के रूप में हुई। जब उसका पति जेल में बंद था, तब आरोप था कि नीता गिरोह के वित्तीय मामलों को संभालती थीं। चूंकि वह पार्षद थी, इसलिए उसे सुरक्षा में एक पुलिस सिपाही भी मिला हुआ था। इसी सिपाही से रिलेशनशिप के शक में पुलिस का दावा था कि अश्विन ने अपनी पत्नी की हत्या करवा दी। हालांकि मुकदमे के दौरान पुलिस आरोप को साबित नहीं कर सकी।
इस केस में जो आखिरी आरोपी धर्मेंद्र सिंह चौधरी था, उसके खिलाफ भी पुलिस का केस कमजोर साबित हुआ, धर्मेंद्र मंगलवार को बरी हो गया, लेकिन इस केस के बहाने नीता नाइक की लव स्टोरी और उसका मर्डर केस एक बार फिर से जिंदा हो गया। अश्विन नाइक सिर्फ अपनी पत्नी के मर्डर में ही नहीं, अन्य सभी केसों से भी बरी होकर अब अपने घर में रहा है, पर व्हील चेयर पर अपनी जिंदगी जी रहा है। दरअसल, अरुण गवली गैंग की तरफ से अश्विन पर 18 अप्रैल, 1984 को मुंबई की सेशन कोर्ट परिसर में सिर के पीछे गोली मार दी गई थी। चूंकि गोली सिर्फ एक चली, इसलिए अश्विन की जिंदगी तो बच गई, पर इस गोली से वह अपाहिज भी हो गया। अश्विन पर गोलियां चलाने वाला शूटर वकील के भेष में रिवॉल्वर लेकर अदालत आया था। उसकी वह गोली अश्विन के सिर पर आज भी मौजूद है। दरअसल यह गोली इस तरह फंसी हुई है कि यदि इसे निकाला जाए, तो अश्विन शायद ही जिंदा बच पाए।
विज्ञापन
गौरतलब है कि बीएमसी कॉर्पोरेटर नीता नाइक की नवंबर 2000 में उसके चिंचपोकली स्थित घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह हत्या अश्विन नाइक के इशारे पर की गई थी, जो उस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था। नाइक पर आरोप था कि उसने अपनी पत्नी के चरित्र पर शक होने और पैसों के लेन-देन के विवाद के चलते इस हत्या की साजिश रची थी। इस मामले में एक अन्य आरोपी किशोर राजपूत को साल 2009 में हुई सुनवाई के दौरान पहले ही बरी किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। अब इस मामले में फरार आरोपी धर्मेंद्र को भी राहत मिल गई है।
विज्ञापन
विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर.नवंदर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत के सामने ऐसा कोई सबूत नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियारों का इंतजाम किया या उन्हें जुटाने में मदद की थी। इसके अलावा ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे पता चले कि उसने हमलावरों को पनाह दी, हत्या की साजिश में हिस्सा लिया या वारदात को अंजाम देने में किसी भी तरह की मदद की थी।
विज्ञापन
जो तीन लोग इस केस में कनविक्ट हुए थे, उनमें से एक सुनील जाधव उर्फ एक्या को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने 4 जनवरी, 2005 को मुंबई के चारकोप इलाके में एनकाउंटर में मार गिराया था। सुनील जाधव को उम्र कैद की सजा हुई थी। वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद था, लेकिन एनकाउंटर में मारे जाने से कुछ महीने पहले पैरोल पर बाहर आ गया था और फिर बाद में फरार हो गया था। तब से पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। इस केस में मनोज भालेकर नामक आरोपी को सात साल और नील रतन मुखर्जी नामक आरोपी को पांच साल की जेल की सजा दी गई है। यह सब अपनी सजा काट चुके हैं। पुलिस के अनुसार, नीता नाइक के मर्डर में एक और शूटर संतोष पांगरेकर भी शामिल था। उसे भी कई साल पहले पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था।
इस पूरे केस में सबसे खास बात यह है कि डॉन अश्विन नाइक को भी अपनी पत्नी के मर्डर में आरोपी बनाया गया था, उस पर भी मुकदमा चला था। उस पर आरोप था कि उसने अपनी पत्नी के चरित्र पर शक के चलते तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए भी उसका मुंबई के चिंचपोकली इलाके में मर्डर करवा दिया था। अश्विन को संदेह था कि उसकी पत्नी का एक पूर्व पुलिसकर्मी लक्ष्मण जीमन के साथ प्रेम संबंध था। हालांकि मुंबई की अदालत ने सबूतों के अभाव में उसे इस केस से बरी कर दिया था।
नीता नाइक एक शिक्षित और मुखर राजनेता थी, जिसने सोफिया कॉलेज से स्नातक किया था। वह शिवसेना की पार्षद थी। नीता को महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा समिति का चेयरमैन भी बनाया हुआ था। लेकिन उसकी हमेशा पहचान मुंबई के खूंखार अंडरवर्ल्ड डॉन अश्विन नाइक की पत्नी के रूप में हुई। जब उसका पति जेल में बंद था, तब आरोप था कि नीता गिरोह के वित्तीय मामलों को संभालती थीं। चूंकि वह पार्षद थी, इसलिए उसे सुरक्षा में एक पुलिस सिपाही भी मिला हुआ था। इसी सिपाही से रिलेशनशिप के शक में पुलिस का दावा था कि अश्विन ने अपनी पत्नी की हत्या करवा दी। हालांकि मुकदमे के दौरान पुलिस आरोप को साबित नहीं कर सकी।
इस केस में जो आखिरी आरोपी धर्मेंद्र सिंह चौधरी था, उसके खिलाफ भी पुलिस का केस कमजोर साबित हुआ, धर्मेंद्र मंगलवार को बरी हो गया, लेकिन इस केस के बहाने नीता नाइक की लव स्टोरी और उसका मर्डर केस एक बार फिर से जिंदा हो गया। अश्विन नाइक सिर्फ अपनी पत्नी के मर्डर में ही नहीं, अन्य सभी केसों से भी बरी होकर अब अपने घर में रहा है, पर व्हील चेयर पर अपनी जिंदगी जी रहा है। दरअसल, अरुण गवली गैंग की तरफ से अश्विन पर 18 अप्रैल, 1984 को मुंबई की सेशन कोर्ट परिसर में सिर के पीछे गोली मार दी गई थी। चूंकि गोली सिर्फ एक चली, इसलिए अश्विन की जिंदगी तो बच गई, पर इस गोली से वह अपाहिज भी हो गया। अश्विन पर गोलियां चलाने वाला शूटर वकील के भेष में रिवॉल्वर लेकर अदालत आया था। उसकी वह गोली अश्विन के सिर पर आज भी मौजूद है। दरअसल यह गोली इस तरह फंसी हुई है कि यदि इसे निकाला जाए, तो अश्विन शायद ही जिंदा बच पाए।