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मायानगरी की माया अनोखी: जो अधिकारी जांच करता है, वह ही आरोपी बन जाता है; समीर वानखेड़े नहीं हैं ऐसे पहले अधिकारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Tue, 26 Oct 2021 01:25 PM IST
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एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
आर्यन खान केस में ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ कर सुर्खियों में आए नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े अब अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए दलीलें दे रहे हैं। बात सिर्फ समीर की नहीं है। इससे पहले मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह समेत कई नाम जांच के घेरे में खड़े हो चुके हैं। फिर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के अधिकारी सचिन वझे का मामला भी ज्यादा पुराना नहीं है। ऐसा क्या है मुंबई में, जो वहां अधिकारी ही जांच में फंस जाते हैं। ऐसे अधिकारियों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। डिमॉलिशमैन के नाम से प्रसिद्ध जीआर खैरनार तक को सस्पेंड किया गया था। एक बार नहीं, दो-दो बार। उन्हें भी जांच का सामना करना पड़ा था।सबसे पहले बात समीर वानखेड़े की
एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े का नाम सुर्खियों में तब आया जब सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया गया। समीर को मीडिया में तेजतर्रार, ईमानदार अधिकारी के तौर पर पेश किया गया। अब उनके खिलाफ विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू कर दी है। चीफ विजिलेंस ऑफिसर ज्ञानेश्वर सिंह खुद जांच का नेतृत्व कर रहे हैं।
समीर वानखेड़े ने कोर्ट में दो हलफनामे दाखिल किए हैं। कोर्ट में कहा है कि एनसीबी की जांच को भटकाने का प्रयास हो रहा है। कई लोग गवाहों पर दबाव बना रहे हैं। गवाह मुकर गया है और बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। मुझे धमकी दी जा रही है। मेरे पूरे परिवार को भी टारगेट बनाया जा रहा है। दरअसल, आर्यन खान ड्रग केस में गवाह प्रभाकर सैल ने एनसीबी अधिकारियों पर 25 करोड़ की रिश्वत की मांगने का आरोप लगाया है। बाद में डील 18 करोड़ रुपए में हुई थी, जिसमें से आठ करोड़ रुपए कथित तौर पर वानखेड़े को मिलने वाले थे।
यह मामला अब राजनीतिक हो गया है। महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक विकास और सामाजिक न्याय मंत्री नवाब मलिक ने तो पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने की मांग तक दी है। सत्ता में सहयोगी शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी इसका समर्थन किया है। मामला पिछड़ा बनाम अल्पसंख्यक हो गया है।
समीर वानखेड़े ने कोर्ट में दो हलफनामे दाखिल किए हैं। कोर्ट में कहा है कि एनसीबी की जांच को भटकाने का प्रयास हो रहा है। कई लोग गवाहों पर दबाव बना रहे हैं। गवाह मुकर गया है और बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। मुझे धमकी दी जा रही है। मेरे पूरे परिवार को भी टारगेट बनाया जा रहा है। दरअसल, आर्यन खान ड्रग केस में गवाह प्रभाकर सैल ने एनसीबी अधिकारियों पर 25 करोड़ की रिश्वत की मांगने का आरोप लगाया है। बाद में डील 18 करोड़ रुपए में हुई थी, जिसमें से आठ करोड़ रुपए कथित तौर पर वानखेड़े को मिलने वाले थे।
यह मामला अब राजनीतिक हो गया है। महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक विकास और सामाजिक न्याय मंत्री नवाब मलिक ने तो पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने की मांग तक दी है। सत्ता में सहयोगी शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी इसका समर्थन किया है। मामला पिछड़ा बनाम अल्पसंख्यक हो गया है।
परमवीर सिंह, सचिन वझे, प्रदीप शर्मा भी फंसे थे
उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से लदी एसयूवी के मामले में एनआईए ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के अधिकारी सचिन वझे को गिरफ्तार किया था। वझे ही इस मामले में जांच अधिकारी था। जांच में सामने आया कि वझे सुपर कॉप बनकर लाइमलाइट में आना चाहता था। बाद में एसयूवी के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या में भी वह आरोपी बना। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के बाद शिवसेना नेता बना प्रदीप शर्मा भी आरोपों से घिरा हुआ है।
इसी मामले को लेकर मुंबई पुलिस के उस समय के कमिश्नर परमबीर सिंह का जब होमगार्ड में ट्रांसफर हुआ तो उन्होंने राज्य के गृहमंत्री के खिलाफ ही खुला पत्र जारी कर दिया था। इसमें 100 करोड़ रुपए की उगाही के आरोप लगाए थे। खैर, इसे लेकर परमबीर खुद भी जांच का सामना कर रहे हैं। इस मामले की जांच जारी है।
इसी मामले को लेकर मुंबई पुलिस के उस समय के कमिश्नर परमबीर सिंह का जब होमगार्ड में ट्रांसफर हुआ तो उन्होंने राज्य के गृहमंत्री के खिलाफ ही खुला पत्र जारी कर दिया था। इसमें 100 करोड़ रुपए की उगाही के आरोप लगाए थे। खैर, इसे लेकर परमबीर खुद भी जांच का सामना कर रहे हैं। इस मामले की जांच जारी है।
नेताओं, मीडिया को संयम रखने की जरूरत
मायानगरी में जो दिखता है, वह होता नहीं है। शाहरुख के बेटे के मामले में हो रही राजनीति भी जांच की दिशा को भटका सकती है। महाराष्ट्र में कई चर्चित केस लड़ चुके वरिष्ठ सरकारी वकील उज्जवल निकम कहते हैं कि संयम रखना बेहद जरूरी है। न केवल मीडिया को बल्कि नेताओं को भी। गैरजरूरी बयानबाजी से बचना चाहिए। जांच प्रभावित नहीं होना चाहिए। सच का सच, झूठ का झूठ सामने आना चाहिए। कानून का शासन है तो उसका पालन करना बेहद जरूरी है। यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि एब्सोल्यूट पॉवर करप्ट्स एब्सोल्यूटली (संपूर्ण ताकत पूरी तरह से भ्रष्ट बनाती है)।
अधिकारियों पर लगने वाले आरोपों का सच
मुंबई में तीन दशक से पत्रकारिता कर रहे चंद्रकांत शिंदे कहते हैं कि मायानगरी में नेक्सस काम करता है और इसमें सब शामिल है। महत्वाकांक्षी अफसर अक्सर नेक्सस का हिस्सा बनकर जुर्म की दलदल का हिस्सा बन जाते हैं। बाद में खुद भी कठघरे में खड़े दिखाई देते हैं। ऐसा नहीं है कि सारे अधिकारी भ्रष्ट ही हैं। यहां तो जीआर खैरनार जैसे ईमानदार अधिकारियों पर भी आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ भी जांच और सस्पेंशन की कार्रवाई हुई है।
वहीं, निकम कहते हैं कि आरोप लगने पर जांच होगी। यह एक स्थापित प्रक्रिया है। अगर वानखेड़े के मामले में जांच हो रही है तो संयम रखना चाहिए। उस पर आरोप लगे हैं, जांच होनी ही चाहिए। एजेंसियों की जांच के नतीजे का इंतजार करना बेहतर होगा। उनका कहना है कि जहां तक नेक्सस की बात है तो वह सब जगह है। जहां कुछ लोग स्वार्थ, लालच के लिए काम करते हैं, ऐसी स्थिति बनती है। सिर्फ मायानगरी में नहीं, बल्कि पूरे भारत में, विदेश में भी यह दिखता है।
वहीं, निकम कहते हैं कि आरोप लगने पर जांच होगी। यह एक स्थापित प्रक्रिया है। अगर वानखेड़े के मामले में जांच हो रही है तो संयम रखना चाहिए। उस पर आरोप लगे हैं, जांच होनी ही चाहिए। एजेंसियों की जांच के नतीजे का इंतजार करना बेहतर होगा। उनका कहना है कि जहां तक नेक्सस की बात है तो वह सब जगह है। जहां कुछ लोग स्वार्थ, लालच के लिए काम करते हैं, ऐसी स्थिति बनती है। सिर्फ मायानगरी में नहीं, बल्कि पूरे भारत में, विदेश में भी यह दिखता है।