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Maharashtra Politics: NCP प्रमुख के रूप में सुनेत्रा पवार के चयन को चुनौती, पार्टी नेता ने क्या की मांग?
Mon, 13 Jul 2026 11:38 PM IST
Pavan
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: Pavan
Updated Mon, 13 Jul 2026 11:38 PM IST
सार
एनसीपी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने पार्टी अध्यक्ष के रूप में सुनेत्रा पवार के चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को पार्टी संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द कर स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। वहीं, पार्टी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
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सुनेत्रा पवार, अध्यक्ष, NCP
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के चुनाव को पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता ने चुनौती दी है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने कानूनी नोटिस भेजकर इस चुनाव को असंवैधानिक बताया है और संगठन का नया चुनाव कराने की मांग की है। दिल्ली की एक लॉ फर्म के माध्यम से 9 जुलाई को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि 26 फरवरी को हुआ राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी संविधान के अनुसार नहीं कराया गया। इसलिए इसे रद्द घोषित किया जाना चाहिए।
किसे मिला नोटिस और उसमें क्या?
ये नोटिस सुनेत्रा पवार, पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले पार्टी संविधान के अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया और प्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को उचित सूचना भी नहीं दी गई। नोटिस में कहा गया है कि 28 जनवरी को तत्कालीन एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार के निधन के बाद पार्टी ने चुनाव आयोग को बताया था कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बावजूद महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने कथित रूप से बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।
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पार्टी नेता ने क्या लगाए आरोप?
सच्चिदानंद सिंह का आरोप है कि चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण, रिटर्निंग अधिकारी या चुनाव कार्यक्रम का गठन नहीं किया गया। प्रतिनिधियों को उम्मीदवार नामित करने, चुनाव लड़ने या मतदान करने का पूरा अवसर भी नहीं मिला। उन्होंने चुनाव आयोग को 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को भेजी गई पार्टी की सूचनाएं वापस लेने और स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में दोबारा संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
NCP प्रवक्ता ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, एनसीपी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान भी किया था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव पार्टी के सभी नियमों का पालन करते हुए कराया गया था।
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किसे मिला नोटिस और उसमें क्या?
ये नोटिस सुनेत्रा पवार, पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले पार्टी संविधान के अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया और प्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को उचित सूचना भी नहीं दी गई। नोटिस में कहा गया है कि 28 जनवरी को तत्कालीन एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार के निधन के बाद पार्टी ने चुनाव आयोग को बताया था कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बावजूद महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने कथित रूप से बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।
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पार्टी नेता ने क्या लगाए आरोप?
सच्चिदानंद सिंह का आरोप है कि चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण, रिटर्निंग अधिकारी या चुनाव कार्यक्रम का गठन नहीं किया गया। प्रतिनिधियों को उम्मीदवार नामित करने, चुनाव लड़ने या मतदान करने का पूरा अवसर भी नहीं मिला। उन्होंने चुनाव आयोग को 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को भेजी गई पार्टी की सूचनाएं वापस लेने और स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में दोबारा संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
NCP प्रवक्ता ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, एनसीपी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान भी किया था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव पार्टी के सभी नियमों का पालन करते हुए कराया गया था।