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NEET Paper Leak: पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा को कंप्यूटर आधारित कराने की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 18 May 2026 11:21 AM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NEET-UG परीक्षा को तुरंत कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाने की मांग की गई है। याचिका में पेपर लीक रोकने के लिए पेन-पेपर सिस्टम खत्म करने, NTA की जगह नई संस्था बनाने और 21 जून का री-टेस्ट ऑनलाइन मोड में कराने की अपील की गई है।

NEET Paper Leak Demand for Computer-Based Exams to Prevent Leaks Petition Filed in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर NEET-UG परीक्षा को तुरंत कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में बदलने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और सुरक्षा की कमियों ने मौजूदा पेन-पेपर सिस्टम की पोल खोल दी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का मौजूदा तरीका सुरक्षित नहीं रह गया है।


याचिका में क्या?
याचिका के अनुसार, 2024 के विवाद के बाद इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन की समिति ने सुधारों की सिफारिश की थी। इसके बावजूद 2026 की परीक्षा पुराने ढंग से ही कराई गई। इसमें पेपर की छपाई, उसे लाने-ले जाने और रखने में बहुत जोखिम होता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई ऐसे बिंदु हैं जहां से पेपर लीक होने की संभावना बनी रहती है।
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याचिका में तर्क दिया गया है कि केंद्र सरकार पहले ही 2027 से इस परीक्षा को कंप्यूटर आधारित करने का ऐलान कर चुकी है। इसका मतलब है कि सरकार खुद मानती है कि डिजिटल सिस्टम ज्यादा सुरक्षित है। ऐसे में इसे लागू करने के लिए 2027 तक का इंतजार करना सही नहीं है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा में पेपर सुरक्षित डिजिटल कोड के जरिए भेजे जाते हैं। इसमें बायोमेट्रिक जांच और एआई (AI) आधारित निगरानी जैसे सुरक्षा इंतजाम होते हैं, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाती है।


री-टेस्ट ऑनलाइन कराने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि 21 जून को होने वाला री-टेस्ट पेन-पेपर के बजाय कंप्यूटर पर कराया जाए। साथ ही, केंद्र सरकार को भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक समय सीमा तय करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में NTA को हटाकर एक नई स्वतंत्र और पारदर्शी संस्था बनाने की मांग भी की गई है। यह नई संस्था कानूनी रूप से जवाबदेह होनी चाहिए।

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इसके अलावा, एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाने की अपील की गई है। इस समिति में रिटायर्ड जज, शिक्षाविद, साइबर विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल होने चाहिए। याचिका में पेपर लीक में शामिल लोगों और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक जांच की मांग की गई है। साथ ही, सीबीआई से 2026 के पेपर लीक मामले में चार हफ्ते के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है।

क्या है मामला?
3 मई 2026 को हुई परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। आरोप है कि परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर पेपर लीक हो गया था। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। याचिका में 2021 और 2024 के विवादों का भी हवाला दिया गया है। यह याचिका आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, डॉ ध्रुव चौहान और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की है।
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