वायनाड में लापरवाही बनी मौत की वजह?: जांच पूरी होने तक नहीं होगा टनल का काम; CM ने किया मुआवजे का एलान
वायनाड में टनल प्रोजेक्ट के पास हुए भूस्खलन पर केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने कहा कि हादसे के कारणों की गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा के वास्तविक कारणों का पता चलने और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही वायनाड टनल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।
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केरल के वायनाड में टनल निर्माण स्थल के पास हुए भीषण भूस्खलन में तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग अब भी लापता हैं। NDRF, फायर फोर्स और खोजी कुत्तों की मदद से बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है। इस पूरे कघटना को जहां राज्य सरकार ने मानव-जनित आपदा बताया है, वहीं, टनल निर्माण कंपनी ने आरोपों से इनकार किया है। इस हादसे पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने कहा है कि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही वायनाड टनल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।
भूस्खलन में कितने लोगों के दबे होने की आशंका?
पुलिस ने बुधवार को बताया कि पहाड़ी जिले में टनल रोड निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में तीन लोगों की मौत के एक दिन बाद भी घटना के बाद से लापता पांच लोगों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वायनाड के एसपी देवमनोहर ने पत्रकारों को बताया कि भूस्खलन के मामले में अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज कर लिया गया है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है।
एसपी ने आगे क्या बताया?
बचाव अभियान की जानकारी देते हुए एसपी देवमनोहर ने बताया कि खोजी कुत्तों (कैडेवर डॉग्स), फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के जवानों और NDRF की टीमों को तैनात किया गया है। प्रभावी तलाशी के लिए पूरे इलाके को चार अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है। नदी के बहाव की दिशा में भी सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, चूरलमाला की ओर जाने वाली सड़क को भी साफ कर दिया गया है, ताकि राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए। हालांकि घटना स्थल पर अब भी बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा मौजूद है। इसे हटाने का काम तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही शुरू किया जाएगा।
सरकार ने हादसे पर क्या कहा?
राज्य सरकार ने एक दिन पहले कहा था कि यह 'मानव-जनित आपदा' थी। सरकार के अनुसार, जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के मंत्री पी.के. बशीर के निर्देशों के बावजूद निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी को नहीं हटाया गया, जिससे हालात और गंभीर हो गए।
निर्माण कंपनी ने पल्ला झाड़ा
निर्माण कंपनी के जनरल मैनेजर ने सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भूस्खलन निर्माण स्थल से काफी ऊपर हुआ था। यह घटना कंपनी को निर्माण के लिए आवंटित भूमि पर नहीं हुई और वहां जमा मिट्टी का इस आपदा से कोई संबंध नहीं था। जब पत्रकारों ने वायनाड की जिला कलेक्टर मेघाश्री डी.आर. से कंपनी के जनरल मैनेजर के दावों पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कैसे बढ़ी मडस्लाइड की तीव्रता?
इस बीच, बचाव कार्यों में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि भूस्खलन भले ही निर्माण स्थल के ऊपर हुआ हो, लेकिन इलाके में पहले से जमा मिट्टी की वजह से मडस्लाइड (कीचड़ का तेज बहाव) की तीव्रता काफी बढ़ गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण राहत और बचाव अभियान में लगातार दिक्कतें आ रही हैं, जिससे सर्च ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
कहां के रहने वाले हैं तीनों मृतकों?
इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोगों की पहचान प्रवासी मजदूरों के रूप में हुई है। इनमें मध्य प्रदेश के मशीन ऑपरेटर चंद्रभान, बिहार के सिविल फोरमैन विकास कुमार और झारखंड के मजदूर अनमोल शामिल हैं। मंगलवार रात तक हादसे में घायल सात लोगों का इलाज मेप्पाडी स्थित WIMS अस्पताल में चल रहा था।
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मृतकों के लिए मुआवजे का एलान
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन बुधवार को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे। इससे पहले राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का एलान किया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार जान गंवाने वालों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देगी। इसके साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाया जाएगा। मृतकों के शवों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की जा रही है।