NIA: आईएसआई का साइबर जासूसी नेटवर्क, पाक नौसेना ने छीने थे मछुआरों के फोन, रक्षा प्रतिष्ठानों में लगाई सेंध
पाकिस्तान की तरफ से भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश में एनआईए को सफलता मिली है। आईएसआई मोबाइल और साइबर जासूसी नेटवर्क के खिलाफ जांच करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' के नेतृत्व में मोबाइल और साइबर जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया है। पाकिस्तानी नौसेना ने मछुआरों के मोबाइल फोन छीने थे। उसके बाद मोबाइल फोन में दूसरे सिमकार्ड डाले गए। इसके बाद भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों में सेंध लगाने का प्रयास किया गया। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मंगलवार को पाकिस्तान के भानेतृत्व में मोबाइल सिम कार्ड के धोखाधड़ीपूर्ण उपयोग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग से जुड़े जासूसी षड्यंत्र के एक प्रमुख आरोपी को साधारण कारावास (एसआई) की सजा सुनाई है।
बता दें कि अभियुक्त अल्ताफहुसेन घनचीभाई उर्फ शकील ने चल रहे मुकदमे के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इसके तहत अभियोजन पक्ष द्वारा 37 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है। विशेष न्यायालय ने अभियुक्त को विशिष्ट पहचान सुविधाओं, जिनमें सिम कार्ड और ओटीपी के साथ-साथ सोशल मीडिया का दुरुपयोग शामिल है, के लिए दोषी ठहराते हुए उसके खिलाफ अपना फैसला सुनाया है। अभियुक्त को यूए (पी) अधिनियम की धारा 18 के तहत पांच साल छह महीने के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। आयकर अधिनियम, 2000 की धारा 66सी के तहत ढाई साल के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और इसकी अधिकतम अवधि साढ़े पांच साल होगी।
एनआईए के मुताबिक, सीमा पार साजिश का मामला संख्या RC-03/2021/NIA/HYD में उन मछुआरों के भारतीय सिम कार्डों के इस्तेमाल का जिक्र है, जिन्हें पाकिस्तानी नौसेना ने खुले समुद्र में मछली पकड़ते समय गिरफ्तार किया था। इन मछुआरों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड पाकिस्तानी नौसेना ने जब्त कर लिए थे। बाद में आरोपियों ने जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इन्हें भारत में सक्रिय कर दिया था।
एनआईए ने अपनी जांच में इस साजिश को निर्णायक रूप से साबित कर दिया है कि आरोपी ने अपने मोबाइल हैंडसेट में भारतीय सिम कार्ड डाले थे। वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) जेनरेट किए थे, जिन्हें उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों (पीआईओ) के साथ साझा किया था। इससे वह पाकिस्तान से भारतीय व्हाट्सएप नंबरों का संचालन कर पा रहा था।
एनआईए के अनुसार, गुप्तचरों ने भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों में सेंध लगाने का प्रयास किया था। उन्होंने फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों के कर्मियों के साथ बातचीत की। आरोपियों का मकसद, भारतीय नंबरों का उपयोग कर रक्षा संबंधी संवेदनशील और प्रतिबंधित जानकारी प्राप्त करना था। इससे भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया। एनआईए द्वारा साइबर-आधारित सीमा पार आतंकवादी और जासूसी गतिविधियों का मुकाबला किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने ऐसे सभी अपराधियों को सजा दिलाने के अपने अथक प्रयास जारी रखे हुए हैं।
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