{"_id":"6a61db08b0b92e5cc8074b94","slug":"no-comprehensive-interim-relief-for-abhishek-banerjee-for-now-what-did-hc-say-on-the-plea-seeking-protection-2026-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bengal: अभिषेक बनर्जी को फिलहाल समग्र अंतरिम राहत नहीं, संरक्षण की मांग वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bengal: अभिषेक बनर्जी को फिलहाल समग्र अंतरिम राहत नहीं, संरक्षण की मांग वाली याचिका पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
Thu, 23 Jul 2026 02:42 PM IST
Pavan
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: Pavan
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:42 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी को उनके खिलाफ दर्ज आठ एफआईआर मामलों में फिलहाल समग्र अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि अलग-अलग मामलों में एक साथ राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि, यदि अगली सुनवाई (30 जुलाई) से पहले कोई कड़ा कदम उठता है तो अभिषेक अदालत का रुख कर सकते हैं।
विज्ञापन
अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल में उनके खिलाफ दर्ज आठ एफआईआर के मामले में फिलहाल समग्र अंतरिम संरक्षण नहीं मिलेगा। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अलग-अलग आरोपों के आधार पर दर्ज सभी मामलों को एक साथ जोड़कर व्यापक अंतरिम संरक्षण नहीं दिया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
यह भी पढ़ें- सड़क से संसद तक संग्राम: 'सरकार चर्चा चाहती तो पहले दिन ही कर लेती'; नीट विवाद पर खरगे ने केंद्र पर उठाए सवाल
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उनके खिलाफ लगातार एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भवानीपुर, सिलीगुड़ी, नकाशीपाड़ा और विष्णुपुर समेत राज्य के विभिन्न थानों में अभिषेक के खिलाफ आठ एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने इन सभी मामलों में अभिषेक को कानूनी संरक्षण देने का अनुरोध किया। सिब्बल ने दलील दी कि पहले भी कई एफआईआर के मामले में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को अदालत से संरक्षण मिला था।
विज्ञापन
अदालत ने भविष्य में उसकी अनुमति के बिना उनके खिलाफ मामला दर्ज करने पर भी रोक लगाई थी। इस पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि शुभेंदु अधिकारी के मामले में दिया गया आदेश अंतरिम प्रकृति का था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अलग-अलग आरोपों के आधार पर दर्ज मामलों में एक साथ अंतरिम संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
यह भी पढ़ें- श्रीनिवासन हत्याकांड: NIA ने आरोपी मुहम्मद अली को एयरपोर्ट पर दबोचा, जारी था इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस
उन्होंने कहा कि सभी मामलों को एक साथ जोड़कर संरक्षण मांगना संभव नहीं है। न्यायमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुने बिना कोई आदेश जारी नहीं करेगी। हालांकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को सीमित राहत का रास्ता खुला रखा है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अगली सुनवाई तक यदि उनके खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाया जाता है तो इस मामले को अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- सड़क से संसद तक संग्राम: 'सरकार चर्चा चाहती तो पहले दिन ही कर लेती'; नीट विवाद पर खरगे ने केंद्र पर उठाए सवाल
विज्ञापन
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उनके खिलाफ लगातार एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भवानीपुर, सिलीगुड़ी, नकाशीपाड़ा और विष्णुपुर समेत राज्य के विभिन्न थानों में अभिषेक के खिलाफ आठ एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने इन सभी मामलों में अभिषेक को कानूनी संरक्षण देने का अनुरोध किया। सिब्बल ने दलील दी कि पहले भी कई एफआईआर के मामले में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को अदालत से संरक्षण मिला था।
विज्ञापन
अदालत ने भविष्य में उसकी अनुमति के बिना उनके खिलाफ मामला दर्ज करने पर भी रोक लगाई थी। इस पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि शुभेंदु अधिकारी के मामले में दिया गया आदेश अंतरिम प्रकृति का था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अलग-अलग आरोपों के आधार पर दर्ज मामलों में एक साथ अंतरिम संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
यह भी पढ़ें- श्रीनिवासन हत्याकांड: NIA ने आरोपी मुहम्मद अली को एयरपोर्ट पर दबोचा, जारी था इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस
उन्होंने कहा कि सभी मामलों को एक साथ जोड़कर संरक्षण मांगना संभव नहीं है। न्यायमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुने बिना कोई आदेश जारी नहीं करेगी। हालांकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को सीमित राहत का रास्ता खुला रखा है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अगली सुनवाई तक यदि उनके खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाया जाता है तो इस मामले को अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।