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छात्रों के समर्थन में मौन हुए अन्ना: पीएम मोदी को चिट्ठी लिख जताया दुख, धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कही ये बात
Thu, 23 Jul 2026 03:27 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, अहिल्यानगर।
पीटीआई, अहिल्यानगर।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 23 Jul 2026 03:27 PM IST
सार
छात्रों पर हुई कार्रवाई से आहत अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों से शांतिपूर्ण बातचीत की मांग की है। उन्होंने क्या-क्या कहा है? जानिए...
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मौन में मुखर अन्ना!
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को अब वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे का भी समर्थन मिल गया है। बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में अन्ना हजारे ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने करीब दो घंटे तक मौन आंदोलन किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले में हस्तक्षेप की अपील की।
दो घंटे का मौन आंदोलन, सरकार तक पहुंचाया संदेश
अन्ना हजारे का मौन प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर एक बजे समाप्त हुआ। उन्होंने बिना भाषण दिए शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलन खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक जनता और छात्रों की पीड़ा पहुंचाना उनका कर्तव्य है। इसके बाद वह अपने गांव रालेगण सिद्धि लौट गए।
पीएम मोदी को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को दुखद बताया। उन्होंने लिखा कि युवाओं का आक्रोश केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा सवाल है। उनके मुताबिक सरकार को इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने की जरूरत है।
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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग
अन्ना हजारे ने आगे यह भी कहा कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देते हैं तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी। इसके उलट सरकार की जवाबदेही तय होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
अन्ना के आंदोलन की पांच बड़ी बातें
छात्रों से संवाद पर दिया जोर
अन्ना हजारे ने यह भी कहा है कि छात्रों के गुस्से का जवाब लाठीचार्ज नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से अपील की कि बल प्रयोग के बजाय छात्रों से सीधे बातचीत कर समाधान निकाला जाए। उनका मानना है कि संवाद से ही विवाद खत्म हो सकता है।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: सरकार का दावा- कॉकरोच जनता पार्टी ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव; अब केंद्र के पास क्या है विकल्प?
क्यों भड़का छात्र आंदोलन?
दिल्ली में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक, परीक्षा में कथित धांधली और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की कमी के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत बार-बार होने वाली अनियमितताओं की वजह से बेकार हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके बाद छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और तेज कर दी।
अब सरकार के जवाब का इंतजार
अन्ना हजारे का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रधानमंत्री तक छात्रों की आवाज पहुंचा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है और छात्रों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।
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दो घंटे का मौन आंदोलन, सरकार तक पहुंचाया संदेश
अन्ना हजारे का मौन प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर एक बजे समाप्त हुआ। उन्होंने बिना भाषण दिए शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलन खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक जनता और छात्रों की पीड़ा पहुंचाना उनका कर्तव्य है। इसके बाद वह अपने गांव रालेगण सिद्धि लौट गए।
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पीएम मोदी को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को दुखद बताया। उन्होंने लिखा कि युवाओं का आक्रोश केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा सवाल है। उनके मुताबिक सरकार को इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने की जरूरत है।
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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग
अन्ना हजारे ने आगे यह भी कहा कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देते हैं तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी। इसके उलट सरकार की जवाबदेही तय होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
अन्ना के आंदोलन की पांच बड़ी बातें
- मौन प्रदर्शन: आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर एक बजे खत्म हुआ।
- पीएम को पत्र: अन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजकर दिल्ली की हिंसा पर दुख जताया।
- इस्तीफे की मांग: उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि भरोसा बढ़ेगा।
- कानून-व्यवस्था का सवाल: छात्रों के गुस्से को पुलिस की लाठी से दबाना गलत है। यह समाज की पीड़ा है।
- संवाद की जरूरत: सरकार को छात्रों से सीधे बात करके रास्ता निकालना चाहिए।
छात्रों से संवाद पर दिया जोर
अन्ना हजारे ने यह भी कहा है कि छात्रों के गुस्से का जवाब लाठीचार्ज नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से अपील की कि बल प्रयोग के बजाय छात्रों से सीधे बातचीत कर समाधान निकाला जाए। उनका मानना है कि संवाद से ही विवाद खत्म हो सकता है।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: सरकार का दावा- कॉकरोच जनता पार्टी ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव; अब केंद्र के पास क्या है विकल्प?
क्यों भड़का छात्र आंदोलन?
दिल्ली में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक, परीक्षा में कथित धांधली और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की कमी के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत बार-बार होने वाली अनियमितताओं की वजह से बेकार हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके बाद छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और तेज कर दी।
अब सरकार के जवाब का इंतजार
अन्ना हजारे का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रधानमंत्री तक छात्रों की आवाज पहुंचा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है और छात्रों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।