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जंगलों से मुख्यधारा तक: ओडिशा में अंतिम सांसें गिन रहा माओवाद, CM मांझी बोले- अब सिर्फ 15 नक्सली सक्रिय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 23 Mar 2026 05:02 PM IST
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सार
देश लाल आतंक से मुक्त होने जा रहा है। ओडिशा के सीएम मोहन चरण मांझी ने दावा किया है कि नक्सली अब राज्य के कुछ ही हिस्से में सक्रिय है। मुख्यमंत्री के अनुसार, साल 2024 से 15 मार्च 2026 के बीच कुल 96 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।
सरेंडर करने के लिए आते नक्सली
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
Odisha: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने माओवाद के खात्मे को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अब नक्सली अंतिम सांसे गिन रहे हैं। माओवादियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। सीएम ने दावा किया है कि राज्य में अब केवल 15 नक्सली ही बचे हैं। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि 31 मार्च 2026 तक ओडिशा को पूरी तरह से माओवाद मुक्त बना दिया जाएगा।
केवल एक जिले में बचा है माओवादियों का प्रभाव
विधानसभा में कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बाहिनीपति ने सीएम से सवाल पूछा था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री मांझी ने कहा कि वर्तमान में केवल कंधमाल जिला ही केंद्र के सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत आता है। यहां भी अब कुछ ही नक्सली ही बचे हैं।
हालांकि, जमीनी हकीकत को साफ करते हुए सीएम ने कहा कि राज्य के अन्य हिस्सों से नक्सलवाद का लगभग सफाया हो चुका है। वर्तमान में केवल कंधमाल, कालाहांडी और रायगढ़ जिलों की सीमाओं पर लगभग 15 माओवादी सक्रिय हैं। इनके अलावा राज्य के किसी भी अन्य हिस्से में उनकी मौजूदगी नहीं है।
यह भी पढ़ें: AIADMK-BJP Alliance: AIADMK के साथ गठबंधन तय, तमिलनाडु में 27 सीटों पर चुनाव लड़ेगी भाजपा
सरेंडर नीति का दिख रहा है असर
सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का असर धरातल पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, साल 2024 से 15 मार्च 2026 के बीच कुल 96 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है। भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए ओडिशा सरकार व्यापक सुविधाएं दे रही है। आत्मसमर्पण करने वालों नक्सलियों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ घर भी दिया जा रहा है। सीएम मांझी ने कहा कि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के दम पर ओडिशा के जंगलों से माओवाद का नामोनिशान मिट जाएगा।
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केवल एक जिले में बचा है माओवादियों का प्रभाव
विधानसभा में कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बाहिनीपति ने सीएम से सवाल पूछा था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री मांझी ने कहा कि वर्तमान में केवल कंधमाल जिला ही केंद्र के सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत आता है। यहां भी अब कुछ ही नक्सली ही बचे हैं।
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हालांकि, जमीनी हकीकत को साफ करते हुए सीएम ने कहा कि राज्य के अन्य हिस्सों से नक्सलवाद का लगभग सफाया हो चुका है। वर्तमान में केवल कंधमाल, कालाहांडी और रायगढ़ जिलों की सीमाओं पर लगभग 15 माओवादी सक्रिय हैं। इनके अलावा राज्य के किसी भी अन्य हिस्से में उनकी मौजूदगी नहीं है।
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सरेंडर नीति का दिख रहा है असर
सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का असर धरातल पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, साल 2024 से 15 मार्च 2026 के बीच कुल 96 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है। भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए ओडिशा सरकार व्यापक सुविधाएं दे रही है। आत्मसमर्पण करने वालों नक्सलियों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ घर भी दिया जा रहा है। सीएम मांझी ने कहा कि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के दम पर ओडिशा के जंगलों से माओवाद का नामोनिशान मिट जाएगा।
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