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PP Chaudhary: ‘एक देश, एक चुनाव अर्थव्यवस्था और शासन के लिए जरूरी’, बोले भाजपा नेता पीपी चौधरी

एएनआई, गांधीनगर Published by: Asmita Tripathi Updated Fri, 22 May 2026 11:15 AM IST
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सार

गुजरात के गांधीनगर और अहमदाबाद में  'एक देश, एक चुनाव' के मुद्दें पर तीन दिन बैठक हुई। इस पर संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना जरूरी है। पढ़ें पूरी खबर

One country, one election is essential for economy and governance', said BJP leader PP Chaudhary
संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भाजपा नेता और 'एक देश, एक चुनाव' पर संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने शुक्रवार को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शासन में व्यवधान को कम करने और देश को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना जरूरी है।



'बार-बार होने वाले चुनाव कई क्षेत्रों को बाधित करते'
उन्होंने कहा ‘देखिए, पिछले तीन दिनों में गांधीनगर और अहमदाबाद में आयोजित 'एक देश, एक चुनाव' बैठकों हुई। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण एक विकसित भारत के निर्माण के उद्देश्य से है।’ उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, शासन और औद्योगिक उत्पादन सहित कई क्षेत्रों को बाधित करते हैं।
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'7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती'
उन्होंने कहा, 'लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों की शिक्षा बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चले, चिकित्सा और स्वास्थ्य प्रणालियों में कोई बाधा पैदा ना हो और शासन में कोई बाधा न हो।' आर्थिक पहलू पर चौधरी ने दावा किया कि एक साथ चुनाव कराने से देश की अर्थव्यवस्था को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है।

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1967 तक आम चुनाव एक साथ होते थे
उन्होंने आगे कहा कि 1967 तक भारत में एक साथ चुनाव होना सामान्य बात थी, जिसके बाद कांग्रेस सरकारों के तहत विधानसभा भंग होने और राष्ट्रपति शासन लागू होने से लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों का अलग हुआ। आगे कहा, 'पहले 20 वर्षों तक यही प्रथा चली आ रही थी। 1967 तक चार आम चुनाव एक साथ होते थे। कांग्रेस के शासनकाल में, 1967-68 में, सात राज्य विधानसभाओं को समय से पहले ही भंग कर दिया गया था। उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले और बाद में राष्ट्रपति शासन, आपातकाल और कार्यकाल विस्तार के कारण, लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होने लगे।'

चुनावी सुधार की सख्त जरूरत
भाजपा नेता ने कहा कि समिति ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, नौकरशाहों, मंत्रियों, बैंकों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत की, जिन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों के कारण पैदा आर्थिक और प्रशासनिक बोझ के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने आगे कहा, 'आर्थिक और शासन व्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है, इसलिए आज देश को इस चुनावी सुधार की सख्त जरूरत है।' 

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