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'भारत नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा': राजनाथ सिंह बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिया संदेश
Sun, 09 Aug 2026 05:15 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sun, 09 Aug 2026 05:15 PM IST
सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभियान में पाकिस्तान स्थित आतंकियों और उनके आकाओं को करारा जवाब दिया गया। दिल्ली कैंट में रक्तदान कार्यक्रम में उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ बताते हुए युवाओं से इसे नियमित रूप से करने की अपील की।
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस को दुनिया के सामने रखा। इस अभियान के जरिए पूरी दुनिया को संदेश गया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं के ‘सिंदूर’ की रक्षा के लिए भारतीय सेना ने आतंकवादियों और उनके आकाओं को करारा जवाब दिया। राजनाथ सिंह रविवार को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में आयोजित ‘सिंदूर महा रक्तदान यात्रा’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया और भारत की ओर बुरी नजर रखने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े। गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था।
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रक्तदान को बताया 'जीवनदान'
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जहां देश के साहस का प्रतीक है, वहीं रक्तदान का यह अभियान मानवता और करुणा का उदाहरण है। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में काफी प्रगति के बावजूद इंसानी खून का कोई कृत्रिम विकल्प अभी तक नहीं बनाया जा सका है। उन्होंने रक्तदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि आज दिया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के काम आएगा। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के करीब 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया।
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युवाओं से रक्तदान को संस्कृति बनाने की अपील
राजनाथ सिंह ने युवाओं से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्त देने वाला और रक्त पाने वाला, दोनों अपने तरीके से देश की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करे, तब देश का लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज बनाना भी होना चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों और जरूरत के समय रक्त आसानी से उपलब्ध हो।
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कार्यक्रम में सीएम समेत कई अतिथि शामिल
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत, सांसद श्रीकांत शिंदे, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की महानिदेशक वाइस एडमिरल आरती सरीन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, करीब 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा पहले’ की भावना को मजबूत किया।
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रक्तदान को बताया 'जीवनदान'
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जहां देश के साहस का प्रतीक है, वहीं रक्तदान का यह अभियान मानवता और करुणा का उदाहरण है। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में काफी प्रगति के बावजूद इंसानी खून का कोई कृत्रिम विकल्प अभी तक नहीं बनाया जा सका है। उन्होंने रक्तदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि आज दिया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के काम आएगा। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के करीब 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया।
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युवाओं से रक्तदान को संस्कृति बनाने की अपील
राजनाथ सिंह ने युवाओं से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्त देने वाला और रक्त पाने वाला, दोनों अपने तरीके से देश की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करे, तब देश का लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज बनाना भी होना चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों और जरूरत के समय रक्त आसानी से उपलब्ध हो।
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कार्यक्रम में सीएम समेत कई अतिथि शामिल
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत, सांसद श्रीकांत शिंदे, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की महानिदेशक वाइस एडमिरल आरती सरीन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, करीब 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा पहले’ की भावना को मजबूत किया।