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बिदादी में क्यों भड़का जमीन विवाद: क्या है GBIT परियोजना, 9,600 एकड़ जमीन पर क्यों आमने-सामने सरकार-विपक्ष?
Sun, 09 Aug 2026 03:41 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, बंगलूरू।
पीटीआई, बंगलूरू।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 03:41 PM IST
सार
बिदादी में प्रस्तावित एआई-टाउनशिप के लिए 9,600 एकड़ जमीन अधिग्रहण पर किसान और विपक्ष गोलबंद हैं। विपक्ष ने 38 किमी की पदयात्रा निकालकर सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया है। वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने साफ किया है कि जमीन जबरन नहीं ली जाएगी और 2006 के इस पुराने प्रोजेक्ट की पूरी सच्चाई मानसून सत्र में सामने रखी जाएगी। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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डीके शिवकुमार, मुख्यमंत्री कर्नाटक
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
ग्रेटर बंगलूरू इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना को लेकर कर्नाटक का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। बिदादी के पास किसानों की उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ जनता दल (सेक्युलर) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मोर्चा खोल दिया है। दोनों दलों ने राज्य सरकार के खिलाफ रविवार से तीन दिवसीय और 38 किलोमीटर लंबी संयुक्त 'पादयात्रा' शुरू कर दी है। यह पदयात्रा बिदादी के पास बायरामनहल्ली से शुरू होकर बंगलूरू के फ्रीडम पार्क तक जाएगी।
क्या है विरोध की मुख्य वजह ?
जेडी(एस) युवा इकाई के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी इस विरोध मार्च की अगुवाई कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने बायरामनहल्ली में इस मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रदर्शनकारियों ने 'नम्मा भूमि, नम्मा हक्कू' (हमारी जमीन, हमारा अधिकार) के नारे लगाए।
विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार रियल एस्टेट कंपनियों के फायदे और कमीशन के लिए काम कर रही है। विरोध करने वाले किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें डराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले जेडी(एस) ने 21 जून को कंचगरा नहल्ली से होसूर गांव तक 11 किलोमीटर का विरोध मार्च निकाला था। अब दोनों दलों ने विधानसभा के भीतर और बाहर मिलकर लड़ने का फैसला किया है।
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यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के काफिले पर हमला, प्रदर्शनकारियों ने गाड़ी पर पत्थर और जूते फेंके
सीएम शिवकुमार बोले-कोई सच्चाई नहीं छिपा सकता
विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'कोई भी सच्चाई को छिपा नहीं सकता। हमारी सरकार भी सच्चाई को सामने लाने के लिए काम करेगी।' उन्होंने साफ-साफ कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को विरोध प्रदर्शन और पदयात्रा करने का पूरा अधिकार है। विपक्ष जो चाहे करे, सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
सीएम शिवकुमार ने चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष विधानसभा में आए और इस पर चर्चा करे। सरकार 13 अगस्त से शुरू हो रहे मानसून सत्र में सत्र के भीतर जवाब देने के लिए तैयार है। कानून सही समय पर सही कार्रवाई करेगा। शिवकुमार ने यह भी कहा कि जीबीआईटी प्रोजेक्ट उनकी सरकार की नई पहल नहीं है। यह 2006 में एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन सरकार के समय घोषित प्रस्ताव का ही विस्तार है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि किसी की भी जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
परियोजना से जुड़ी सात बड़ी बातें
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क्या है विरोध की मुख्य वजह ?
जेडी(एस) युवा इकाई के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी इस विरोध मार्च की अगुवाई कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने बायरामनहल्ली में इस मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रदर्शनकारियों ने 'नम्मा भूमि, नम्मा हक्कू' (हमारी जमीन, हमारा अधिकार) के नारे लगाए।
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विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार रियल एस्टेट कंपनियों के फायदे और कमीशन के लिए काम कर रही है। विरोध करने वाले किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें डराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले जेडी(एस) ने 21 जून को कंचगरा नहल्ली से होसूर गांव तक 11 किलोमीटर का विरोध मार्च निकाला था। अब दोनों दलों ने विधानसभा के भीतर और बाहर मिलकर लड़ने का फैसला किया है।
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सीएम शिवकुमार बोले-कोई सच्चाई नहीं छिपा सकता
विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'कोई भी सच्चाई को छिपा नहीं सकता। हमारी सरकार भी सच्चाई को सामने लाने के लिए काम करेगी।' उन्होंने साफ-साफ कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को विरोध प्रदर्शन और पदयात्रा करने का पूरा अधिकार है। विपक्ष जो चाहे करे, सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
सीएम शिवकुमार ने चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष विधानसभा में आए और इस पर चर्चा करे। सरकार 13 अगस्त से शुरू हो रहे मानसून सत्र में सत्र के भीतर जवाब देने के लिए तैयार है। कानून सही समय पर सही कार्रवाई करेगा। शिवकुमार ने यह भी कहा कि जीबीआईटी प्रोजेक्ट उनकी सरकार की नई पहल नहीं है। यह 2006 में एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन सरकार के समय घोषित प्रस्ताव का ही विस्तार है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि किसी की भी जमीन जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
परियोजना से जुड़ी सात बड़ी बातें
- भारत की पहली एआई टाउनशिप: जीबीआईटी परियोजना को देश की पहली 'एआई-संचालित एकीकृत टाउनशिप' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
- कुल जमीन की आवश्यकता: इस विशाल परियोजना के लिए बिदादी के पास 25 गांवों की कुल 9,600 एकड़ जमीन की जरूरत है।
- प्रारंभिक अधिसूचना: राज्य सरकार ने पिछले साल मार्च में नौ गांवों की 7,481 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी।
- अंतिम अधिसूचना: हाल ही में सरकार ने सात गांवों की 5,400 एकड़ से अधिक जमीन के लिए दो अंतिम अधिसूचनाएं जारी की हैं।
- हाई-लेवल कमेटी गठित: विवाद की समीक्षा के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुहनाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति बनाई गई है।
- वरिष्ठ अधिकारी शामिल: इस समिति में पूर्व मुख्य सचिव एसवी रंगनाथ, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एस उमाशंकर और पूर्व आईएएस अधिकारी प्रसन्ना कुमार शामिल हैं।
- 30 दिनों में रिपोर्ट: यह समिति विभिन्न पक्षों के सुझावों की समीक्षा कर 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।