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Kolkata: कोलकाता में टला बड़ा विमान हादसा! लेजर लाइट से भटका पायलट का ध्यान, आसमान में लगाना पड़ा चक्कर
Sun, 09 Aug 2026 03:36 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 09 Aug 2026 03:36 PM IST
सार
कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरने की तैयारी कर रहे मलयेशिया एयरलाइंस के विमान को कॉकपिट की ओर आई तेज लेजर लाइट के कारण कुछ देर के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान में 159 यात्री सवार थे। लैंडिंग से ठीक पहले पायलट की नजर प्रभावित हुई और विमान की दिशा को लेकर कुछ देर के लिए भ्रम की स्थिति बन गई।
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कोलकाता एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
कुआलालंपुर से 159 यात्रियों को लेकर आ रही मलयेशिया एयरलाइंस की उड़ान एमएच-184 को शनिवार रात नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरते समय परेशानी का सामना करना पड़ा। हवाईअड्डे के सूत्रों के अनुसार, कॉकपिट की ओर आई लेजर रोशनी से पायलट का ध्यान भटक गया।
उड़ान को शनिवार रात 11:20 बजे उतरना था। सूत्रों ने बताया कि जब विमान हवाईअड्डे की हवाई पट्टी से करीब आठ समुद्री मील दूर था, तभी पायलट ने मध्यमग्राम-बारासात की ओर से कॉकपिट की तरफ आती तेज लेजर रोशनी देखी।
पायलट को हो गया दिशा भ्रम
लेजर की अचानक तेज रोशनी से पायलट की नजर कुछ समय के लिए प्रभावित हुई और वह क्षणभर के लिए दिशा को लेकर भ्रमित हो गया। इसके चलते विमान तय समय पर नहीं उतर सका और दोबारा उतरने की कोशिश से पहले उसे आसमान में चक्कर लगाना पड़ा। विमान ने आखिरकार रात करीब 11:25 बजे सुरक्षित रूप से उतर गया। सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।
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घटना के बाद विमानन कंपनी ने हवाईअड्डा अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, कोलकाता हवाईअड्डा प्रशासन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पुलिस थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है। कोलकाता हवाईअड्डे के निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि हवाईअड्डे के आसपास लेजर रोशनी का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। हालांकि, इस तरह की घटनाएं कभी-कभी होती हैं और इससे विमान संचालन प्रभावित हो सकता है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दे दी गई है और वे इसकी जांच कर रहे हैं। इससे पहले भी पायलटों ने उड़ान भरने और विमान उतारने के दौरान लेजर रोशनी से उनकी दृष्टि प्रभावित होने की शिकायत की है। 2025 में दुर्गा पूजा के दौरान श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब के पूजा पंडाल के पास इस्तेमाल की गई लेजर रोशनी को लेकर पायलटों ने चिंता जताई थी। इसके बाद लेजर शो बंद कर दिया गया था।
हवाईअड्डे के सूत्रों के अनुसार, तेज लेजर किरणें पायलट की दृष्टि को कुछ समय के लिए प्रभावित कर सकती हैं। इससे उनका ध्यान भटक सकता है और कुछ समय के लिए उन्हें लगभग दिखाई न देने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उड़ान भरने और उतरने के महत्वपूर्ण चरणों में ऐसी स्थिति विमान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
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उड़ान को शनिवार रात 11:20 बजे उतरना था। सूत्रों ने बताया कि जब विमान हवाईअड्डे की हवाई पट्टी से करीब आठ समुद्री मील दूर था, तभी पायलट ने मध्यमग्राम-बारासात की ओर से कॉकपिट की तरफ आती तेज लेजर रोशनी देखी।
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पायलट को हो गया दिशा भ्रम
लेजर की अचानक तेज रोशनी से पायलट की नजर कुछ समय के लिए प्रभावित हुई और वह क्षणभर के लिए दिशा को लेकर भ्रमित हो गया। इसके चलते विमान तय समय पर नहीं उतर सका और दोबारा उतरने की कोशिश से पहले उसे आसमान में चक्कर लगाना पड़ा। विमान ने आखिरकार रात करीब 11:25 बजे सुरक्षित रूप से उतर गया। सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।
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घटना के बाद विमानन कंपनी ने हवाईअड्डा अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, कोलकाता हवाईअड्डा प्रशासन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पुलिस थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है। कोलकाता हवाईअड्डे के निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि हवाईअड्डे के आसपास लेजर रोशनी का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। हालांकि, इस तरह की घटनाएं कभी-कभी होती हैं और इससे विमान संचालन प्रभावित हो सकता है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दे दी गई है और वे इसकी जांच कर रहे हैं। इससे पहले भी पायलटों ने उड़ान भरने और विमान उतारने के दौरान लेजर रोशनी से उनकी दृष्टि प्रभावित होने की शिकायत की है। 2025 में दुर्गा पूजा के दौरान श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब के पूजा पंडाल के पास इस्तेमाल की गई लेजर रोशनी को लेकर पायलटों ने चिंता जताई थी। इसके बाद लेजर शो बंद कर दिया गया था।
हवाईअड्डे के सूत्रों के अनुसार, तेज लेजर किरणें पायलट की दृष्टि को कुछ समय के लिए प्रभावित कर सकती हैं। इससे उनका ध्यान भटक सकता है और कुछ समय के लिए उन्हें लगभग दिखाई न देने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उड़ान भरने और उतरने के महत्वपूर्ण चरणों में ऐसी स्थिति विमान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है।