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‘इतिहास दोहराया न जाए’: जयराम रमेश को क्यों सताने लगा साल 2023 का डर, संसद में तब क्या हुआ था?
Sun, 09 Aug 2026 04:16 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 04:16 PM IST
सार
जयराम रमेश ने 2023 में 146 सांसदों के निलंबन की घटना याद दिलाते हुए आगाह किया है कि इतिहास दोबारा नहीं दोहराया जाना चाहिए। आगामी हफ्तों में एफसीआरए और परिसीमन जैसे बड़े विधेयक आने की संभावना है। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10 से 12 अगस्त तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 2023 के शीतकालीन सत्र में 146 विपक्षी सांसदों के अभूतपूर्व निलंबन को याद करते हुए रविवार को कहा कि उस दौरान बेहद कम विपक्षी नेताओं की मौजूदगी के बीच कई महत्वपूर्ण कानून पारित किए गए थे। उन्होंने आगाह किया कि इतिहास दोहराया नहीं जाना चाहिए।
रमेश का यह बयान संसद के मौजूदा मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह से ठीक पहले आया है। इस दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए बिल) समेत कई अहम विधेयकों पर विचार और उन्हें पारित किए जाने की संभावना है।
13 दिसंबर 2023 को संसद में क्या हुआ था?
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में 13 दिसंबर 2023 की घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था, तभी दो युवक दर्शक दीर्घा से लोकसभा में कूद गए थे। उन्होंने नारे लगाए और कनस्तरों से पीला धुआं छोड़ा था। इसी दौरान दो अन्य लोगों ने संसद भवन के बाहर रंगीन धुएं वाले कनस्तर चलाए थे। रमेश ने इसे संसद की सुरक्षा में 'चौंकाने वाली और गंभीर चूक' बताया।
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विपक्ष ने गृह मंत्री से बयान की मांग की थी
रमेश के मुताबिक, इस घटना के बाद पूरा विपक्ष लगातार केंद्रीय गृह मंत्री से बयान की मांग करता रहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री चुप रहे। इसके बाद 14 दिसंबर से 21 दिसंबर 2023 के बीच कुल 146 सांसदों को निलंबित किया गया। इनमें 100 लोकसभा और 46 राज्यसभा सांसद थे।
विपक्ष की गैरमौजूदगी में पारित हुए कई अहम कानून
रमेश ने दावा किया कि इन रिकॉर्ड निलंबनों के बाद सत्र के बाकी हिस्से में विपक्ष की मौजूदगी बेहद कम रही और संसद ने कई महत्वपूर्ण कानून पारित किए। उन्होंने खास तौर पर तीन आपराधिक कानूनों का जिक्र किया, जिन्हें लोकसभा में 20 दिसंबर 2023 और राज्यसभा में 21 दिसंबर 2023 को पारित किया गया था।
इस बार कांग्रेस ने क्यों जारी किया व्हिप?
मौजूदा मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह को देखते हुए कांग्रेस ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा के अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सांसदों से कहा है कि वे 10, 11 और 12 अगस्त 2026 को अपने-अपने सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहें, क्योंकि इन दिनों बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है।
राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने अपने तीन लाइन के व्हिप में सांसदों से कहा कि वे तीनों दिन सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक मौजूद रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें। लोकसभा में भी कांग्रेस के मुख्य सचेतक के सुरेश ने पार्टी सांसदों को इसी तरह का व्हिप जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने अपने इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से भी कहा है कि वे 10, 11 और 12 अगस्त को अपने सांसदों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करें।
यह भी पढ़ें: बिदादी में क्यों भड़का जमीन विवाद: क्या है GBIT परियोजना, 9,600 एकड़ जमीन पर क्यों आमने-सामने सरकार-विपक्ष?
एफसीआरए और संविधान संशोधन में क्या है बहुमत का अंतर?
एफसीआरए विधेयक को पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है। वहीं, अगर सरकार परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लाती है, तो उसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने सांसदों को तीनों दिन सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है और इंडिया गठबंधन के सहयोगियों से भी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है।
केसी वेणुगोपाल बोले- पारित नहीं होने देंगे एफसीआरए विधेयक
वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार संसद में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए बिल) पेश करती है तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका जोरदार विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र अगले दो-तीन दिनों में यह विधेयक लाने की सोच रहा है तो वह इस उम्मीद को अपने तक ही रखे। उन्होंने कहा, 'हम इस जनविरोधी और असंवैधानिक विधेयक को पारित नहीं होने देंगे।'
अमित शाह पर भी साधा निशाना
इतना ही नहीं, वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि छात्र यह सवाल पूछ रहे हैं कि प्रदर्शन दबाने के लिए पैलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया था?
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रमेश का यह बयान संसद के मौजूदा मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह से ठीक पहले आया है। इस दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए बिल) समेत कई अहम विधेयकों पर विचार और उन्हें पारित किए जाने की संभावना है।
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13 दिसंबर 2023 को संसद में क्या हुआ था?
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में 13 दिसंबर 2023 की घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था, तभी दो युवक दर्शक दीर्घा से लोकसभा में कूद गए थे। उन्होंने नारे लगाए और कनस्तरों से पीला धुआं छोड़ा था। इसी दौरान दो अन्य लोगों ने संसद भवन के बाहर रंगीन धुएं वाले कनस्तर चलाए थे। रमेश ने इसे संसद की सुरक्षा में 'चौंकाने वाली और गंभीर चूक' बताया।
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विपक्ष ने गृह मंत्री से बयान की मांग की थी
रमेश के मुताबिक, इस घटना के बाद पूरा विपक्ष लगातार केंद्रीय गृह मंत्री से बयान की मांग करता रहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री चुप रहे। इसके बाद 14 दिसंबर से 21 दिसंबर 2023 के बीच कुल 146 सांसदों को निलंबित किया गया। इनमें 100 लोकसभा और 46 राज्यसभा सांसद थे।
विपक्ष की गैरमौजूदगी में पारित हुए कई अहम कानून
रमेश ने दावा किया कि इन रिकॉर्ड निलंबनों के बाद सत्र के बाकी हिस्से में विपक्ष की मौजूदगी बेहद कम रही और संसद ने कई महत्वपूर्ण कानून पारित किए। उन्होंने खास तौर पर तीन आपराधिक कानूनों का जिक्र किया, जिन्हें लोकसभा में 20 दिसंबर 2023 और राज्यसभा में 21 दिसंबर 2023 को पारित किया गया था।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की जगह ली।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की जगह ली।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह ली।
- इसके अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) विधेयक भी पारित किया गया था।
इस बार कांग्रेस ने क्यों जारी किया व्हिप?
मौजूदा मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह को देखते हुए कांग्रेस ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा के अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सांसदों से कहा है कि वे 10, 11 और 12 अगस्त 2026 को अपने-अपने सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहें, क्योंकि इन दिनों बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है।
राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने अपने तीन लाइन के व्हिप में सांसदों से कहा कि वे तीनों दिन सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक मौजूद रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें। लोकसभा में भी कांग्रेस के मुख्य सचेतक के सुरेश ने पार्टी सांसदों को इसी तरह का व्हिप जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने अपने इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से भी कहा है कि वे 10, 11 और 12 अगस्त को अपने सांसदों की सदन में मौजूदगी सुनिश्चित करें।
यह भी पढ़ें: बिदादी में क्यों भड़का जमीन विवाद: क्या है GBIT परियोजना, 9,600 एकड़ जमीन पर क्यों आमने-सामने सरकार-विपक्ष?
एफसीआरए और संविधान संशोधन में क्या है बहुमत का अंतर?
एफसीआरए विधेयक को पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है। वहीं, अगर सरकार परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लाती है, तो उसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने सांसदों को तीनों दिन सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है और इंडिया गठबंधन के सहयोगियों से भी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है।
केसी वेणुगोपाल बोले- पारित नहीं होने देंगे एफसीआरए विधेयक
वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार संसद में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए बिल) पेश करती है तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका जोरदार विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र अगले दो-तीन दिनों में यह विधेयक लाने की सोच रहा है तो वह इस उम्मीद को अपने तक ही रखे। उन्होंने कहा, 'हम इस जनविरोधी और असंवैधानिक विधेयक को पारित नहीं होने देंगे।'
अमित शाह पर भी साधा निशाना
इतना ही नहीं, वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि छात्र यह सवाल पूछ रहे हैं कि प्रदर्शन दबाने के लिए पैलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया था?