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PAC की रेलवे को दो टूक: वंदे भारत चमक रही, जनरल ट्रेनें गंदी क्यों? गरीब-मिडिल क्लास के साथ भेदभाव पर उठे सवाल
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Tue, 10 Feb 2026 02:32 PM IST
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सार
संसद की लोक लेखा समिति ने (पीएसी) भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। समिति ने कहा है कि ट्रेनों में साफ सफाई का स्तर एक जैसा नहीं है।
Vande Bharat Sleeper Train
- फोटो : ANI
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विस्तार
संसद की लोक लेखा समिति ने (पीएसी) भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। समिति ने कहा है कि ट्रेनों में साफ सफाई का स्तर एक जैसा नहीं है। इसमें साफ तौर पर भेदभाव नजर आता है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली समिति ने रेलवे पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे ट्रेनों में जाति व्यवस्था जैसा बताया है।
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समिति के मुताबिक, वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में कोच चमकते हैं। बिस्तर साफ होते हैं और शौचालय बेहतर स्थिति में मिलते हैं। जबकि सामान्य ट्रेनों में सफाई की हालत बेहद खराब है। समिति ने इसे आम यात्रियों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि यह गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों के साथ भेदभाव है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति की चर्चा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2025 की रिपोर्ट नंबर-15 की जांच के दौरान हुई। यह रिपोर्ट मार्च 2023 तक लंबी दूरी की ट्रेनों में सफाई और सैनिटेशन व्यवस्था पर आधारित है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि बड़ी संख्या में यात्री सफाई को लेकर असंतुष्ट मिले। सबसे ज्यादा शिकायतें शौचालयों में गंदगी, पानी की कमी और ट्रेन में सफाई सेवा ठीक से न होने को लेकर दर्ज की गईं। खासतौर पर नॉन-एसी कोचों में शौचालयों की हालत सबसे खराब बताई गई है।
बैठक में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने सफाई व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतें गिनाईं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की कमी, सीमित बजट, यात्रियों की भारी भीड़ और ट्रेनों के कम ठहराव के कारण सफाई कर पाना चुनौती बन जाता है। लेकिन लोक लेखा समिति ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। समिति ने कहा, ये समस्याएं नई नहीं हैं। वर्षों से इन्हें सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। बैठक में मौजूद एक भाजपा सदस्य ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमीरों की ट्रेनें साफ और गरीबों की गंदी रहना, ट्रेनों में जातिवाद जैसा है।
लोक लेखा समिति ने रेलवे को निर्देश दिए हैं कि, सभी ट्रेनों में एक जैसे सफाई नियम लागू किए जाएं। सभी ट्रेनों में नियमित रूप से सफाई की जांच कराई जाए। समिति ने यात्रियों की शिकायतों के लिए डिजिटल डैशबोर्ड बनाने, हर जोन में शिकायत निपटाने की समान व्यवस्था लागू करने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले जोनों को पुरस्कार व खराब प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई की भी सिफारिश की है। इसके साथ ही क्विक-वाटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने और सफाई के लिए बजट बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।समिति ने रेलवे को सुधार के लिए तय समय सीमा भी दी है। अगर इन सुझावों पर अमल होता है, तो सामान्य ट्रेनों में भी सफाई का स्तर बेहतर हो सकता है और यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर मिलेगा।