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PM मोदी डिग्री मामला: 'केवल सनसनी फैलाने का प्रयास'; DU का दो टूक जवाब; दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 10 Feb 2026 03:33 PM IST
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सार

दिल्ली विश्वविद्यालय ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि पीएम मोदी की डिग्री जानकारी की मांग केवल सनसनी फैलाने के लिए की जा रही है। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय को तीन हफ्ते का समय दिया।

Delhi University Claims Effort to Sensationalise as Court Reviews Plea for PM Modi Degree Details
पीएम मोदी डिग्री विवाद - फोटो : ANI
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी के खुलासे को लेकर चल रहे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई देरी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए विश्वविद्यालय को तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया।

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मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा जैसा कि प्रार्थना की गई है, देरी माफ करने से संबंधित आवेदन पर आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया जाता है। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
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DU की ओर से सॉलिसिटर जनरल का पक्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि इस पूरे मामले में कुछ भी ठोस नहीं है और इसे केवल सनसनी फैलाने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने अपील में हुई देरी के साथ-साथ मामले के गुण-दोष पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

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अपीलकर्ताओं का तर्क: देरी मामूली
अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि करीब ढाई महीने बीत जाने के बावजूद डीयू ने देरी पर आपत्ति दाखिल नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह देरी केवल 15 से 45 दिनों की है, जिसे अदालत आसानी से माफ कर सकती है। वकील ने यह भी मांग की कि यदि दिल्ली विश्वविद्यालय मुख्य अपील पर जवाब देना चाहता है, तो कोर्ट औपचारिक नोटिस जारी करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने आपत्ति जताते हुए कहा नोटिस जारी करना सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए नहीं हो सकता।

क्या है पूरा मामला?
यह अपील दिल्ली हाईकोर्ट के उस एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसने 25 अगस्त 2025 को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। अपीलकर्ताओं में आरटीआई कार्यकर्ता नीरज, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह और अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद शामिल हैं।

एकल न्यायाधीश का अहम फैसला
गौरतलब है कि एकल न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा था कि केवल सार्वजनिक पद पर होने के कारण किसी व्यक्ति की सभी व्यक्तिगत जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। कोर्ट ने साफ कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना है, न कि सनसनी के लिए सामग्री उपलब्ध कराना। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि किसी सार्वजनिक पद के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य होती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। इसी आधार पर सीआईसी के रुख को पूरी तरह गलत बताया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी फैसले में सीआईसी के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के कक्षा 10 और 12 के रिकॉर्ड सीबीएसई से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

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