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Pakistan: पाक दूतावासों के पास नहीं लिफ्ट और हीटर रिपेयरिंग के पैसे, कश्मीर प्रोपेगेंडा के खर्च पर उठे सवाल

Tue, 06 Feb 2024 02:57 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 06 Feb 2024 02:57 PM IST
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सार
खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी दूतावास समेत अलग-अलग वाणिज्य दूतावासों में कश्मीर के लिए खर्च किए जाने वाले लाखों डॉलर पर सवाल उठने लगे। दरअसल पाकिस्तान में अभी भी जरूरत की चीजों के लिए लोगों को मोहताज होना पड़ रहा है। आर्थिक बदहाली इस कदर हो गई है कि लोगों को रोजमर्रा का सामान मुहैया नहीं हो पा रहा है...
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Pakistan embassies abroad do not have money for repairing lift and heaters
Pakistan Embassy in New York - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

तकरीबन 300 पाकिस्तानी रुपये खर्च करने पर एक यूरो मिलता है। जबकि एक अमेरिकी डॉलर के लिए पाकिस्तान को 280 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पाकिस्तान में कंगाली का हाल कुछ इस तरह है कि वह अमेरिका और यूरोप में अपने दूतावासों की गाड़ियों का इंश्योरेंस रिनुअल तक नहीं करवा पा रहा है। बावजूद इसके पाकिस्तान ने कश्मीर एकजुटता दिवस के नाम पर लाखों डॉलर और यूरो फूंक दिए। लेकिन जिस मंशा के साथ पाकिस्तान ने ऐसा किया, उसका नतीजा शून्य रहा। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से देश और दुनिया भर में सोमवार को मनाया गया कश्मीर एकता दिवस न सिर्फ फेल हुआ, बल्कि कंगाल पाकिस्तान की ओर से खर्च किए गए रुपयों पर उनके ही लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए।

पाकिस्तान ने पांच फरवरी को कश्मीर एकजुटता दिवस पर पीओके समेत पूरे पाकिस्तान और दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में बड़े कार्यक्रमों को करने का खाका तैयार किया था। पाकिस्तान ने इस कार्यक्रम के तहत पीओके में कई विश्वविद्यालय और स्कूलों समेत सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों से शिरकत करने की अपील भी की थी। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने कश्मीर पर रचे जाने वाले अपने सरकारी प्रोपेगेंडा के लिए करोड़ों रुपये भी खर्च किए। लेकिन पीओके के बड़ी संख्या में लोगों ने पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडा में फंसने की बजाय अपनी ही जरूरत की मांगों की आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी। केंद्रीय खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान का यह प्रोपेगेंडा तब फेल हो गया, जब स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ ही नारेबाजी शुरू की और उसका विरोध किया।

केंद्रीय खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने कश्मीर एकता दिवस के नाम पर छह दूतावासों और 14 संगठनों के माध्यम से दुनिया भर में राग अलापना शुरू किया था। पाकिस्तान ने न सिर्फ पीओके, बल्कि अपनी स्लीपर सेल के माध्यम से कश्मीर घाटी में भी माहौल बनाने के लिए जमकर पैसा खर्च किया। हालांकि पाकिस्तान की यह कोशिश तब फेल हो गई, जब उसका ही दांव उसके लिए उल्टा पड़ गया। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी दूतावास समेत अलग-अलग वाणिज्य दूतावासों में कश्मीर के लिए खर्च किए जाने वाले लाखों डॉलर पर सवाल उठने लगे। दरअसल पाकिस्तान में अभी भी जरूरत की चीजों के लिए लोगों को मोहताज होना पड़ रहा है। आर्थिक बदहाली इस कदर हो गई है कि लोगों को रोजमर्रा का सामान मुहैया नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा दूतावासों के जरूरी खर्च भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के न्यूयॉर्क स्थित काउंसलेट में तकरीबन साढ़े तीन करोड रुपये के जरूरी फंड पाकिस्तान की ओर से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। काउंसलेट के अधिकारियों ने इस्लामाबाद के डिप्टी अकाउंट ऑफिसर को भेजे गए एक महत्वपूर्ण रिमाइंडर ईमेल में एक जुलाई 2023 से 30 जून 2024 तक के लिए साढ़े तीन करोड़ करोड़ पाकिस्तानी रुपये की व्यवस्था करने की गुजारिश की। सूत्रों के मुताबिक सिर्फ इतने ही बजट के लिए अमेरिका स्थित पाकिस्तान एंबेसी ने इस्लामाबाद को चिट्ठी नहीं लिखी, बल्कि न्यूयॉर्क मिशन के खाते में मौजूद एक लाख सत्तावन हजार डॉलर का भी जिक्र कर इसे अपर्याप्त बताया। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से विदेशी दूतावासों को बेवजह किए जाने वाले खर्चों पर पाकिस्तान के स्थानीय लोगों ने आपत्ति दर्ज की। पाकिस्तान ने इन्हीं दूतावासों के माध्यम से कश्मीर पर अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी थी।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के न्यूयॉर्क स्थित दूतावास समेत लॉस एंजिल्स में पाकिस्तान काउंसलेट ने कश्मीर पर अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए पांच फरवरी के लिए माहौल बनाने की कवायद शुरू की थी। जिसमें अमेरिका के अलावा कजाकिस्तान, बेल्जियम, प्राग और हंगरी में भी लाखों रुपये खर्च करके एक नैरेटिव सेट करने का अभियान शुरू किया था। नेवी से रिटायर्ड कैप्टन बृजेश झा कहते हैं कि पाकिस्तान की ओर से कश्मीर पर माहौल बनाने के लिए जिस तरह से पैसा बहाया गया, उससे उनके ही आवाम में नाराजगी है। क्योंकि वह कहते हैं कि जिस मकसद के लिए पाकिस्तान ने दुनिया भर में 5 फरवरी को कश्मीर का राग अलापा, वह बेमकसद ही साबित हुआ। बल्कि पीओके जैसे क्षेत्र में उनको विरोध का सामना करना पड़ा।

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना ने जिन लोगों को कश्मीर पर माहौल बनाने की जिम्मेदारी दी थी, उनमें ज्यादातर वह लोग थे जो पहले भी भारत के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक्टिव रहे हैं। इस बार भी पाकिस्तान में 31 जनवरी से लेकर 5 फरवरी तक इन्हीं हैंडलर्स को सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के हैशटैग के साथ आगे आने का पूरा प्लान समझाया था। लेकिन जिस तरह का माहौल बनाने की पाकिस्तान की योजना थी, वह उसमें फेल हो गया। पाकिस्तानी मामलों के जानकार और सेना के रिटायर्ड अधिकारी ब्रिगेडियर मलकीत चहल कहते हैं कि पाकिस्तान हमेशा से अपने चुनावों के समय इसी तरह की साजिश करता आया है। क्योंकि तीन दिन बाद पाकिस्तान में चुनाव है और बगैर भारत और कश्मीर के वहां पर कोई भी माहौल नहीं बनता। यही वजह है कि पाकिस्तान ने लाखों करोड़ों रुपये खर्च करके एक माहौल बनाने की कोशिश की थी जो सफल नहीं हो सकी।

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