Parliament: संसद भवन को भी मिलती है 'जेड प्लस' सुरक्षा, PDG कमांडो सहित 4 स्तरीय घेरे में कौन होता है शामिल
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संसद भवन की सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मदद से एक अचूक घेरा तैयार किया गया है। चार स्तरीय सुरक्षा को 'जेड प्लस' सिक्योरिटी, का भी नाम दिया गया है। संसद परिसर में कोई भी सांसद खुद को 'जेड प्लस' सुरक्षा घेरे में महसूस कर सकता है। सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह बात किसी भी तरह के शारीरिक हमले को लेकर कही जाती है। मसलन, आतंकी हमला, मुख्य गेटों से वाहन टकराना, विस्फोटक फेंकना या ड्रोन अटैक आदि को रोकने के लिए, संसद भवन में सक्षम बल सदैव मौजूद रहते हैं।
संसद भवन के गेटों पर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात होते हैं। आगुंतकों की जांच का काम भी उन्हीं को सौंपा गया है। दिल्ली पुलिस ही उनका सामान, मोबाइल फोन, बैग या फाइलों की जांच करती है। इस जांच के बाद संसद भवन परिसर में पहुंचा जा सकता है। अगर किसी को लोकसभा या राज्यसभा की कार्यवाही देखनी है, तो दर्शक दीर्घा में जाने से पहले दोबारा से जांच होती है। पुराने संसद भवन में भी ऐसा ही होता था। वहां भी छोटे-छोटे एंट्री गेट लगे हुए थे। दिल्ली पुलिस के जवान, मैटल डिटेक्टर की मदद से वहां पर आगुंतकों की जांच करते हैं। अगर किसी के पास कोई हथियार या किसी धातु का कोई उपकरण होता है, तो वह इन्हीं गेटों पर पकड़ा जाता है। तीसरे सुरक्षा घेरे में पीएसएस के कर्मी रहते हैं। वे लोगों के पास आदि तैयार करते हैं। दस्तावेज जांचने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की रहती है।
संसद भवन की ओवरआल सुरक्षा का जिम्मा 'पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप' (पीडीजी) के पास रहता है। इसमें सीआरपीएफ के जांबाज अफसर/जवान रहते हैं। संसद भवन पर हुए हमले में सीआरपीएफ जांबाजों ने अपनी बहादुरी का परिचय दिया था। पिछले साल ही 'पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप' के लिए एक आदेश जारी किया गया था। इसमें कहा गया कि पीडीजी में सीआरपीएफ के युवा अफसर तैनात रहेंगे। 'कोबरा' जैसी विशेष प्रशिक्षित इकाई, जिसमें तैनात जवान और अधिकारी जंगल वारफेयर के एक्सपर्ट होते हैं, उन्हें भी पीडीजी में शामिल किया जाता है।
पीडीजी के लिए डिप्टी कमांडेंट की आयु 40 साल से नीचे रहती है। पीडीजी में एसी की तैनाती के लिए उसकी आयु 38 वर्ष से कम होनी चाहिए। पांच साल में डीसी/एसी की एपीएआर में 'गुड' मिलना जरूरी है। पांच साल का फील्ड अनुभव होना भी आवश्यक है। जेड सिक्योरिटी वाले सभी हथियार एवं उपकरण, पीडीजी के पास मौजूद होते हैं। डबल प्रोटेक्शन गियर से लैस ये सभी जवान शॉर्प शूटर होते हैं। संसद भवन के कॉमन सेंटर में पीडीजी के अलावा दूसरे बलों की छोटी टीम भी रहती है। इसमें आईटीबीपी, खुफिया ब्यूरो, विशेष सुरक्षा समूह, एनएसजी व दिल्ली पुलिस की इकाई शामिल रहती है। अगर संसद परिसर में कहीं भी कोई अप्रिय अलर्ट मिलता है, तो उसकी सूचना उक्त सभी एजेंसियों तक पहुंच जाती है। पीडीजी के जवानों की संख्या लगभग 1700 रखी गई है। संसद परिसर में करीब सात सौ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ये सभी कैमरे, इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम पर काम करते हैं। कई जगहों पर वाहन स्कैनर भी लगे हैं।