Parliament: केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नहीं बनेगा अलग मंत्रालय, सरकार ने बताया- पुराने तरीके से होगा विकास
केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन पर सरकार ने साफ किया है कि अलग मंत्रालय या नई नीति बनाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि संविधान के तहत मौजूदा व्यवस्था में ही सभी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालयों के बीच समन्वय और संसदीय समिति की निगरानी से विकास कार्य प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहे हैं।
विस्तार
केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और सीमावर्ती इलाकों के विकास को लेकर सरकार ने लोकसभा में अपनी स्थिति साफ कर दी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि फिलहाल केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंत्रालय या नई नीति बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं, सीमा से सटे क्षेत्रों में विकास के लिए चल रही योजनाओं के जरिए बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत ही योजनाओं का प्रभावी संचालन और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का काम जारी है।
नित्यानंद राय ने आगे बताया कि देश के केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) का प्रशासन संविधान के अनुच्छेद 239 से 241 के तहत किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंत्रालय, विशेष समिति या नई नीति बनाई जाए। उन्होंने बताया कि फिलहाल विभिन्न मंत्रालयों के बीच नियमित बातचीत और समन्वय से ही योजनाएं बनाई और लागू की जाती हैं। साथ ही, संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति केंद्र शासित प्रदेशों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करती है।
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सीमावर्ती इलाकों के विकास पर क्या कहा?
सरकार ने बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (बीएडीपी) के बारे में भी जानकारी दी। इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0 से 10 किलोमीटर के भीतर आने वाले गांवों और कस्बों में विकास कार्य किए जाते हैं। यह योजना 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सीमा पर रहने वाले लोगों की जिंदगी बेहतर बनाना और उन्हें जरूरी सुविधाएं देना है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, खेती, खेल, पीने का पानी, स्वच्छता और छोटे उद्योगों से जुड़े काम किए गए।
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इस योजना के तहत करीब 39,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई
सरकार के अनुसार, साल 2004-05 से अब तक इस योजना के तहत करीब 39,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूलों में अतिरिक्त कमरे, आंगनवाड़ी, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने बताया कि यह योजना अब अपने अंतिम चरण (सनसेट फेज) में है। पिछले तीन वर्षों में इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को करीब 168.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, ताकि पहले से चल रही परियोजनाओं को पूरा किया जा सके।
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