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'तीन करोड़ दो, मंत्री बन जाओ': प्रियंका गांधी का PS बन विधायक-सांसदों को करता था फोन; केरल में दर्ज हुई FIR
Thu, 16 Jul 2026 02:46 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 16 Jul 2026 02:46 PM IST
सार
प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव बनकर एक शातिर ठग ने केरल के सांसदों और कांग्रेस विधायक विद्या बालकृष्णन से संपर्क कर मंत्री बनाने के नाम पर तीन करोड़ रुपये मांगने की कोशिश की। शिकायत के बाद वायनाड और कोझिकोड साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कॉल नई दिल्ली से किए जाने की बात सामने आई है और एक संदिग्ध की पहचान भी कर ली गई है।
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प्रियंका गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केरल के सांसदों और एक विधायक को ठगने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव (PS) बनकर संपर्क करने वाले एक शातिर ठग के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि आरोपी ने खुद को प्रियंका गांधी के निजी सचिव के रूप में पेश कर जनप्रतिनिधियों से पैसे मांगने की कोशिश की। मामले की जांच साइबर पुलिस कर रही है।
शिकायत किसने दर्ज कराई और मामला कैसे सामने आया?
प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव डी.एस. राजकुमार की ओर से राज्य पुलिस प्रमुख और वायनाड के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने नई दिल्ली में रहने वाले राजकुमार की पहचान का दुरुपयोग करते हुए खुद को उनका परिचित बताया और कई जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया।
किन नेताओं को बनाया गया निशाना?
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कांग्रेस की एलाथुर विधायक के. विद्या बालकृष्णन और सांसद शफी परंबिल तथा डीन कुरियाकोस से संपर्क किया। राजकुमार ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी पहचान और सांसदों के कार्यालय का नाम इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों से पैसे मांगने और उन्हें ठगने की कोशिश की।
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पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
वायनाड साइबर पुलिस ने बुधवार को फर्जी पहचान अपनाने और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे पहले कोझिकोड साइबर पुलिस ने भी कांग्रेस विधायक विद्या बालकृष्णन की शिकायत के आधार पर इसी मामले में केस दर्ज किया था।
विधायक को क्या कहा गया था?
पुलिस के अनुसार, 6 जुलाई को दोपहर करीब दो बजे विधायक विद्या बालकृष्णन को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को नई दिल्ली स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से डी.एस. राजकुमार बताया।
मंत्री बनाने के नाम पर कितनी रकम मांगी गई?
कॉल करने वाले ने दावा किया कि केरल मंत्रिमंडल में फेरबदल होने वाला है और यदि वह तीन करोड़ रुपये देती हैं तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। पुलिस के मुताबिक, बातचीत अंग्रेजी में हुई और करीब 10 मिनट तक चली। बातचीत के दौरान ही विधायक को कॉल करने वाले की बातों पर संदेह होने लगा। कॉल करने वाले ने यह भी दावा किया कि कोझिकोड के एक अन्य सांसद ने मंत्री पद के लिए विद्या बालकृष्णन के नाम की सिफारिश की है।
धोखाधड़ी की पुष्टि कैसे हुई?
पुलिस के अनुसार, कॉल खत्म होने के बाद विधायक ने संबंधित सांसद से संपर्क किया। सांसद ने बताया कि AICC कार्यालय का प्रतिनिधि बताने वाले एक व्यक्ति ने उनसे उनका और एक अन्य विधायक का संपर्क नंबर मांगा था। इसके बाद बालकृष्णन ने सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से संपर्क किया, जहां यह स्पष्ट किया गया कि ऐसा कोई कॉल नहीं किया गया था और यह पूरी तरह ठगी की कोशिश थी।
ये भी पढ़ें: 'लोकतंत्र में सवाल पूछना बंद न हो': जान दांव पर लगी हो तो सरकार चुप क्यों? वांगचुक के समर्थन में बोले सिब्बल
जांच में अब तक क्या पता चला है?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, कॉल नई दिल्ली से की गई थी और इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान कर ली गई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अभी यह पता लगाया जाना बाकी है कि इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड फर्जी पहचान दस्तावेजों के आधार पर लिया गया था या नहीं। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस की एक टीम जल्द ही नई दिल्ली जाएगी।
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शिकायत किसने दर्ज कराई और मामला कैसे सामने आया?
प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव डी.एस. राजकुमार की ओर से राज्य पुलिस प्रमुख और वायनाड के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने नई दिल्ली में रहने वाले राजकुमार की पहचान का दुरुपयोग करते हुए खुद को उनका परिचित बताया और कई जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया।
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किन नेताओं को बनाया गया निशाना?
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कांग्रेस की एलाथुर विधायक के. विद्या बालकृष्णन और सांसद शफी परंबिल तथा डीन कुरियाकोस से संपर्क किया। राजकुमार ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी पहचान और सांसदों के कार्यालय का नाम इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों से पैसे मांगने और उन्हें ठगने की कोशिश की।
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पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
वायनाड साइबर पुलिस ने बुधवार को फर्जी पहचान अपनाने और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे पहले कोझिकोड साइबर पुलिस ने भी कांग्रेस विधायक विद्या बालकृष्णन की शिकायत के आधार पर इसी मामले में केस दर्ज किया था।
विधायक को क्या कहा गया था?
पुलिस के अनुसार, 6 जुलाई को दोपहर करीब दो बजे विधायक विद्या बालकृष्णन को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को नई दिल्ली स्थित प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से डी.एस. राजकुमार बताया।
मंत्री बनाने के नाम पर कितनी रकम मांगी गई?
कॉल करने वाले ने दावा किया कि केरल मंत्रिमंडल में फेरबदल होने वाला है और यदि वह तीन करोड़ रुपये देती हैं तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। पुलिस के मुताबिक, बातचीत अंग्रेजी में हुई और करीब 10 मिनट तक चली। बातचीत के दौरान ही विधायक को कॉल करने वाले की बातों पर संदेह होने लगा। कॉल करने वाले ने यह भी दावा किया कि कोझिकोड के एक अन्य सांसद ने मंत्री पद के लिए विद्या बालकृष्णन के नाम की सिफारिश की है।
धोखाधड़ी की पुष्टि कैसे हुई?
पुलिस के अनुसार, कॉल खत्म होने के बाद विधायक ने संबंधित सांसद से संपर्क किया। सांसद ने बताया कि AICC कार्यालय का प्रतिनिधि बताने वाले एक व्यक्ति ने उनसे उनका और एक अन्य विधायक का संपर्क नंबर मांगा था। इसके बाद बालकृष्णन ने सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से संपर्क किया, जहां यह स्पष्ट किया गया कि ऐसा कोई कॉल नहीं किया गया था और यह पूरी तरह ठगी की कोशिश थी।
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जांच में अब तक क्या पता चला है?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, कॉल नई दिल्ली से की गई थी और इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान कर ली गई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अभी यह पता लगाया जाना बाकी है कि इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड फर्जी पहचान दस्तावेजों के आधार पर लिया गया था या नहीं। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस की एक टीम जल्द ही नई दिल्ली जाएगी।