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Petrol-Diesel Price: आसमान छूती तेल की कीमतों को साधने में जुटी सरकार, इथेनॉल के मिश्रण से थाम रखे हैं दाम
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सार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद डॉलर को इसका सीधा फायदा मिलता है। रुपया कमजोर होता है। भारत अपनी जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इसके कारण हमारी चिंता और बढ़ जाती है। हाइड्रोकार्बन इकानोमी के विशेषज्ञ नितिन गर्ग कहते हैं कि बाजार में कच्चे तेल की एक डॉलर की कीमत बढ़ने पर भारत पर सालाना 8000-9000 करोड़ रुपये का आयात खर्च बोझ बढ़ जाता है।
पेट्रोल-डीजल।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने हाहाकार मचाकर रखा है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय समेत अन्य देश में पेट्रोल की कीमतों को थामने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं। पेट्रोलियम मामलों के जानकारों का कहना है कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में समस्याएं काफी बढ़ सकती हैं।
भारत पर कितना बढ़ रहा है बोझ?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद डॉलर को इसका सीधा फायदा मिलता है। रुपया कमजोर होता है। भारत अपनी जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इसके कारण हमारी चिंता और बढ़ जाती है। हाइड्रोकार्बन इकानोमी के विशेषज्ञ नितिन गर्ग कहते हैं कि बाजार में कच्चे तेल की एक डॉलर की कीमत बढ़ने पर भारत पर सालाना 8000-9000 करोड़ रुपये का आयात खर्च बोझ बढ़ जाता है।
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भारत पर कितना बढ़ रहा है बोझ?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद डॉलर को इसका सीधा फायदा मिलता है। रुपया कमजोर होता है। भारत अपनी जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इसके कारण हमारी चिंता और बढ़ जाती है। हाइड्रोकार्बन इकानोमी के विशेषज्ञ नितिन गर्ग कहते हैं कि बाजार में कच्चे तेल की एक डॉलर की कीमत बढ़ने पर भारत पर सालाना 8000-9000 करोड़ रुपये का आयात खर्च बोझ बढ़ जाता है।
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इसके कारण घरेलू ईधन पर दबाव बढ़ता है और मंहगाई दर में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि तेल का दाम बढ़ने से माल की ढुलाई, उत्पादन लागत बढ़ती है। इसका सीधा असर खाद्य और अन्य अनावश्यक वस्तुओं पर पड़ता है। व्यापार घाटा बढ़ता है। नितिन गर्ग कहते हैं कि आप देख लीजिए। ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर पार पहुंचने के बाद रुपया टूटकर 95 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
दाम तो बढ़ेंगे
वित्त मंत्रालय के अफसर कच्चे तेल का दाम बढ़ने से बढ़ रहे आर्थिक दबाव को लेकर तंग हैं। उनका कहना है कि भारत में ईधन तेल की कीमतें बढ़नी तय हैं। पेट्रोलियम और प्रकातिक गैस मंत्रालय भी ईधन तेल की कीमतों को लेकर लगातार मंत्रणा कर रहा है। ईधन तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने की रणनीति पर चल रही है। भारत पेट्रोलिमय के प्रमुख सूत्र का कहना है कि 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण के जरिए तेल की कीमतों को काबू में करने की कोशिश हो रही है। परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी तेल में इथेनॉल के प्रतिशत को बढ़ाने का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। हालांकि इथेनॉल का उपयोग बढ़ाने का असर गाड़ियों के इंजन और उसकी क्षमता पर पड़ रहा है।
दाम तो बढ़ेंगे
वित्त मंत्रालय के अफसर कच्चे तेल का दाम बढ़ने से बढ़ रहे आर्थिक दबाव को लेकर तंग हैं। उनका कहना है कि भारत में ईधन तेल की कीमतें बढ़नी तय हैं। पेट्रोलियम और प्रकातिक गैस मंत्रालय भी ईधन तेल की कीमतों को लेकर लगातार मंत्रणा कर रहा है। ईधन तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने की रणनीति पर चल रही है। भारत पेट्रोलिमय के प्रमुख सूत्र का कहना है कि 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण के जरिए तेल की कीमतों को काबू में करने की कोशिश हो रही है। परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी तेल में इथेनॉल के प्रतिशत को बढ़ाने का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। हालांकि इथेनॉल का उपयोग बढ़ाने का असर गाड़ियों के इंजन और उसकी क्षमता पर पड़ रहा है।
ईरान के मुहाने पर बैठकर अमेरिका ने थाम रखी है सांसें
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में प्रयोग कर रहा है। इसके सामानांतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुहाने पर पूरी तरह से समुद्री नाकेबंदी कर रखी है। अमेरिका और ईरान की इस रस्साकसी की कीमत पूरी दुनिया चुका रही है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि यही हाल रहे तो आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं। दुनिया के तमाम देश तेल की कीमतों के बढ़ने से काफी त्रस्त हैं।
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में प्रयोग कर रहा है। इसके सामानांतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुहाने पर पूरी तरह से समुद्री नाकेबंदी कर रखी है। अमेरिका और ईरान की इस रस्साकसी की कीमत पूरी दुनिया चुका रही है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि यही हाल रहे तो आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं। दुनिया के तमाम देश तेल की कीमतों के बढ़ने से काफी त्रस्त हैं।
