'दक्षिण से होना चाहिए पीएम': परिसीमन विधेयक का विरोध करेगी टीवीके सरकार, सभी सांसदों से कहा- एकजुट हों
तमिलनाडु के खेल मंत्री आधव अर्जुन ने परिसीमन का विरोध करते हुए कहा कि आबादी के आधार पर सीटें बढ़ने से उत्तर भारतीय राज्यों का राजनीतिक दबदबा बढ़ सकता है। उन्होंने 39 सांसदों से एकजुट होकर मौजूदा प्रतिनिधित्व बनाए रखने की मांग की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तमिलनाडु के खेल मंत्री आधव अर्जुन ने बुधवार को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आबादी के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण उत्तर भारतीय वर्चस्व को और मजबूत करेगा और तमिलनाडु की आवाज को हाशिए पर धकेल देगा।
खेल मंत्री आधव अर्जुन ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक हालात, जिसमें कुछ उत्तरी राज्य मिलकर प्रधानमंत्री तय करते हैं, उनमें बदलाव आना चाहिए और प्रधानमंत्री दक्षिणी राज्यों से भी चुना जाना चाहिए। अर्जुन ने कहा, 'ऐसी स्थिति जिसमें पांच या छह उत्तरी राज्य मिलकर यह तय कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा, उसमें बदलाव होना चाहिए। भविष्य में, प्रधानमंत्री दक्षिणी राज्यों से भी चुना जाना चाहिए खुद तमिलनाडु से।
यह प्रस्ताव कांग्रेस बनाम भाजपा के बारे में नहीं है। यह राज्यों की स्वायत्तता बनाए रखने के बारे में है। इस प्रस्ताव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हम उत्तरी भारत के दबदबे में न आएं।' मंत्री ने तर्क दिया कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने की वजह से केंद्र सरकार राज्य की इच्छा के खिलाफ नीतियां थोप पाती है।
प्रतिनिधित्व को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा, 'आज, 234 सदस्यों वाली विधानसभा में भी कभी-कभी किसी एक की आवाज नहीं सुनी जाती। संसद में तमिलनाडु के लिए ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर हमारे पास 100 सांसद होते, तो क्या NEET, GST या CAA को इस तरह थोपा जाता? समस्या पर्याप्त प्रतिनिधित्व की कमी है।'
अर्जुन ने तमिलनाडु के सभी 39 सांसदों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा, 'परिसीमन कानून चाहे जो भी रूप ले, हम सभी को एकजुट होकर यह मांग करनी चाहिए कि मौजूदा स्थिति अगले 25 वर्षों तक बनी रहे। सभी 39 सांसदों को संसद में इसके खिलाफ वोट करके इसका विरोध करना चाहिए, न कि सदन से बाहर चले जाना चाहिए।'
वित्तीय चिंताओं को लेकर क्या कहा?
अर्जुन ने वित्तीय चिंताओं का भी जिक्र किया और बताया कि तमिलनाडु राष्ट्रीय खजाने में जो भी योगदान देता है, उसके बदले उसे केवल 29 पैसे ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों के मुकाबले सीटों का अनुपात असंतुलित होता है, तो कुल सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी से भी राज्य को कोई फायदा नहीं होगा।
भाजपा ने इस पर क्या कहा?
मंत्री की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भाजपा विधायक भोजराजन (बोज राजन) ने प्रस्ताव को अनावश्यक बताया और शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के आधार पर परिसीमन की आवश्यकता का बचाव किया। भोजराजन ने कहा, 'निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव आवश्यक नहीं है। अब निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन अनिवार्य है। जनसंख्या में वृद्धि के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। गांवों के नगर पंचायतों में और कस्बों के शहरों में बदलने के साथ, तदनुसार बदलाव की आवश्यकता है।'
अर्जुन की दक्षिणी प्रधानमंत्री की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए भोजराजन ने कहा, 'क्या दक्षिण भारत का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री नहीं बन सकता? मूपानार को यह अवसर मिलने का इतिहास रहा है। अगर तमिलनाडु के लोग एकजुट रहें, तो एक तमिलियन भी प्रधानमंत्री बन सकता है।'