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Population control: सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, हर समस्या का समाधान सीधे अदालत में आने से नहीं होगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 30 Sep 2022 08:56 PM IST
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सार
अदालत ने कहा, कुछ समस्याएं हमेशा रहेंगी लेकिन हर समस्या का समाधान अनुच्छेद 32 (जिसके तहत जनहित याचिका सहित याचिकाएं सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती हैं) के माध्यम से हल नहीं की जा सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जनसंख्या नियंत्रण पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई जारी रखने के लिए अनिच्छा जताते हुए कहा कि समाज में हमेशा कुछ विवादों को हल करने की आवश्यकता होती है, लेकिन हर समस्या को सीधे शीर्ष अदालत में जाने से हल नहीं किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ भी सभी राज्यों को नोटिस जारी करने से हिचक रही थी, जिसकी याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में मांग की थी। इसमें देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्यों को दो बच्चों का कानून लागू करने सहित अन्य कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
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अदालत ने कहा, अब सरकार को लेना है फैसला
पीठ ने कहा, आपने याचिका दायर की है। नोटिस जारी कर उनका (सरकार का) ध्यान आकृष्ट किया गया है। उन्होंने समस्या पर अपना दिमाग लगाया है और अब यह उन्हें नीतिगत निर्णय लेना है। हमारा काम खत्म हो गया है। इसलिए, हम अब याचिका को बंद कर देंगे। वकील उपाध्याय ने कहा कि चूंकि जनसंख्या संविधान की समवर्ती सूची में आती है, इसलिए राज्य सरकारें इसे नियंत्रित करने के लिए कानून भी बना सकती हैं। इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे पर सभी राज्यों को नोटिस जारी करने की मांग की। इस पर सीजेआई ने कहा कि जब तक हम संतुष्ट नहीं होंगे, इस तरह के नोटिस जारी नहीं करेंगे।
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पीठ ने कहा, किसी समाज में हमेशा किसी न किसी तरह के विवाद होते हैं और उन विवादों का समाधान करना होता है। कुछ समस्याएं हमेशा रहेंगी लेकिन हर समस्या का समाधान अनुच्छेद 32 (जिसके तहत जनहित याचिका सहित याचिकाएं सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती हैं) के माध्यम से हल नहीं की जा सकती हैं। पीठ ने शुरू में कहा कि वह याचिका को बंद कर देगी, लेकिन बाद में सुनवाई 11 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले 10 जनवरी, 2020 को शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली उपाध्याय की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसमें देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए दो बच्चों के कानून सहित कुछ कदम उठाए जाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी गई थी।
प्रीवेंटिव डिटेंशन व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर आक्रमण
वहीं, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि प्रीवेंटिव डिटेंशन व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर आक्रमण है और इसलिए संविधान और इस तरह की कार्रवाई को अधिकृत करने वाला कानून जो कुछ भी सुरक्षा प्रदान करता है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने ये टिप्पणियां कीं क्योंकि इसने 12 नवंबर, 2021 को त्रिपुरा सरकार द्वारा पारित निवारक निरोध के आदेश को रद्द कर दिया था और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 (पीआईटी एनडीपीएस) में आरोपी को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया था।
