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CAPF: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कानून अधिसूचित, बदलेंगे नियुक्ति और सेवा के नियम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 09 Apr 2026 10:44 PM IST
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सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को केंद्रीय सशस्त्र बल सामान्य प्रशासन विधेयक को मंजूरी दे दी। जिसे सरकार ने नोटिफाई कर दिया। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में एक समग्र कानून के अभाव में नियामक प्रावधान बिखरे हुए तरीके से विकसित हुए, जिसके कारण सेवा संबंधी मामलों में कई मुकदमेबाजी हुई और प्रशासनिक व कार्यात्मक स्तर पर कुछ कठिनाइयां उत्पन्न हुईं।

President of India gives assent to the Central Armed Police Force General Administration Bill 2026
सीएपीएफ - फोटो : एएनआई
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विस्तार

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को पहले ही संसद की मंजूरी मिल चुकी है। विधेयक में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों- सीएपीएफ में महानिरीक्षक के 50 प्रतिशत पदों को प्रतिनियुक्ति द्वारा भरने का प्रावधान है। अपर महानिदेशक के न्यूनतम 67 प्रतिशत पदों को प्रतिनियुक्ति द्वारा भरा जाएगा। विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के सभी पद केवल प्रतिनियुक्ति द्वारा ही भरे जाएंगे।
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शीर्ष पद प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरे जाएंगे
सरकार ने गुरुवार को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया। इस कानून के तहत केंद्रीय सुरक्षा पुलिस बल के अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा से जुड़ी अन्य शर्तों को विनियमित किया जाएगा। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों—केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) का संचालन फिलहाल उनके अपने अधिनियमों के तहत होता है। इन अधिनियमों के अंतर्गत बनाए गए नियम 'ग्रुप-ए' सामान्य ड्यूटी अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों और कर्मियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों को नियंत्रित करते हैं।
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नए अधिनियम के अनुसार, 50 प्रतिशत पद भारतीय पुलिस सेवा से प्रतिनियुक्ति के आधार पर इंस्पेक्टर जनरल रैंक में भरे जाएंगे, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) स्तर के कम से कम 67 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाने का प्रावधान है। वहीं, विशेष महानिदेशक (Special DG) और महानिदेशक (DG) के पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भरे जाएंगे। यह कानून उस समय लागू किया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें 2025 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। इस फैसले में अदालत ने CAPF में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड स्तर तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को क्रमिक रूप से कम करने और छह महीने के भीतर कैडर समीक्षा करने का निर्देश दिया था।

सुरक्षा ढांचा होगा मजबूत
इस कानून का उद्देश्य देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना और सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में अधिक स्पष्टता और एकरूपता लाना है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने इस कानून पर संसद में चर्चा के दौरान कहा कि विधेयक में मौजूदा व्यवस्था की विसंगतियों को दूर किया गया है और वित्तीय लाभों की निरंतरता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि विधेयक में ग्रुप ए जनरल ड्यूटी अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता और अन्य सेवा शर्तों को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट व्यापक ढांचा प्रस्तुत किया गया है।

हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह कानून भारत के संघीय ढांचे को कमजोर करता है और संविधान की भावना का उल्लंघन करता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह विधेयक सीएपीएफ, राज्य पुलिस और देश भर के राज्य प्रशासनों के बीच समन्वय में सुधार करके सहकारी संघवाद को मजबूत करता है।

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