राष्ट्रपति चुनाव: डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में हुई बैठक, उद्धव को नहीं मना पाए शाह
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राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए सहयोगी दलों की टोह ले रहे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को शिवसेना से निराशा हाथ लगी है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि पहले राष्ट्रपति पद के उमीदवार का घोषित करें उसके बाद वह अपनी भूमिका स्पष्ट करेगी। अमित शाह ने रविवार सुबह शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से उनके आवास मातोश्री गए और राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन मांगा। लेकिन, वह राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन के लिए उद्धव को नहीं मना पाए।
शिवसेना सूत्रों के अनुसार शाह ने उद्धव से कहा कि एनडीए के सभी घटक दल ने राष्ट्रपति उमीदवार तय करने का सर्वाधिकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया है। शिवसेना भी इसका समर्थन करे। लेकिन, उद्धव ठाकरे ने कहा कि या तो बीजेपी उनके द्वारा सुझाए गए दो नामों (संघ प्रमुख मोहन भागवत, एम एस स्वामीनाथन) पर अपना रुख स्पष्ट करे अथवा अपना उमीदवार घोषित करे। तभी शिवसेना राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन देने या न देने का निर्णय लेगी। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के राष्ट्रपति उमीदवार को लेकर दोनों दलों के बीच बात नहीं बन सकी।
करीब डेढ़ घंटे तक उद्धव ठाकरे से बंद कमरे में चली बातचीत
उद्धव ठाकरे यह जानना चाहते थे कि भाजपा किसे उमीदवार बनाना चाहती है और उसकी ओर से सुझाए गए दो नामों पर भाजपा की क्या प्रतिक्रिया है? लेकिन, भाजपा अध्यक्ष ने अपने पत्ते नहीं खोले। अमित शाह रविवार सुबह करीब 10 बजे मातोश्री पहुंच गए थे और करीब डेढ़ घंटे तक उद्धव ठाकरे से बंद कमरे में बातचीत की।
इस दौरान मुयमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और युवा सेना के अध्यक्ष व उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राव साहेब दानवे भी अमित शाह के साथ उद्धव के घर गए थे लेकिन चर्चा के दौरान वह मौजूद नहीं थे।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का रविवार को तीन दिवसीय मुंबई दौरा समाप्त हो गया। इससे पहले उन्होंने कहा था कि एनडीए के राष्ट्रपति पद के उमीदवार के नाम को अंतिम रूप देने से पहले उनकी पार्टी सभी सहयोगियों से चर्चा करेगी और उनका सुझाव लेगी। इसके बाद उमीदवार की घोषणा की जाएगी। लेकिन, भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने ही आम राय बनाने की भाजपा की कोशिश को झटका दे दिया है।
शिवसेना बीते दस साल से राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा से इतर रूख अपनाती रही है। शिवसेना ने पहले कांग्रेस उमीदवार प्रतिभा पाटील और फिर प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था। जानकरों का मानना है कि उद्धव ठाकरे सत्ता समीकरण में भाजपा से मोलभाव किए बिना समर्थन देने को तैयार नहीं है।