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तो क्या मिट रहीं हैं गांधी-बच्चन परिवार की दूरियां, प्रियंका ने कुछ ऐसे किया हरिवंश राय बच्चन को याद

Wed, 27 Nov 2019 07:39 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Wed, 27 Nov 2019 07:39 PM IST
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Priyanka Gandhi remember Amitabh Father Harivansh Rai Bachchan on his birth anniversary
priyanka gandhi shimla - फोटो : अमर उजाला

एक समय था जब बच्चन और गांधी परिवार की दोस्ती की मिसालें दी जाती थीं। नेहरू के जमाने से जिस दोस्ती की नींव पड़ी, उसे राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन ने और बुलंद किया। मगर सियासी थपेड़ों में दोस्ती में दरार आ गई और दोनों परिवारों की राहें जुदा हो गईं। मगर अब लगता है कि इन दोनों परिवारों के बीच दूरियां मिट रही हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के ट्वीट तो कुछ ऐसा ही इशारा करते हैं। 

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन की जयंती के मौके पर प्रियंका ने उन्हें अपने खास अंदाज में याद किया। प्रियंका ने अखबार पढ़ते हुए हरिवंश राय बच्चन की एक तस्वीर साझा की, जिसे खुद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खींचा था। 
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प्रियंका गांधी ने तस्वीर साझा करने के साथ लिखा, 'हरिवंशराय बच्चन जी जिन्हें हम अंकल बच्चन के नाम से जानते थे, इलाहाबाद के एक महान पुत्र थे। एक वक्त था जब मेरे पिता की मृत्यु के बाद बच्चन जी की रचनाओं को मैं देर-देर तक पढ़ती थी। उनके शब्दों से मेरे मन को शांति मिलती थी, इसके लिए मैं उनके प्रति आजीवन आभारी रहूंगी।'
 

दशकों पुरानी है गांधी और बच्चन परिवार की दोस्ती 

दोनों परिवारों की दोस्ती इलाहाबाद में रहने के जमाने से है। आनंद भवन के जमाने में सरोजिनी नायडू ने हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की मुलाकात जवाहर लाल नेहरू से कराई थी। इसके बाद से इन दोनों परिवारों के बीच दोस्ती बढ़ती चली गई। राजीव गांधी, संजय गांधी का बचपन अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ के साथ ही खेलते हुए बीता। 1983 में कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान जब अमिताभ घायल हुए, तब पीएम रहते हुए इंदिरा गांधी उन्हें अस्पताल में देखने गईं। 

बच्चन परिवार के घर में रहीं बहू सोनिया

जब राजीव गांधी ने विदेश में रहने वाली सोनिया गांधी से शादी का फैसला किया तो इंदिरा गांधी ने शादी से पहले सोनिया के ठहरने का इंतजाम बच्चन परिवार के यहां ही किया। इंदिरा चाहती थीं कि सोनिया वहां रहकर हिंदुस्तानी संस्कार सीखें। सोनिया 40 से भी ज्यादा दिनों तक बच्चन परिवार के साथ रहीं और तेजी बच्चन ने उन्हें बेटी की तरह रखा। 

इस सियासी भूचाल से आई दोस्ती में दरार 

आपातकाल के दौरान ही दोनों परिवारों में दूरियां बढ़ने लगी थीं। मगर इंदिरा की हत्या के बाद राजीव के कहने पर अमिताभ बच्चन ने चुनाव लड़ा और इलाहाबाद से जीत दर्ज की। मगर जल्द ही उनका नाम राजीव के साथ बोफोर्स घोटाले में आ गया। इससे व्यथित होकर उन्होंने राजनीति से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद दोनों परिवारों में दूरियां लगातार बढ़ती चली गई। यहां तक कि 2007 में अमिताभ की मां तेजी बच्चन के अंतिम संस्कार में भी गांधी परिवार से कोई शामिल नहीं हुआ।

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