दांव पर सुरक्षा: एसपीजी हटने के बाद से राहुल को दूसरी बार झेलनी पड़ी दिक्कत, हाथरस जाते वक्त भी हुई थी धक्कामुक्की
राहुल और प्रियंका गांधी के चारों तरफ कार्यकर्ताओं, मीडिया कर्मियों और स्थानीय पुलिस की धक्कामुक्की देखी जा सकती है। यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक संकेत नहीं है। लखनऊ एयरपोर्ट के बाहर राहुल गांधी जब अपनी गाड़ी में सवार हुए तो स्थानीय पुलिस, पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया कर्मी उनके चारों तरफ उमड़ आए थे। सीआरपीएफ कमांडो ने मुश्किल से राहुल की गाड़ी को आगे निकाला...
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2019 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का 'एसपीजी सुरक्षा घेरा' (स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स) हटाने का फैसला लिया था। गृह मंत्रालय की सुरक्षा समीक्षा कमेटी की सिफारिश पर गांधी परिवार को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गई थी। इसके तहत सीआरपीएफ के कमांडो उनकी सुरक्षा में तैनात किए गए। राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटने के बाद पहली बार अक्तूबर 2020 को उन्हें यूपी पुलिस की धक्कामुक्की का सामना करना पड़ा था। हाथरस में पीड़िता के परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी की सुरक्षा करने में लगे सीआरपीएफ कर्मियों को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा था।
तब राहुल गांधी ने कहा था कि यूपी पुलिस ने मुझे धक्का दिया है। लाठी मारी है और मुझे जमीन पर फेंक दिया। बुधवार को यूपी पुलिस ने राहुल गांधी को लखनऊ एयरपोर्ट पर रोक दिया। कहा, जो गाड़ी पुलिस देगी, उसी में बैठकर लखीमपुर खीरी जाना होगा। राहुल अड़ गए कि मैं तो अपनी ही गाड़ी में जाउंगा। नतीजा, कुछ देर बाद यूपी पुलिस को राहुल गांधी की बात माननी पड़ी। राहुल गांधी ने जब एयरपोर्ट से बाहर निकलने का प्रयास किया तो वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि वे पुलिस द्वारा मुहैया कराए वाहन में नहीं जाएंगे। पुलिस कुछ भी बदमाशी कर सकती है। उन्हें यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है। करीब तीस मिनट तक चले हाईप्रोफाइल घटनाक्रम के बाद यूपी पुलिस ने उन्हें खुद के वाहन से जाने की इजाजत दे दी। गांधी परिवार के पास जब तक एसपीजी रही, तब तक उनके साथ ऐसी घटना नहीं हुई। यहां तक कि लोकसभा चुनाव 2019 और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान भी राहुल को सुरक्षा संबंधी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। एसपीजी सुरक्षा घेरा हटने के बाद यूपी पुलिस, मीडिया और कार्यकर्ता अब राहुल व प्रियंका गांधी के बहुत करीब तक आ जाते हैं। ये सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है।
एसपीजी प्राप्त व्यक्ति की पार्टी कार्यकर्ता, मीडिया और स्थानीय पुलिस से दूरी
एसपीजी के पूर्व अधिकारी बताते हैं, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा हटने के बाद बहुत कुछ बदल जाता है। खासतौर पर, रूट प्लान और वाहनों में भी कई बदलाव देखने को मिलते हैं। यह बात सही है कि एसपीजी प्राप्त व्यक्ति की पार्टी कार्यकर्ता, मीडिया और स्थानीय पुलिस से दूरी बनी रहती है। भले ही एसपीजी सुरक्षा वाला व्यक्ति किसी भी राज्य में जाए, वहां स्थानीय पुलिस तीसरे नंबर पर रहती है। अब राहुल और प्रियंका गांधी के चारों तरफ कार्यकर्ताओं, मीडिया कर्मियों और स्थानीय पुलिस की धक्कामुक्की देखी जा सकती है। यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक संकेत नहीं है। लखनऊ एयरपोर्ट के बाहर राहुल गांधी जब अपनी गाड़ी में सवार हुए तो स्थानीय पुलिस, पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया कर्मी उनके चारों तरफ उमड़ आए थे। सीआरपीएफ कमांडो ने मुश्किल से राहुल की गाड़ी को आगे निकाला।
पिछले साल राहुल गांधी जब हाथरस कांड के पीड़ितों से मिलने जा रहे थे, तब भी उनकी यूपी पुलिस के साथ धक्कामुक्की हो गई थी। राहुल ने यूपी पुलिस पर लाठी मारने और जमीन पर फैंकने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल ने तब कहा था, मैं पूछना चाहता हूं कि क्या इस देश में सिर्फ मोदी जी को पैदल चलने का अधिकार है, हमारे जैसे आम लोग पैदल नहीं चल सकते। हमारी गाड़ियां रोकी गईं, इसलिए हम पैदल चल रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी को एक्सप्रेस-वे पर रोक दिया गया था। वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और यूपी पुलिस के बीच धक्कामुक्की हुई थी। उसमें राहुल और प्रियंका गांधी का सुरक्षा घेरा कमजोर पड़ गया था। सीआरपीएफ कमांडो को यूपी पुलिस की ओर से वह सहयोग नहीं मिल सका, जो वीवीआईपी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को दिए जाने का प्रोटोकॉल है। उस वक्त कार्यकर्ता, मीडिया और यूपी पुलिस, राहुल गांधी का सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे आ चुके थे। जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पास एसपीजी सुरक्षा घेरा था, तब किसी भी राज्य में लोकल पुलिस और कार्यकर्ता एक निर्धारित दूरी बनाए रखते थे।