{"_id":"698dcc77307843731705a4ed","slug":"railways-high-speed-preparations-ahead-of-bengal-elections-varanasi-siliguri-route-is-at-forefront-2026-02-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Railways: बंगाल चुनाव से पहले रेलवे की हाई स्पीड तैयारी, इस वजह से वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट सबसे आगे","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Railways: बंगाल चुनाव से पहले रेलवे की हाई स्पीड तैयारी, इस वजह से वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट सबसे आगे
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 12 Feb 2026 06:20 PM IST
विज्ञापन
भारत में बढ़ेगा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का दायरा।
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार राज्य के रेलवे प्रोजेक्ट पर खास जोर दे रही है। इसी के चलते रेलवे बोर्ड ने देश में सात नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इनमें वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। ताकि बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला यह रूट जल्द जमीन पर उतर सके।
रेलवे बोर्ड ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि जिन हाई-स्पीड कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पहले से तैयार है। उन्हें मौजूदा लागत, निर्माण खर्च और संभावित रिटर्न के आधार पर अपडेट कर तुरंत आगे बढ़ाया जाए। साथ ही वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की डीपीआर को सबसे पहले तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं,नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए गए हैं कि हर प्रोजेक्ट के लिए फील्ड में कोर टीम तैनात की जाए। साथ ही देशभर में हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए एक समान तकनीकी मानक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा मैनपावर ट्रेनिंग, प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियां और कॉन्ट्रैक्ट डॉक्यूमेंट्स तैयार करने का काम भी तुरंत शुरू करने को कहा गया है।
दरअसल,पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार इस कॉरिडोर को प्राथमिकता के तौर पर आगे बढ़ाना चाहती है। यह रूट उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को सीधे जोड़ते हुए सिलीगुड़ी के जरिए पूर्वोत्तर तक तेज कनेक्टिविटी देगा। इससे पर्यटन, व्यापार के क्षेत्रों में बड़ा लाभ होने की उम्मीद है। इस हाईस्पीड कॉरिडोर के जरिए उत्तर भारत से बंगाल और पूर्वोत्तर की दूरी कम होगी। साथ ही दार्जिलिंग, सिक्किम और असम जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ये भी पढ़ें: सेना की बढ़ेगी ताकत : 114 राफेल और 6 P-8I विमान खरीद को मंजूरी, 3.25 लाख करोड़ रुपये का है रक्षा सौदा
वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को 14,205 करोड़ रुपए आवंटित किए है। हाल ही में रेल मंत्री ने कहा था,नए हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर से पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल दोनों को बड़ा लाभ होगा। इस ट्रेन के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय कम होगा। अभी यह सफर 14 से 18 घंटे में पूरा होता है, लेकिन बुलेट ट्रेन से यह दूरी 3 घंटे से भी कम समय में तय होने की संभावना है। प्रस्तावित ट्रेन की रफ्तार 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। इससे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
Trending Videos
रेलवे बोर्ड ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि जिन हाई-स्पीड कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पहले से तैयार है। उन्हें मौजूदा लागत, निर्माण खर्च और संभावित रिटर्न के आधार पर अपडेट कर तुरंत आगे बढ़ाया जाए। साथ ही वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की डीपीआर को सबसे पहले तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं,नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए गए हैं कि हर प्रोजेक्ट के लिए फील्ड में कोर टीम तैनात की जाए। साथ ही देशभर में हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए एक समान तकनीकी मानक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा मैनपावर ट्रेनिंग, प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियां और कॉन्ट्रैक्ट डॉक्यूमेंट्स तैयार करने का काम भी तुरंत शुरू करने को कहा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल,पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार इस कॉरिडोर को प्राथमिकता के तौर पर आगे बढ़ाना चाहती है। यह रूट उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को सीधे जोड़ते हुए सिलीगुड़ी के जरिए पूर्वोत्तर तक तेज कनेक्टिविटी देगा। इससे पर्यटन, व्यापार के क्षेत्रों में बड़ा लाभ होने की उम्मीद है। इस हाईस्पीड कॉरिडोर के जरिए उत्तर भारत से बंगाल और पूर्वोत्तर की दूरी कम होगी। साथ ही दार्जिलिंग, सिक्किम और असम जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ये भी पढ़ें: सेना की बढ़ेगी ताकत : 114 राफेल और 6 P-8I विमान खरीद को मंजूरी, 3.25 लाख करोड़ रुपये का है रक्षा सौदा
वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी में हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को 14,205 करोड़ रुपए आवंटित किए है। हाल ही में रेल मंत्री ने कहा था,नए हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर से पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल दोनों को बड़ा लाभ होगा। इस ट्रेन के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय कम होगा। अभी यह सफर 14 से 18 घंटे में पूरा होता है, लेकिन बुलेट ट्रेन से यह दूरी 3 घंटे से भी कम समय में तय होने की संभावना है। प्रस्तावित ट्रेन की रफ्तार 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। इससे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।