{"_id":"6a69ccd8f1d2edae5e0c54c6","slug":"rajendra-bharti-conviction-case-supreme-court-notice-no-stay-on-sentence-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: कांग्रेस के पूर्व विधायक को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सजा रोकने से क्यों किया इनकार?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: कांग्रेस के पूर्व विधायक को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सजा रोकने से क्यों किया इनकार?
Wed, 29 Jul 2026 03:20 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 29 Jul 2026 03:20 PM IST
सार
Supreme Court: कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को 1998 के ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मामले में नोटिस जारी किया है। इसके चलते उनकी विधायक पद से अयोग्यता अभी जारी रहेगी। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर नोटिस जारी किया। भारती ने 1998 के ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में मिली सजा पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट के इनकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके चलते विधायक पद के लिए उनकी अयोग्यता अभी जारी रहेगी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अभियोजन पक्ष और जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक (इसके जनरल मैनेजर के माध्यम से) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से फिलहाल दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किए जाने के कारण, मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में राजेंद्र भारती की अयोग्यता अभी जारी रहेगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'बाबरी मस्जिद को नहीं गिराना चाहिए था' कहना राष्ट्रविरोधी नहीं: हाईकोर्ट की टिप्पणी, SDPI नेताओं को दी राहत
भारती ने हाईकोर्ट के फैसले को क्यों चुनौती दी?
भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने नई दिल्ली की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अपने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि सजा पर रोक लगाना एक असाधारण अधिकार है, जिसका इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में उसे कोई स्पष्ट गलती नजर नहीं आई।
भारती की इस दलील को खारिज करते हुए कि दतिया विधानसभा उपचुनाव एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसके कारण दोषसिद्धि पर रोक लगाई जानी चाहिए, जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने कहा, इसका जवाब नहीं में ही होगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह समस्या सिर्फ भारती के सामने नहीं थी, बल्कि यह चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के कारण उत्पन्न हुई थी।
कोर्ट ने आगे कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति एमएलए या एमपी है और उसकी राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ रहा है, सजा पर रोक लगाने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक फैसले में कोई गंभीर गलती या बुनियादी कमी नहीं हो, तब तक सजा पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
मामला किससे जुड़ा है?
दस्तावेजों की शुरुआती जांच के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई 'स्पष्ट या बड़ी गलती' नजर नहीं आई। दस्तावेजों में पाया गया कि फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि को कथित तौर पर चरणबद्ध तरीके से तीन साल से बढ़ाकर पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दिया गया था। इसके कारण भारती से जुड़े एक फैमिली ट्रस्ट को मूल मैच्योरिटी अवधि खत्म होने के बाद भी कई वर्षों तक 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर मिलती रही।
विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने भारती और उनके सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 120बी, 420, 467, 468, 471 और 409 जैसी विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। यह मामला 1998 में दतिया के जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा था।
अभियोजन पक्ष का क्या आरोप है?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, भारती और अन्य आरोपियों ने फिक्स्ड डिपॉजिट में कथित हेरफेर की साजिश रची और इसकी अवधि पूरी होने के बाद भी अधिक ब्याज का लाभ लेते रहे।
भारती को तीन साल की सजा और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, उनकी सजा पर रोक लगा दी गई और उन्हें जमानत मिल गई। लेकिन, दोषसिद्धि का फैसला बरकरार रहा। इसके चलते 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 8, संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ई) और 'लिली थॉमस मामले' में सुप्रीम कोर्ट के 2013 के फैसले के तहत उन्हें तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया गया।
दोषी ठहराए जाने के कारण उनकी मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो गई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया विधानसभा सीट को खाली घोषित कर दिया, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की।
विज्ञापन
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अभियोजन पक्ष और जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक (इसके जनरल मैनेजर के माध्यम से) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट की ओर से फिलहाल दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किए जाने के कारण, मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में राजेंद्र भारती की अयोग्यता अभी जारी रहेगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'बाबरी मस्जिद को नहीं गिराना चाहिए था' कहना राष्ट्रविरोधी नहीं: हाईकोर्ट की टिप्पणी, SDPI नेताओं को दी राहत
भारती ने हाईकोर्ट के फैसले को क्यों चुनौती दी?
भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने नई दिल्ली की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अपने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि सजा पर रोक लगाना एक असाधारण अधिकार है, जिसका इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में उसे कोई स्पष्ट गलती नजर नहीं आई।
भारती की इस दलील को खारिज करते हुए कि दतिया विधानसभा उपचुनाव एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसके कारण दोषसिद्धि पर रोक लगाई जानी चाहिए, जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने कहा, इसका जवाब नहीं में ही होगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह समस्या सिर्फ भारती के सामने नहीं थी, बल्कि यह चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के कारण उत्पन्न हुई थी।
कोर्ट ने आगे कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति एमएलए या एमपी है और उसकी राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ रहा है, सजा पर रोक लगाने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक फैसले में कोई गंभीर गलती या बुनियादी कमी नहीं हो, तब तक सजा पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
मामला किससे जुड़ा है?
दस्तावेजों की शुरुआती जांच के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई 'स्पष्ट या बड़ी गलती' नजर नहीं आई। दस्तावेजों में पाया गया कि फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि को कथित तौर पर चरणबद्ध तरीके से तीन साल से बढ़ाकर पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दिया गया था। इसके कारण भारती से जुड़े एक फैमिली ट्रस्ट को मूल मैच्योरिटी अवधि खत्म होने के बाद भी कई वर्षों तक 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर मिलती रही।
विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने भारती और उनके सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 120बी, 420, 467, 468, 471 और 409 जैसी विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। यह मामला 1998 में दतिया के जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा था।
अभियोजन पक्ष का क्या आरोप है?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, भारती और अन्य आरोपियों ने फिक्स्ड डिपॉजिट में कथित हेरफेर की साजिश रची और इसकी अवधि पूरी होने के बाद भी अधिक ब्याज का लाभ लेते रहे।
भारती को तीन साल की सजा और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, उनकी सजा पर रोक लगा दी गई और उन्हें जमानत मिल गई। लेकिन, दोषसिद्धि का फैसला बरकरार रहा। इसके चलते 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 8, संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ई) और 'लिली थॉमस मामले' में सुप्रीम कोर्ट के 2013 के फैसले के तहत उन्हें तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया गया।
दोषी ठहराए जाने के कारण उनकी मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो गई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया विधानसभा सीट को खाली घोषित कर दिया, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की।