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Anti Paper Leak Bill: लोकसभा में हंगामे के बीच लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पारित, ध्वनिमत से हुआ मतदान

Wed, 29 Jul 2026 03:43 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 29 Jul 2026 03:43 PM IST
सार

New Anti-Paper Leak Bill Passed: लोकसभा ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार ने इसे सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने वाला कानून बताया, जबकि सदन में राहुल गांधी के भाषण और उनकी टिप्पणियों पर भी जोरदार विवाद हुआ। इस संशोधन में क्या बदलाव हैं और सदन में इतना हंगामा क्यों हुआ? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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New anti-paper leak bill passed amid Opposition uproar in Lok Sabha
लोकसभा से विधेयक पारित - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लोकसभा ने बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित गोलीबारी को लेकर दिए गए बयान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। इसके बावजूद सरकार ने विधेयक को सदन से पारित करा लिया। सरकार ने कहा कि यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है।

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विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई कर चुकी है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संशोधन सरकार की उस सोच को दिखाता है, जिसमें पिछले अनुभवों से सीख लेकर कानून को और मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के कारण होने वाली आत्महत्याओं में भी कमी आई है, जिसे उन्होंने कानून के सकारात्मक प्रभाव का संकेत बताया। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

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क्या राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन को युवाओं की आवाज बताया?

विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का आंदोलन गुस्सा, हिंसा या नफरत नहीं, बल्कि देश के युवाओं की भावनाओं और चिंताओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल, यहां तक कि भाजपा को भी छात्रों की बात सुननी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि अगर भाजपा नेता अपने बच्चों से पूछेंगे कि प्रदर्शन क्यों हो रहा था, तो उन्हें भी छात्रों की चिंताओं का पता चलेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं ने जो किया, उसमें कुछ भी गलत नहीं था और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें छात्रों और युवा छात्राओं से बातचीत के दौरान शिक्षा व्यवस्था को देखने का नया नजरिया मिला।

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राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कहा?

राहुल गांधी ने कहा कि एक 18 वर्षीय छात्रा ने उन्हें समझाया कि छात्र वह होता है, जिसका दिमाग और दिल खुला होता है और जो मानता है कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि छात्र ज्ञान, विनम्रता और सच्चाई के रास्ते पर चलता है। राहुल गांधी के अनुसार, छात्रों ने उनसे कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था का सवाल है। उन्होंने कहा कि शिक्षा बहुत महंगी हो चुकी है और एक परीक्षा पर इतना खर्च हो जाता है, जो लगभग शिक्षा बजट के बराबर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि छात्रों का संघर्ष केवल परीक्षा नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग है।

'इडियट' और 'अंधभक्त' शब्दों पर सदन में क्यों मचा हंगामा?

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए इडियट, अंधभक्त और मूर्ख जैसे शब्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक छात्र ने उन्हें अलग-अलग सोच वाले लोगों के बारे में अपनी राय बताई थी। इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि राहुल गांधी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और इन शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जो भी शब्द असंसदीय होंगे, उन्हें कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि यदि इडियट शब्द पर आपत्ति है तो वह दूसरा शब्द इस्तेमाल कर देंगे। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि व्यवस्था दी जा चुकी है और असंसदीय शब्द स्वतः हटा दिए जाएंगे।

सरकार ने कानून को लेकर क्या तर्क दिए?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन केवल सजा बढ़ाने या कानूनी प्रावधान जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की ईमानदारी, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार कानून की समीक्षा कर रही है और जरूरत के मुताबिक बदलाव भी कर रही है। उनके अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा जरूरी है और इसी उद्देश्य से यह संशोधन लाया गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

पेपर लीक पर सरकार का रिकॉर्ड क्या बताता?

सदन में सरकार ने बताया कि 2024 में कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सरकार का कहना है कि इससे कानून का प्रभाव दिखाई दे रहा है और पेपर लीक से जुड़े मामलों पर सख्ती बढ़ी है। सरकार ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों से जुड़ी आत्महत्या की घटनाओं में कमी आई है। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून भविष्य में परीक्षा माफिया और अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ और प्रभावी कार्रवाई का आधार बनेगा।

विपक्ष और सरकार के बीच टकराव का केंद्र क्या रहा?

विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच केवल कानून पर ही नहीं, बल्कि छात्रों के आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था, जंतर-मंतर की घटना और सदन में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर भी तीखा टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की दिशा में जरूरी कदम बताया। अंततः हंगामे के बीच विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।

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