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'हम बहुत जल्द दोबारा सड़कों पर उतरेंगे': अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, अब क्यों सरकार को चेतावनी दे रही सीजेपी?
Wed, 29 Jul 2026 03:14 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 29 Jul 2026 03:14 PM IST
सार
कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर पेपर लीक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। सीजेपी का कहना है कि सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। यदि सरकार ने छात्रों का उत्पीड़न बंद नहीं किया और मुकदमे वापस नहीं लिए, तो सीजेपी देश भर में फिर से बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।
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अभिजीत दीपके, सीजेपी संस्थापक
- फोटो : @PTI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के अपने वादे से पीछे हट रही है। सीजेपी का कहना है कि सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का सहारा ले रही है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर छात्रों का उत्पीड़न नहीं रुका और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए, तो पार्टी जल्द ही फिर से सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने कहा, '20 जुलाई को छात्रों ने पुलिस की लाठियां और खून-खराबा झेला। अगर सरकार इतने पर भी नहीं चेती और युवाओं का उत्पीड़न जारी रहा, तो हम बहुत जल्द दोबारा सड़कों पर उतरेंगे।'
यह बयान ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा करने का भी आदेश दिया, जबकि पहले से दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी।
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'सरकार अदालत का हवाला देकर वादा निभाने से बच रही'
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने पहले सार्वजनिक रूप से भरोसा दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी और पुराने मामले भी वापस लिए जाएंगे। लेकिन अब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर कह रही है कि मामला अदालत में विचाराधीन है। दास ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि मंगलवार तक सरकार लिखित आश्वासन देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाना बनाकर अपने वादे से पीछे हट रही है।'
'एफआईआर वापस लेने से सुप्रीम कोर्ट ने नहीं रोका'
सौरव दास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि सरकार एफआईआर वापस नहीं ले सकती। उनके मुताबिक, एफआईआर वापस लेने का अधिकार सरकार के पास है और आदेश की गलत व्याख्या कर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के खिलाफ अदालत के आदेश का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और उसे प्रदर्शनकारियों से किए गए वादे पूरे करने चाहिए।
यह भी पढ़ें: लोकसभा: 'राहुल गांधी को माफी मांगनी पड़ेगी', अमित शाह पर टिप्पणी को लेकर संसदीय कार्य मंत्री ने जताई आपत्ति
कई राज्यों का भी उठाया मुद्दा
सीजेपी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा समेत कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को परेशान किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि कई छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। दास ने कहा कि संगठन की शुरुआत से ही मांग रही है कि देशभर के सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा दी जाए और उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं।
37 दिन बाद खत्म हुआ था आंदोलन
सीजेपी ने याद दिलाया कि सरकार की ओर से यह आश्वासन मिलने के बाद उसका 37 दिनों का आंदोलन समाप्त हुआ था। संगठन का कहना है कि उस समय सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और नीट पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का भरोसा दिया था। अब यदि ये वादे पूरे नहीं किए गए, तो देशभर में आंदोलन का नया दौर शुरू किया जाएगा।
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सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर छात्रों का उत्पीड़न नहीं रुका और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए, तो पार्टी जल्द ही फिर से सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने कहा, '20 जुलाई को छात्रों ने पुलिस की लाठियां और खून-खराबा झेला। अगर सरकार इतने पर भी नहीं चेती और युवाओं का उत्पीड़न जारी रहा, तो हम बहुत जल्द दोबारा सड़कों पर उतरेंगे।'
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यह बयान ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा करने का भी आदेश दिया, जबकि पहले से दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी।
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'सरकार अदालत का हवाला देकर वादा निभाने से बच रही'
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने पहले सार्वजनिक रूप से भरोसा दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी और पुराने मामले भी वापस लिए जाएंगे। लेकिन अब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर कह रही है कि मामला अदालत में विचाराधीन है। दास ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि मंगलवार तक सरकार लिखित आश्वासन देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाना बनाकर अपने वादे से पीछे हट रही है।'
'एफआईआर वापस लेने से सुप्रीम कोर्ट ने नहीं रोका'
सौरव दास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि सरकार एफआईआर वापस नहीं ले सकती। उनके मुताबिक, एफआईआर वापस लेने का अधिकार सरकार के पास है और आदेश की गलत व्याख्या कर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के खिलाफ अदालत के आदेश का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और उसे प्रदर्शनकारियों से किए गए वादे पूरे करने चाहिए।
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कई राज्यों का भी उठाया मुद्दा
सीजेपी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा समेत कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को परेशान किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि कई छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। दास ने कहा कि संगठन की शुरुआत से ही मांग रही है कि देशभर के सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा दी जाए और उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं।
37 दिन बाद खत्म हुआ था आंदोलन
सीजेपी ने याद दिलाया कि सरकार की ओर से यह आश्वासन मिलने के बाद उसका 37 दिनों का आंदोलन समाप्त हुआ था। संगठन का कहना है कि उस समय सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और नीट पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का भरोसा दिया था। अब यदि ये वादे पूरे नहीं किए गए, तो देशभर में आंदोलन का नया दौर शुरू किया जाएगा।