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Bombay High Court: भाजपा विधायक गावित को राहत, हाईकोर्ट ने कहा- बहुपत्नी होना चुनावी अयोग्यता का आधार नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 24 Jun 2025 04:04 PM IST
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सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक राजेंद्र गावित को बड़ी राहत दी है। इसके तहत कोर्ट ने गावित की जीत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। मामलें में कोर्ट ने कहा कि बहुपत्नी होना अयोग्यता नहीं, और गावित ने अपनी वैवाहिक स्थिति की ईमानदार जानकारी दी है, जो चुनाव नियमों का उल्लंघन नहीं मानी जा सकती।

Rajendra Gavit gets relief from Bombay High Court petition to cancel election victory for being polygamous
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक राजेंद्र गावित को बड़ी राहत देते हुए 2024 विधानसभा चुनाव में उनके जीत को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मामले में सुनावई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि केवल बहुपत्नी होना किसी विधायक को अयोग्य ठहराने का आधार नहीं हो सकता, और अगर कोई उम्मीदवार अपनी वैवाहिक स्थिति की ईमानदारी से जानकारी देता है, तो यह चुनाव नियमों का उल्लंघन नहीं है।

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बता दें कि यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता और पालघर के वोटर सुधीर जैन ने उठाया था। उन्होंने याचिका में दावा किया कि गावित की दूसरी शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अमान्य है और उनकी पत्नी रूपाली गावित को चुनावी हलफनामे में दर्शाना गलत जानकारी देना है।

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पीठ ने याचिका पर दिया तर्क
हालांकि मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मर्ने की पीठ ने कहा कि गावित ने अपनी दोनों पत्नियों की जानकारी पैन नंबर और आयकर रिटर्न की स्थिति सहित साफ-साफ दी है। गावित ने तर्क दिया कि वे भील जनजाति से हैं, जहां परंपरा से बहुपत्नी प्रथा मान्य है, और उन्होंने स्वेच्छा से सही जानकारी दी है।


साथ ही कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अतिरिक्त कॉलम जोड़कर सच्ची और ईमानदार जानकारी देना न तो नामांकन पत्र को दोषपूर्ण बनाता है और न ही चुनाव नियमों का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि गावित द्वारा दी गई जानकारी किस तरह चुनाव नियमों के खिलाफ है।

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कोर्ट ने गावित की जीत को बताया वैध 
पीठ ने यह भी कहा कि किसी धर्म या समुदाय में अगर बहुपत्नी प्रथा मान्य है, तो ऐसे व्यक्ति को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने इस स्तर पर दूसरी शादी की वैधता की जांच को भी गैर-जरूरी बताया। अंततः अदालत ने कहा कि गावित की जीत वैध है क्योंकि उन्होंने ईमानदारी से पूरी जानकारी दी है और चुनावी प्रक्रिया में कोई नियम नहीं तोड़ा है।

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