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Rajya Sabha: संविधान की प्रस्तावना से हटें सेक्युलर-सोशलिस्ट शब्द, BJP सांसद ने राज्यसभा में पेश किया विधेयक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sat, 06 Dec 2025 04:00 PM IST
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सार

Private Member Bill Of BJP MP Bhim Singh: भाजपा सांसद भीम सिंह ने राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश कर संविधान की प्रस्तावना से 'सेक्युलर' और 'सोशलिस्ट' शब्द हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि ये शब्द आपातकाल में बिना बहस के जोड़े गए थे और मूल संविधान में शामिल नहीं थे।

Rajya Sabha debate Constitution Preamble BJP MP Bhim Singh introduces private bill remove secular-socialist
राज्यसभा सांसद भीम सिंह - फोटो : X-@dr_bhimsingh
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विस्तार

राज्यसभा में भाजपा सांसद भीम सिंह द्वारा पेश किए गए प्राइवेट मेंबर बिल ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस बिल में संविधान की प्रस्तावना से 'सेक्युलर' और 'सोशलिस्ट' शब्द हटाने की मांग की गई है। सांसद सिंह का कहना है कि ये शब्द आपातकाल के दौरान बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जोड़े गए थे और अब इन्हें हटाकर संविधान को उसके मूल रूप में लौटाना जरूरी है।

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भाजपा सांसद भीम सिंह ने कहा कि मूल संविधान में ये दोनों शब्द शामिल नहीं थे और इन्हें 1976 में इंडिरा गांधी सरकार ने 42वें संशोधन के जरिए जोड़ा था। उनका आरोप है कि उस समय विपक्ष के सभी बड़े नेता जेल में थे और संसद में कोई खुली बहस नहीं हुई। सिंह का कहना है कि प्रस्तावना में ये शब्द जोड़ने का निर्णय मजबूरी और तत्कालीन राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया गया था।
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मूल संविधान में देश पहले से ही धर्मनिरपेक्ष
डॉ. बीआर आंबेडकर के हवाले से सिंह ने कहा कि संविधान की संरचना ही देश को धर्मनिरपेक्ष बनाती है, इसलिए अलग से ‘सेक्युलर’ शब्द जोड़ना जरूरी नहीं था। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने स्पष्ट कहा था कि भविष्य की पीढ़ियों पर किसी एक आर्थिक या राजनीतिक विचारधारा को थोपना सही नहीं होगा, इसलिए ‘सोशलिस्ट’ शब्द भी आवश्यक नहीं था।

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राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए जोड़े गए शब्द- भीम सिंह
सांसद का दावा है कि सेक्युलर शब्द मुसलमानों को खुश करने और सोशलिस्ट शब्द तत्कालीन सोवियत संघ को खुश करने के लिए जोड़ा गया था। उनके अनुसार इससे केवल भ्रम बढ़ा है, जबकि संविधान खुद ही समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि शब्द हटाने से किसी मौलिक अधिकार या संवैधानिक प्रावधान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और सांसद का जवाब
उन्होंने कहा कि विपक्ष इसे संविधान पर हमला बताएगा, लेकिन यह कदम संविधान को उसके असली रूप में वापस लाने का प्रयास है। सिंह ने सवाल उठाया कि क्या 1976 से पहले भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं था? क्या नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री या खुद इंदिरा गांधी की सरकार सांप्रदायिक थी?

भले ही प्राइवेट मेंबर बिलों के पास होने की संभावना बेहद कम रहती है, लेकिन सिंह का मानना है कि इस मुद्दे को उठाने से सरकार और जनता दोनों का ध्यान इस पर जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्देश्य बहस शुरू करना है, ताकि देश यह समझ सके कि प्रस्तावना में जोड़े गए शब्द किस परिस्थिति में आए और अब उन्हें हटाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

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