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मीरा पर भारी पड़े एनडीए के रामनाथ कोविंद, बने देश के 14वें महामहिम, 25 को लेंगे शपथ

amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट Updated Fri, 21 Jul 2017 08:16 AM IST
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Ram Nath Kovind declared 14th President of India
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राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान में राजग उम्मीदवार रामनाथ कोविंद देश के 14वें और उत्तर प्रदेश से पहले राष्ट्रपति होंगे। दलित बनाम दलित राष्ट्रपति पद के चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को करारी शिकस्त दी है।
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कोविंद को 65.65 फीसदी तो मीरा कुमार को 34.35 फीसदी मत मिले हैं। इस चुनाव में कोविंद को क्रॉस वोटिंग का भी जबर्दस्त लाभ मिला है। जबकि 37 (21 सांसद और 16 विधायक) के वोट अमान्य घोषित हुए हैं। कोविंद के पक्ष में 522 तो मीरा के पक्ष में 225 सांसदों ने वोट डाले। जीत से भावुक कोविंद ने इसे भारतीय परंपरा की महानता का प्रतीक बताते हुए सर्वे भवंतु सुखिन: के भाव से काम करते रहने की घोषणा की है। 

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चुनाव अधिकारी अनूप मिश्र ने कोविंद की जीत की घोषणा करने के बाद खुद इसकी जानकारी देने उनके अस्थाई निवास पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित सभी राजनीतिक हस्तियों ने कोविंद को जीत की बधाई दी है।

कोविंद 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। संसद भवन में 8 राउंड में हुई गिनती में कोंविंद मीरा पर शुरू से ही बढ़त बनाए हुए थे। 5वें राउंड की गिनती में ही उन्हें इस पद के लिए जरूरी वोट हासिल हो गए थे। अंतिम राउंड की गिनती पूरी होते ही चुनाव अधिकारी मिश्र ने कोविंद की जीत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कोविंद के पक्ष में 702044 तो मीरा के पक्ष में 367314 मत पड़े। 


आंकड़ों की दृष्टि से राजग का पलड़ा बेहद भारी होने के कारण शुरू से ही इस चुनाव को महज औपचारिकता माना जा रहा था। खासतौर से राजग उम्मीदवार को जदयू, बीजद, वाईएसआर कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, टीआरएस का साथ मिलने से लड़ाई एकतरफा हो चुकी थी। हालांकि इसके बावजूद राजग उम्मीदवार को तय करीब 62.50 फीसदी से 3 फीसदी अधिक मत दिला कर राजग कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्ष को बड़ा झटका देने में कामयाब रहा।


सबसे बड़ी जीत हासिल नहीं कर पाए कोविंद
राजग उम्मीदवार रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति चुनाव तो बड़ी आसानी से जीत गए, मगर सबसे बड़ी जीत का कीर्तिमान नहीं बना सके। भाजपा की कोशिश कोविंद के पक्ष में सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाले वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी ज्यादा वोट दिलाने की थी। इस क्रम में भाजपा ने तय मत से करीब तीन फीसदी ज्यादा मत हासिल करने में कामयाबी तो हासिल की, मगर नया कीर्तिमान नहीं बना पाई। गौरतलब है कि बीते राष्ट्रपति चुनाव में मुखर्जी को करीब 70 फीसदी (713763) मत मिले थे। जबकि इस चुनाव में कोविंद को 65.65 फीसदी (702044) मत मिले। जबकि इस चुनाव में पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा मतदान हुआ था।


राष्ट्रपति चुनावः वोटिंग पर एक नजर
रामनाथ कोविंद को 65.65 फीसदी और मीरा कुमार को 34.35 फीसदी वोट मिले

कोविंद को 522 सांसदों ने जबकि विपक्षी उम्मीदवार को 225 सांसदों ने वोट दिए

विजयी उम्मीदवार को 2930 वोट जबकि पराजित उम्मीदवार को 1844 वोट मिले

कोविंद के मतों का मूल्य 7,02,044 और मीरा कुमार के मतों का मूल्य 3,67,314 


बता दें पहले दौर की गिनती में रामनाथ कोविंद को कुल 60 हजार 683 वोट और मीरा कुमार को 22 हजार 941 वोट मिले थे। इसके बाद दोपहर दो बजे मतगणना का आंकड़ा बताया गया जिसमें रामनाथ कोविंद को कुल 4,79,585 और मीरा कुमार को 2,04,594 वोट मिले। इसके साथ ही रामनाथ कोविंद की जीत तय हो गई थी। 

कोविंद और मीरा को किस राज्य में मिले कितने वोट

- छत्तीसगढ़ में रामनाथ कोविंद (6,708), मीरा कुमार (4,515), 3 अमान्य

- गोवा में कोविंद (500), मीरा कुमार (220), 2 अमान्य

- गुजरात में कोविंद (19,404), मीरा कुमार (7,203)

- हरियाणा में कोविंद (8,176), मीरा कुमार (1,792)

- हिमाचल प्रदेश में कोविंद (1,530), मीरा कुमार (1,887)

- झारखंड में कोविंद (8,176), मीरा कुमार (4,576); 4 अमान्य

- जम्मू और कश्मीर में कोविंद (4,032), मीरा कुमार (2,160)

- संसद में कोविंद (3,96,576), मीरा कुमार (1,59,300), 21 अमान्य
 

17 जुलाई को हुआ था मतदान, 99 फीसदी हुई थी वोटिंग

Ram Nath Kovind declared 14th President of India
बता दें कि राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग 17 जुलाई को हुई थी, जिसमें संसद के दोनों सदनों के अलावा 31 राज्यों की विधानसभाओं में मतदान संपन्न हुआ था। जिसमें 776 सांसदों और 4,120 विधायकों को मत डालने का अधिकार था। बता दें कि निर्वाचक मंडल के कुल मतों का मूल्य 10,98,903 है।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान बैलेट पेपर से हुआ था, जिसके लिए खास पेन और इंक का उपयोग किया गया। इसक बाद तमाम मतपेटियां संसद भवन परिसर में रखकर सील कर दी गई थीं। आज वहीं मतगणनना की जा रही है।

वोटों की गिनती को समझा जाए तो ज्यादा वोट हासिल करने वाला प्रेसिडेंट नहीं बन पाता, बल्कि वो उम्मीदवार जीतता है, जो सांसदों और विधायकों के वोटों का कुल आधा वेटेज या उससे ज्यादा हिस्सा हासिल कर ले।
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