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बंगाल CM के काफिले की रेकी, हनी-ट्रैप का जाल: CCTV ने नाकाम की जैश की साजिश, पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश

Tue, 04 Aug 2026 12:47 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 04 Aug 2026 12:47 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हमीम मंडल ने पूछताछ में मुख्यमंत्री के चिनार पार्क आवास और काफिले की रेकी की बात कबूली। उसने कहा कि सीसीटीवी कैमरों के डर से वह तस्वीरें नहीं ले सका। जांच में हनी-ट्रैप और ब्लैकमेल नेटवर्क के भी बड़े खुलासे हुए।

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Reconnaissance of Bengal CM's convoy CCTV foiled Jaish conspiracy instructions being received from Pakistan.
शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जैश-ए-मोहम्मद के निशाने पर थे। इसी बीच जांच में एक खुलासा हुआ कि मुख्यमंत्री के चिनार पार्क स्थित आवास के आसपास लगे बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरों की वजह से संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद सहयोगी हमीम मंडल घर और उसके आसपास के इलाके, खासकर आने-जाने वाले रास्तों की तस्वीरें और वीडियो नहीं बना सका। 

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पूछताछ में मंडल ने क्या बताया? 
दरअसल, पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने पिछले सप्ताह पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान कस्बे से मंडल को गिरफ्तार किया था। घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एसटीएफ अधिकारियों और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लंबी पूछताछ की। इस दौरान मंडल ने स्वीकार किया कि हालांकि उसने मुख्यमंत्री के चिनार पार्क आवास के आसपास के क्षेत्र और उस क्षेत्र से गुजरने वाले अपने काफिले के रास्तों की रेकी की थी, लेकिन पूरे क्षेत्र में व्यापक सीसीटीवी कवरेज के कारण पकड़े जाने के डर से वह कोई वीडियो या तस्वीर नहीं ले सका।

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पाकिस्तान से क्या निर्देश मिले थे? 
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान स्थित उनके प्रबंधकों ने उन्हें साफ निर्देश दिए थे कि वीवीआईपी के आवासों या आसपास के क्षेत्रों की तस्वीरें या वीडियो लेते समय सीसीटीवी फुटेज में न पकड़े जाएं।राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उसने स्वीकार किया था कि भारी सीसीटीवी कवरेज की इस कमी के कारण, उसे इलाके में अपनी रेकी गतिविधियों को सीमित करना पड़ा।

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आरोपी काफिले की रेकी के लिए क्या करता था? 
मंडल ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के काफिले द्वारा आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले मार्गों की रेकी करने के लिए कभी-कभी ऐप-आधारित कैब किराए पर ली थीं। फिलहाल, मंडल और उसके दो साथी, अर्पिता सरकार और आदित्य सिंह, एसटीएफ की हिरासत में हैं। जैश-ए-मोहम्मद के अलावा, मंडल का पाकिस्तान स्थित आतंकवादी-आपराधिक समूह शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) से भी संपर्क था।

अर्पिता सरकार का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था? 
अर्पिता सरकार का इस्तेमाल मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों को हनी-ट्रैप में फंसाने और बाद में ब्लैकमेल के माध्यम से उनसे पैसे वसूलने के लिए एक माध्यम के रूप में किया जाता था।

अर्पिता ने कितने लोगों को निशाना बनाया था? 

मंडल और सरकार से पूछताछ के बाद एसटीएफ अधिकारियों को पता चला है कि एसबीएन ने अर्पिता के माध्यम से पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल के कम से कम छह मौजूदा सदस्यों के परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया था। अब तक की जांच में पता चला है कि राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों के परिवार के सदस्यों के अलावा, राज्य के प्रशासनिक तंत्र में कुछ अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को भी सरकार के माध्यम से निशाना बनाया गया था।

 

 

 

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