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Republic Day 2019: 600 घंटे की तैयारी के बाद 8 किमी लंबी परेड करते हैं हमारे जवान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 26 Jan 2019 11:16 AM IST
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Republic Day 2019: 600 hours practice of soldiers for 8 km parade
republic day parade - फोटो : PTI

हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के राजपथ पर एक विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। इसी दिन 1950 में भारत सरकार अधिनियम एक्ट (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। भारतीय सेना अगस्त से ही इस परेड की तैयारी शुरू कर देती है। माना जाता है कि 8 किमी लंबी परेड के लिए एक जवान 600 घंटे का अभ्यास करता है। उनकी शुरुआती तैयारी अपनी रेजीमेंट में ही होती है। इसके बाद दिसंबर से दिल्ली में परेड की तैयारी होती है।


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हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली के राजपथ पर एक विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। इसी दिन 1950 में भारत सरकार अधिनियम एक्ट (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। भारतीय सेना अगस्त से ही इस परेड की तैयारी शुरू कर देती है। माना जाता है कि 8 किमी लंबी परेड के लिए एक जवान 600 घंटे का अभ्यास करता है। उनकी शुरुआती तैयारी अपनी रेजीमेंट में ही होती है। इसके बाद दिसंबर से दिल्ली में परेड की तैयारी होती है।

देश का पहला गणतंत्र दिवस राजपथ पर नहीं बल्कि इर्विन स्टेडियम (आज का नेशनल स्टेडियम) में हुआ था। इसके बाद 1954 तक गणतंत्र दिवस कभी इर्विन स्टेडियम, कभी किंग्सवे कैंप, रामलीला मैदान तो कभी लाल किले में आयोजित होता रहा। लकिन साल 1955 के बाद से अभी तक इसका आयोजन राजपथ पर हो रहा है।

यहां से होती है शुरुआत

परेड की शुरुआत रायसीना हिल्स से होती है। यहां से परेड राजपथ, इंडिया गेट से गुजरती हुई लाल किले तक जाती है। जब परेड की शुरुआत होती है तब गार्ड सबसे पहले राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। इस दौरान सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। जगह-जगह पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनता किया जाता है। इसके अलावा खोजी कुत्तों और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल भी किया जाता है। परेड में विभिन्न प्रकार के टैंक और जहाजों का प्रदर्शन किया जाता है। 
 
बहादुर बच्चे नहीं बने इस बार परेड का हिस्सा

गणतंत्र दिवस के मौके पर साल 1957 से ही बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जाता है। लेकिन इस साल पहली बार किसी विवाद के कारण ये बहादुर बच्चे इस परेड का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। 

बेहद अद्भुत होती हैं झांकियां

इस दौरान निकलने वाली झांकियां सबसे अलग प्रतीत होती हैं। इनसे देश की विभिन्नता में एकता की छवि प्रदर्शित होती है। परेड में अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां शामिल होती हैं। इसमें देश की सांस्कृतिक विरासत, धरोहर और इतिहास के साथ धार्मिक मान्यताएं और आधुनिक विकास की झलक दिखाई देती है। जैसे भारत छोड़ो आंदोलन, गांधी जी को साउथ अफ्रीका में ट्रेन से निकालने की घटना और जलियांवाला बाग आदि की झलक इस बार झांकी में दिखाई गई। 

आते हैं विदेशी मेहमान

Cyril Ramaphosa
Cyril Ramaphosa - फोटो : PTI
साल 1950 से ही इस मौके पर विदेशी मेहमानों को आमंत्रित किया जाता है। जिनमें विभिन्न देशो के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राजा होते हैं। अभी तक अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान, चीन से लेकर पड़ोसी राज्य भूटान, श्रीलंका के मुखिया इसका हिस्सा बन चुके हैं। इस बार दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सायरिल रामफोसा विदेशी मेहमान हैं। 

हालांकि, इससे पहले पीएम मोदी ने 2019 गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को न्योता दिया था। लेकिन व्हाइट हाउस के मुताबिक समय की कमी के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत आने का न्योता स्वीकार नहीं किया था।

व्हाइट हाउस ने ट्रंप के न आने की वजह को विस्तार से नहीं समझाया लेकिन करीब से देखा जाये तो 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड उस समय के आसपास है जब अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस की वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हैं, जो कि पिछले वर्ष की उपलब्धियों का बयान और अगले वर्ष की योजनाएं होती हैं। 

14 घोड़ों की बग्घी में बैठकर आते हैं राष्ट्रपति

परेड के शुरू होने से पहले देश के राष्ट्रपति 14 घोड़ों की बग्घी में बैठकर इंडिया गेट आते हैं। यहां उनका स्वागत देश के प्रधानमंत्री करते हैं। वहीं साल 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा शुरू की थी। जो अभी भी चली आ रही है। 

ब्लैककैट कमांडो भी बना हिस्सा

बीते साल एनएसजी के ब्लैककैट कमांडो ने न केवल पठानकोट एअर बेस पर आतंकवादी हमले को नाकाम किया बल्कि चार आतंकियों को भी मार गिराया था। जिसकेे बाद सरकार ने तय किया गया कि ब्लैककैट कमांडोज का दस्ता भी परेड का हिस्सा बनेगा।

फूल बरसाने की शुरुआत

हेलिकॉप्टर से दर्शकों पर फूल बरसाने की शुरुआत साल 1959 में शुरु की गई थी। राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी देने की शुरुआत साल 1970 से हुई। सेना के बैंड ने पहली बार महात्मा गांधी के मनपसंद गीत की धुन साल 1952 में बजाई थी। 
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