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तृणमूल कांग्रेस पर किसका दावा मजबूत?: बागी गुट पर क्यों भड़कीं ममता बनर्जी, निर्वाचन आयोग से क्या कहा?

Mon, 13 Jul 2026 08:37 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 13 Jul 2026 08:37 PM IST
सार

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि पार्टी के बागी गुट को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय न दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कम समय मिला, जबकि दूसरे पक्ष को अतिरिक्त छूट दी गई। पढ़िए रिपोर्ट-

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Ritabrata-led faction should not be given more time for reply : Mamata to EC
ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग (ईसी) को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को अधिक समय न दिया जाए। यह गुट अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठन के चुनावों से जुड़े अपने दावे पेश करना चाहता है।  
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विवाद कैसे शुरू हुआ?
पार्टी के अंदर चल रहा विवाद दो जुलाई को और बढ़ गया था, जब बागी गुट ने निर्वाचन आयोग से संपर्क कर खुद को 'असली' अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) बताया था। इस गुट ने कहा था कि उसने 22 जून को आयोजित विशेष बैठक के बाद निर्वाचन आयोग को इसकी जानकारी दी थी। साथ ही उसने संगठन में किए गए बदलावों को मान्यता देने की मांग की थी।
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इस दावे के बाद निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों को पत्र भेजकर छह जुलाई शाम साढ़े पांच बजे तक अपना जवाब देने को कहा था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने तय समय से पहले छह जुलाई को अपना जवाब जमा कर दिया था। वहीं, ऋतब्रत गुट को जवाब देने के लिए 10 जुलाई शाम साढ़े पांच बजे तक अतिरिक्त समय दिया गया था।
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ममता ने क्या आपत्ति जताई?
12 जुलाई को निर्वाचन आयोग को भेजे अपने पत्र में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, 10 जुलाई 2026 की तारीख बीत जाने और इसके करीब दो दिन बाद भी ऋतब्रत बनर्जी की ओर से जवाब को लेकर मुझे कोई सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

टीएमसी सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों से कहा था कि वे अपने जवाब के बारे में एक-दूसरे को जानकारी देते रहें। ममता बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की शर्त के बावजूद उन्हें जवाब की जानकारी नहीं दी गई। इससे लगता है कि निर्वाचन आयोग को भी तय अतिरिक्त समय सीमा के भीतर वह जवाब नहीं मिला है।

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निर्वाचन आयोग पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने कहा कि ऋतब्रत को बाद में जवाब दाखिल करने के लिए दी गई अतिरिक्त समय दिया गया। लेकिन उन्हें नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2 जुलाई के पत्र का जवाब देने के लिए उन्हें लगभग दो आधे कार्य दिवसों का ही समय मिला।

ममता बनर्जी ने कहा कि 10 जुलाई के बाद 48 घंटे बीत जाने के बावजूद निर्वाचन आयोग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे ऋतब्रत बनर्जी को और समय मिल रहा है और यह उनके गलत इरादों का समर्थन करने जैसा है। इसलिए यह मांग की जाती है कि मेरे पक्ष की ओर से जमा किए गए जवाब पर जल्द से जल्द विचार किया जाए और ऋतब्रत बनर्जी को और समय न दिया जाए। 
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