सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   RSS leader Hosabale says Shivaji not only Maratha king but also an inspiration for Hindavi Swaraj

होसबले बोले: शिवाजी सिर्फ मराठा राजा नहीं, 'हिंदवी स्वराज' के प्रेरणास्रोत थे, अंग्रेज भी मिटा न सके इतिहास

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 01 Aug 2024 01:55 AM IST
विज्ञापन
सार

आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबले ने बुधवार को शिवाजी के राज्यभिषेक की 350वीं वर्षगांठ पर उनके जीवन और योगदान पर चार पुस्तकों का विमोचन किया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबले ने कहा कि क्या शिवाजी महाराज केवल मराठों के थे? उनके शासनकाल को हमेशा मराठा साम्राज्य कहा जाता है। 

RSS leader Hosabale says Shivaji not only Maratha king but also an inspiration for Hindavi Swaraj
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबले - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार

आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि छत्रपति शिवाजी सिर्फ एक मराठा राजा नहीं थे, बल्कि 'हिंदवी स्वराज' के प्रेरणास्रोत थे। आजादी के बाद शिवाजी के इतिहास को कमजोर करने के लिए अंग्रेजों ने काफी प्रयास किया, लेकिन उन्हें इतिहास से मिटा नहीं सके, क्योंकि वह 'आत्म-प्रकाशमान और प्रेरणादायक' बने रहे।

Trending Videos


आरएसएस नेता ने बुधवार को शिवाजी के राज्यभिषेक की 350वीं वर्षगांठ पर उनके जीवन और योगदान पर चार पुस्तकों का विमोचन किया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबले ने कहा कि क्या शिवाजी महाराज केवल मराठों के थे? उनके शासनकाल को हमेशा मराठा साम्राज्य कहा जाता है। शिवाजी महाराज ने यह बात एक बार भी नहीं कही। उन्होंने हिंदवी स्वराज की बात की। कहा कि अंग्रेजों के सत्ता में आने से पहले, शिवाजी द्वारा बनाया गया साम्राज्य दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा था, जिसमें 250 मिलियन एकड़ भूमि शामिल थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


होसबले ने कहा, शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक राजा बनने की स्वार्थी महत्वाकांक्षा के साथ नहीं, बल्कि यह संदेश देने के लिए स्वीकार किया था कि भारतीय समाज जीवित और बहादुर है। भारत का हिंदू समाज, जो शक्तिशाली और सक्षम है, एक बार फिर अपने साम्राज्य पर नियंत्रण करने के लिए उठेगा। शिवाजी ने इस संदेश को भेजने की आवश्यकता महसूस की, क्योंकि भारतीय समाज अपने मंदिरों, संस्कृति, राज्य, भाषा के विनाश को खोने के बाद पराजित महसूस कर रहा था। यह आशंका थी कि उसका धर्म जीवित रहेगा या नहीं।

होसबले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अनिल महादेव दवे की पुस्तक 'शिवाजी एंड सुराज' की प्रस्तावना लिखी थी, जिसमें बताया गया था कि शिवाजी से प्रेरणा लेते हुए आज भी 'सुशासन' की जरूरत है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिवाजी के जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला। कहा कि उनके पास हिंद स्वराज की अवधारणा थी, न कि मराठा स्वराज की। उन्होंने एकता और अखंडता के साथ भारत की अवधारणा की कल्पना की थी। उनके राज्य का मुख्य सिद्धांत इसे आत्मनिर्भर बनाना था और उन्होंने व्यवसायों और उद्योगों को बढ़ावा दिया। इसके अलावा, शिवाजी महाराज का 'सुराज (सुशासन)' धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक था। उन्होंने हर धर्म के लोगों को समान अधिकार और सम्मान दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed