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UN: 'मानवाधिकार पर राजनीति नहीं, समग्र दृष्टिकोण जरूरी', संयुक्त राष्ट्र में एस. जयशंकर की अपील
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
Published by: लव गौर
Updated Thu, 26 Feb 2026 11:53 AM IST
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सार
UN: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मानवाधिकारों के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है, जिसमें विकास और क्षमता निर्माण शामिल हो, जिससे सबसे कमजोर लोगों के दैनिक जीवन में ठोस सुधार हो सके और आतंकवाद का सामना किया जा सके, बजाय इसके कि "राजनीतिकरण, चयनात्मकता या दोहरे मापदंड" की बहस में उलझा जाए।
विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मानवाधिकारों को लेकर 'राजनीतिक बयानबाजी' से ऊपर उठकर विकास, क्षमता निर्माण और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का उद्देश्य सबसे कमजोर वर्ग के लोगों के दैनिक जीवन में ठोस सुधार लाना होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में अपने वर्चुअल संदेश में उन्होंने बुधवार को कहा कि संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से ग्रस्त दुनिया में भारत साझा आधार खोजने और उसका विस्तार करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा, 'हमने लगातार टकराव की जगह संवाद, विभाजन की जगह सहमति और संकीर्ण हितों की जगह मानव-केंद्रित विकास पर जोर दिया है।'
आतंकवादी कृत्यों पर जीरो टॉलरेंस की वकालत
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद को मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरी तरह से साकार करने के लिए उन्हें 'आतंकवादी कृत्यों के लिए शून्य सहिष्णुता की वकालत' करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'आतंकवाद मानवाधिकारों के सबसे जघन्य उल्लंघनों में से एक है, और इसका कोई औचित्य नहीं हो सकता, खासकर जब निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है।'
मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया भारत
भारत हाल ही में सातवीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया है और उसे संयुक्त महासभा में 188 में से 177 मत मिले। जयशंकर ने कहा कि यह वैश्विक समुदाय, खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए राजनीति, दोहरे मानदंड और चयनात्मक रवैये के बजाय संवाद, साझेदारी और क्षमता निर्माण पर विश्वास करता है।
ये भी पढ़ें: UN: 'जबरन कब्जे वाले इलाके खाली करो', पीओके पर भारत की पाकिस्तान को फटकार; सुनाई खरी-खरी
मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध: जयशंकर
उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत सभी लोगों के लिए समानता और सम्मान के आधार पर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों को पारदर्शी तरीके से कल्याण योजनाओं, वित्तीय सेवाओं और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच मिली है और भारत अपने अनुभव को वैश्विक हित में साझा कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि महामारी, जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबावों ने असमानताओं को और बढ़ाया है, जिससे विकास को मानवाधिकारों के मूल आधार के रूप में देखना जरूरी हो गया है।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में अपने वर्चुअल संदेश में उन्होंने बुधवार को कहा कि संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से ग्रस्त दुनिया में भारत साझा आधार खोजने और उसका विस्तार करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा, 'हमने लगातार टकराव की जगह संवाद, विभाजन की जगह सहमति और संकीर्ण हितों की जगह मानव-केंद्रित विकास पर जोर दिया है।'
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आतंकवादी कृत्यों पर जीरो टॉलरेंस की वकालत
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद को मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरी तरह से साकार करने के लिए उन्हें 'आतंकवादी कृत्यों के लिए शून्य सहिष्णुता की वकालत' करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'आतंकवाद मानवाधिकारों के सबसे जघन्य उल्लंघनों में से एक है, और इसका कोई औचित्य नहीं हो सकता, खासकर जब निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है।'
My remarks at the 61st Session of @UN_HRC. https://t.co/1iO5bmch9G
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 25, 2026
मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया भारत
भारत हाल ही में सातवीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया है और उसे संयुक्त महासभा में 188 में से 177 मत मिले। जयशंकर ने कहा कि यह वैश्विक समुदाय, खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए राजनीति, दोहरे मानदंड और चयनात्मक रवैये के बजाय संवाद, साझेदारी और क्षमता निर्माण पर विश्वास करता है।
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मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध: जयशंकर
उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत सभी लोगों के लिए समानता और सम्मान के आधार पर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों को पारदर्शी तरीके से कल्याण योजनाओं, वित्तीय सेवाओं और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच मिली है और भारत अपने अनुभव को वैश्विक हित में साझा कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि महामारी, जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबावों ने असमानताओं को और बढ़ाया है, जिससे विकास को मानवाधिकारों के मूल आधार के रूप में देखना जरूरी हो गया है।
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