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Emergency: 'इंदिरा गांधी ने कोई पार्टी नहीं तोड़ी थी', आपातकाल का संजय राउत ने किया बचाव, किस पर साधा निशाना?

एएनआई, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 25 Jun 2026 02:37 PM IST
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सार

आपातकाल की वर्षगांठ पर शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने शिवसेना और भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि संविधान में आपातकाल का प्रावधान मौजूद है और जरूरत पड़ने पर इसे लागू किया जा सकता है। 

Sanjay Raut takes jibe at Shiv Sena BJP on Emergency proclamation anniversary indira gandhi
संजय राउत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आपातकाल की वर्षगांठ पर गुरुवार को संजय राउत ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कभी किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा था। राउत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब शिवसेना यूबीटी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद हाल ही में शिवसेना के शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने दावा किया कि देश पिछले 12 वर्षों से आपातकाल जैसी स्थिति का सामना कर रहा है।


संजय राउत ने आपातकाल लगाने के फैसले का किया बचाव
संजय राउत ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का बचाव करते हुए कहा कि भारतीय संविधान में आपातकाल का प्रावधान मौजूद है। राउत ने कहा, 'देश में पिछले 12 साल से आपातकाल जैसी स्थिति है। इंदिरा गांधी ने न तो कोई राजनीतिक पार्टी तोड़ी थी और न ही संविधान को खत्म किया था। आपातकाल केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि संविधान में उसका स्पष्ट प्रावधान भी है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'अगर देश में अराजकता फैलती है तो संविधान में आपातकाल लगाने का प्रावधान है। इसका मतलब यह नहीं कि संविधान का सम्मान न किया जाए। मैं पूछना चाहता हूं कि नोटबंदी क्यों लागू की गई? कोविड-19 महामारी के दौरान कड़े प्रतिबंध और आपातकालीन उपाय क्यों लागू किए गए? बालासाहेब ठाकरे ने भी आपातकाल का समर्थन किया था।'
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शिवसेना यूबीटी सांसद ने इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि 'अगर कोई कहे कि सरकार के आदेशों को मत मानो और सेना से कहे कि पीएम मोदी के खिलाफ बगावत कर दो तो फिर आप क्या करोगे?'

एनसीईआरटी की किताब में शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में से एक के रूप में शामिल किया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' नामक नई पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि आपातकाल के दौरान लोगों के अधिकतर मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। इस विषय को भारतीय लोकतंत्र की ताकत और चुनौतियों पर आधारित अध्याय में शामिल किया गया है।

सचिन पायलट ने भी उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इतिहास को अपने नजरिए से पेश करने की कोशिश कर रही है। पायलट ने कहा, 'जब भी भाजपा की सरकार किसी राज्य या केंद्र में सत्ता में होती है, वह इतिहास को अपने तरीके से पेश करने की कोशिश करती है। आजाद भारत के इतिहास में लोकतंत्र के सामने आज जैसी चुनौती पहले कभी नहीं आई। जिस तरह सोशल मीडिया, मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का उपयोग कर आवाजों को दबाया जा रहा है, वह अभूतपूर्व है। पहली बार कोई सरकार इन संस्थाओं का इस तरह दुरुपयोग कर रही है।'
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