आरएसएस: भारत बोध के विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए संघ करेगा विशेष प्रयास, प्रतिनिधि सभा में लिया गया निर्णय
गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के कर्णावती में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक चल रही है। इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि शोध करने वालों, लेखकों और समाज के राय बनाने वालों के सहयोग से भारत में और विदेशों में भी तथ्यों पर आधारित भारत बोध के सही विमर्श को आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा।
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गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के कर्णावती में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक चल रही है। इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि शोध करने वालों, लेखकों और समाज के राय बनाने वालों के सहयोग से भारत में और विदेशों में भी तथ्यों पर आधारित भारत बोध के सही विमर्श को आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने अपने संबोधन के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत के विमर्श को मजबूत करने, उसे प्रभावी बनाने का कार्य आने वाले वर्षों में विशेष प्रयास करते हुए करने का निर्णय किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत के हिन्दू समाज, संस्कृति, इतिहास, यहां की जीवन पद्धति के बारे में एक सही चित्र को समाज के सम्मुख रखना चाहिए। भारत में और विदेशों में भी भारत के बारे में अज्ञान के कारण या जानबूझकर भ्रांतियां फैलाने का षड्यंत्र लंबे समय से चल रहा है। इस वैचारिक विमर्श को बदलकर तथ्यों पर आधारित भारत बोध के सही विमर्श को आगे बढ़ाना है। समाज में बहुत सारे लोग इस विषय पर कार्य कर रहे हैं। कई शोधकर्ताओं ने शोध किया है, पुस्तकें लिखी हैं। विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ भी समन्वय-सहयोग किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक के दौरान भारतीय समाज, उसके हिंदू समुदाय, उसके इतिहास, संस्कृति और जीवन शैली की एक सच्ची तस्वीर पेश करने के तरीकों सहित इस और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।
2025 में आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह से पहले इस प्रतिनिधि सभा की बैठक में 1,252 पदाधिकारियों और सदस्यों ने भाग लिया। बैठक के अंतिम दिन पत्रकारों से बात करते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कर्नाटक के हिजाब विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सभी को धार्मिक स्वतंत्रता मिली है, लेकिन इसे लागू करने के बारे में संतुलन बनाने की जरूरत है। संविधान की आड़ में धार्मिक स्वतंत्रता को अंजाम देना सही नहीं है।
होसबोले ने कहा कि बैठक में संघ के विस्तार पर भी चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि संघ की गतिविधियां देश भर के 50 प्रतिशत मंडलों में पहुंच गई हैं। इनमें दैनिक शाखाएं और साप्ताहिक बैठकें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ की योजना आने वाले दो वर्षों में अपनी विस्तार योजनाओं को पूरा करने की है।
उन्होंने कहा कि हमारी योजना शहर के वार्डों में संघ का विस्तार करने और देश के प्रत्येक जिले में एक आदर्श गांव बनाने की है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि समुदाय के सदस्यों के बीच राष्ट्रवाद और एकता के विचार को आगे बढ़ाना है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कुछ सालों में स्वेच्छा से संघ में शामिल होकर काम करने वालों की संख्या बढ़ी है।
होसबोले ने कहा प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक में कोरोना के बाद शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बदलावों को लेकर भी चर्चा की गई। इस दौरान उन्होंने कहा कि 'जय श्री राम' अभिवादन का एक तरीका है, और यहां तक कि भारत आने वाले विदेशी भी ऐसा कहते हैं। अगर लोग इसका विरोध करते हैं, तो बच्चों, उनके माता-पिता को उनसे सवाल करना चाहिए। यह स्वाभाविक है कि अगर कुछ भी भारत की सांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ जाता है तो समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।