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SC: मणिपुर हिंसा के मामलों की सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें? सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से क्या कहा

Mon, 10 Aug 2026 03:03 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 10 Aug 2026 03:03 PM IST
सार

SC: मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। इस रिपोर्ट में जानिए अदालत ने सीबीआई और एनआईए की जांच वाले मामलों के लिए अलग-अलग विशेष अदालतों की जरूरत क्यों बताई, पीड़ितों और उनके परिवारों को क्या राहत देने का निर्देश दिया गया।

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SC asks authorities to set up to 2 special courts to deal with Manipur violence cases probed by CBI, NIA
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर और असम की सरकारों समेत अन्य संबंधित अधिकारियों से 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े उन मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें बनाने पर विचार करने को कहा, जिनकी जांच सीबीआई और एनआईए कर रही हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की जांच की स्थिति की जानकारी ली। इसके साथ ही पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, उनकी जानकारी एक जगह जुटाई जाए। इससे पीड़ित, उनके परिवार और कानूनी वकील संबंधित दस्तावेज हासिल कर सकेंगे।
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पीठ ने संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भी इस मामले में अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने आदेश दिया, अधिकारी दो अलग-अलग विशेष अदालतें बनाने पर विचार करें। इनमें से एक अदालत मणिपुर हिंसा से जुड़े सीबीआई के मामलों और दूसरी एनआईए के मामलों की सुनवाई के लिए हो। संबंधित उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट पेश करें। 
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सीजेआई ने क्या कहा?
सीजेआई ने कहा कि पीठ ने जांच की निगरानी के लिए एक व्यवस्था बनाई है। साथ ही ऐसी जांच से जुड़ी रिपोर्ट्स को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं। पीठ ने कहा कि ऐसे मामले हैं, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

पीठ ने कहा, अनुरोध किया गया है कि उन मामलों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए, जिसमें संबंधित केस नंबर और कार्यवाही की स्थिति शामिल है। इससे वकीलों और संबंधित परिवारों को रिपोर्ट और कार्यवाही तक पहुंच मिल सकेगी। हम इस अनुरोध को स्वीकार करते हैं और निर्देश देते हैं कि संबंधित जानकारी और रिपोर्ट जुटाकर अदालत के सामने रखी जाए। 

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पीठ ने कहा, हमने सीबीआई और एनआईए की ओर से जांच किए गए मामलों और उन अदालतों की स्थिति रिपोर्ट पर भी विचार किया है, जहां आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। बताया गया है कि सीबीआई और एनआईए के मामलों की सुनवाई विशेष जज कर रहे हैं। 

पीठ ने कहा कि उसकी चिंता यह जानने को लेकर है कि क्या ये अदालतें केवल मणिपुर हिंसा से जुड़े सीबीआई और एनआईए के मामलों की सुनवाई कर रही हैं या इनके पास दूसरे मामले भी हैं।

इसके बाद पीठ ने अधिकारियों से मणिपुर हिंसा से जुड़े सीबीआई मामलों के लिए एक और एनआईए मामलों के लिए दूसरी अलग विशेष अदालत बनाने पर विचार करने को कहा।
 
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