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अब एक ही लाइसेंस से चलेंगे परमाणु संयंत्र: संचालकों के लिए बीमा अनिवार्य, विदेशी तकनीक पर क्या हैं शर्तें?

Sat, 15 Aug 2026 03:33 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 15 Aug 2026 03:33 PM IST
सार

परमाणु संयंत्रों के लिए जारी मसौदा नियमों में संचालकों की वित्तीय जिम्मेदारी से लेकर विदेशी तकनीक तक कई शर्तें तय की गई हैं। सबसे अहम बदलाव यह है कि निर्माण से लेकर संचालन और बंद करने तक के लिए एक ही संयुक्त लाइसेंस का प्रावधान किया गया है।
 

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shanti act draft rules nuclear plant insurance foreign design licence
परमाणु संयंत्र से जुड़े नियम जारी - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

परमाणु ऊर्जा विभाग ने परमाणु संयंत्रों को लेकर नए नियमों का मसौदा जारी किया है। इसमें संयंत्र चलाने वाली कंपनियों के लिए परमाणु नुकसान की स्थिति में बीमा या वित्तीय सुरक्षा रखना जरूरी किया गया है। मसौदे में विदेशी तकनीक वाले रिएक्टर और परमाणु संयंत्र के लिए लाइसेंस से जुड़े नियम भी तय किए गए हैं।
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शांति अधिनियम, 2025 के मसौदे में परमाणु संयंत्र चलाने वालों की जिम्मेदारी और विदेशी तकनीक से जुड़े कई अहम प्रावधान किए गए हैं।
मसौदा नियमों के मुताबिक, परमाणु संयंत्र संचालकों को परमाणु नुकसान के लिए बीमा पॉलिसी, वित्तीय सुरक्षा या दोनों का संयोजन रखना होगा। यह वित्तीय सुरक्षा तब तक बनी रहनी चाहिए, जब तक संबंधित भंडारण कुंड से पूरा इस्तेमाल किया हुआ ईंधन हटा नहीं दिया जाता।
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क्या हर पांच साल में तय होगी संचालक की जिम्मेदारी?
मसौदा नियमों में कहा गया है कि केंद्र सरकार हर पांच साल में विशेषज्ञों का एक समूह बनाएगी। यह समूह परमाणु नुकसान के लिए संचालक की नागरिक देनदारी की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा।
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विदेशी डिजाइन वाले परमाणु संयंत्रों पर क्या शर्त होगी?
अगर कोई परमाणु बिजली संयंत्र या रिएक्टर विदेशी डिजाइन का है, तो उसके डिजाइन को मूल देश के नियामक से प्रमाणित या मंजूर होना जरूरी होगा। मसौदा नियमों में मूल देश का मतलब ऐसे देश से है जो परमाणु रिएक्टर के डिजाइन और उसकी आपूर्ति शृंखला के तंत्र में आत्मनिर्भर हों। साथ ही, वहां के नियामक की मंजूरियों पर दुनिया में भरोसा किया जाता हो। ऐसा परमाणु बिजली संयंत्र या रिएक्टर मूल देश या किसी दूसरे विदेशी देश में पहले से चालू भी होना चाहिए।

क्या तकनीक और जमीन तय होने से पहले मिल सकती है मंजूरी?
मसौदा नियमों के मुताबिक, लाइसेंस देने वाला प्राधिकरण आवेदन स्वीकार करने के बाद ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ दे सकता है। यह तब भी संभव होगा, जब संयंत्र की जगह या तकनीक अभी तय नहीं हुई हो। ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ मिलने के बाद आवेदक रिएक्टर तकनीक देने वाली कंपनियों से बातचीत कर सकता है। वह जमीन खरीदने और दूसरी जरूरी बुनियादी सुविधाएं जुटाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा सकता है।


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क्या निर्माण से लेकर बंद करने तक एक ही लाइसेंस होगा?
मसौदा नियमों में एक और बड़ा प्रावधान किया गया है। इसके तहत परमाणु बिजली संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन और बंद करने के लिए एक ही संयुक्त लाइसेंस होगा। इनमें से किसी एक काम के लिए अलग से लाइसेंस का आवेदन नहीं किया जा सकेगा। न ही इन गतिविधियों के लिए लाइसेंस को अलग-अलग बांटा या अलग किया जा सकेगा।

मसौदे से जुड़ी पांच बड़ी बातें
  • संचालक को बीमा, वित्तीय सुरक्षा या दोनों का संयोजन रखना होगा।
  • संबंधित भंडारण कुंड से पूरा इस्तेमाल किया हुआ ईंधन हटाए जाने तक वित्तीय सुरक्षा जारी रखनी होगी।
  • विशेषज्ञों का समूह संचालक की नागरिक देनदारी की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा।
  • डिजाइन को मूल देश के नियामक से प्रमाणित या मंजूर होना जरूरी होगा।
  • विदेशी डिजाइन वाला रिएक्टर मूल देश या किसी दूसरे विदेशी देश में पहले से संचालित होना चाहिए।
  • जगह या तकनीक तय न होने पर भी आवेदन स्वीकार करने के बाद ऐसी मंजूरी दी जा सकती है।
  • निर्माण, स्वामित्व, संचालन और बंद करने के लिए अलग-अलग लाइसेंस नहीं होंगे।

 
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