Tharoor On Budget: 'शीर्षकों की भरमार लेकिन कोई दिशा नहीं', बजट पर थरूर ने उठाए सवाल; रोजगार पर भी कही ये बात
शशि थरूर ने केंद्रीय बजट को समग्र दृष्टि से खाली बताते हुए कहा कि इसमें कई सबहेडिंग हैं, पर ठोस दिशा नहीं। उन्होंने रोजगार, राज्यों के हिस्से और मध्यम वर्ग के लिए राहत की कमी पर सवाल उठाए। केरल को लेकर भी उन्होंने निराशा जताई।
विस्तार
केंद्रीय बजट पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने बजट को लेकर कहा कि इसमें समग्र दृष्टि की कमी दिखती है। उन्होंने क्रिकेट की भाषा में तंज कसते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने गेंद को सही तरह से नहीं खेला। थरूर ने बजट को कई छोटे शीर्षकों का संग्रह बताया, लेकिन ठोस दिशा और बड़े विज़न से खाली बताया।
बजट पर क्या बोले थरूर?
नई दिल्ली में बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि बजट भाषण में कई सबहेडिंग थीं, लेकिन बहुत कम ठोस घोषणाएं दिखीं। उन्होंने कहा कि यह बजट समग्र आर्थिक दिशा नहीं बताता। उनके अनुसार देश किस दिशा में जा रहा है, रोजगार कैसे बढ़ेगा और राज्यों को क्या मिलेगा, इन बड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह भाषण आकार में भी छोटा था और असर में भी सीमित लगा।
रोजगार और राज्यों पर उठाए सवाल
थरूर ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल रोजगार का है, लेकिन बजट में नौकरी सृजन को लेकर साफ योजना नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए भी कोई बड़ी नई घोषणा नहीं है। राजस्व बंटवारा 41 प्रतिशत पर ही रखा गया है, जबकि कई राज्य पहले से संसाधनों की कमी की शिकायत कर रहे हैं। उनके अनुसार राज्यों की जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं, लेकिन मदद उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गई।
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बजट पर केरल को लेकर क्या बोले थरूर?
- बजट भाषण में केरल का नाम बहुत कम बार लिया गया।
- लंबे समय से एम्स जैसे बड़े संस्थान की मांग हो रही, लेकिन घोषणा नहीं हुई।
- आयुर्वेद संस्थान का जिक्र हुआ, पर स्थान स्पष्ट नहीं किया गया।
- नारियल और काजू जैसे उत्पादों की बात हुई, लेकिन केरल का नाम नहीं लिया गया।
- अंतर्देशीय जलमार्ग और शिप रिपेयर योजनाएं दूसरे शहरों को दी गईं।
कल्याण योजनाओं पर कही ये बात
थरूर ने कहा कि बजट में कल्याण योजनाओं का स्पष्ट ब्योरा नहीं है। उन्होंने महात्मा गांधी से जुड़े ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के नाम में बदलाव का भी मुद्दा उठाया और कहा कि नई योजना का असली स्वरूप और फंडिंग देखना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लिए बजट भाषण में कोई बड़ी राहत सुनाई नहीं दी। उनके अनुसार आम करदाता को सीधे लाभ का संकेत नहीं मिला।
व्यापार और वैश्विक बाजार पर चिंता
थरूर ने भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत का बड़ा बाजार रहा है, लेकिन ऊंचे टैरिफ से असर पड़ा है। जब तक अमेरिका के साथ नई समझ नहीं बनती, तब तक खोया बाजार वापस पाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ अगला बड़ा बाजार बन सकता है, लेकिन समझौते के पूरी तरह लागू होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि बजट में एक बड़ी हेडलाइन या स्पष्ट दिशा दिखनी चाहिए थी, जो नजर नहीं आई।
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