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Shiv Sena UBT Rift: उद्धव ठाकरे ने 22 जून को बैठक बुलाई, पार्टी में असंतोष की अटकलों पर किस नेता ने क्या कहा?

आईएएनएस, मुंबई Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 16 Jun 2026 12:14 PM IST
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सार

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 22 जून को मुंबई में पार्टी विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इससे पहले पार्टी सांसदों की बैठक भी आयोजित की जा चुकी है। इन बैठकों का मुख्य मकसद पार्टी की एकजुटता को मजबूत करना माना जा रहा है। हालांकि, इस सब के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें भी हैं।

Shiv Sena UBT Rift Speculations Uddhav Raut Pratap Jadhav Rao and others react Maharashtra Politics hindi news
महाराष्ट्र में सियासी हलचल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पार्टी में असंतोष की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों के बाद अब अपने विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक 22 जून को शाम चार बजे मुंबई में होगी। मंत्रालय के सामने स्थित पार्टी कार्यालय 'शिवालय' में सभी विधायकों को जुटने के लिए कहा गया है। मुख्य सचेतक सुनील प्रभु और एमएलसी अनिल परब ने पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। पत्र के अनुसार, विधानसभा और विधान परिषद के सभी सदस्यों को इस बैठक में शामिल होना जरूरी है। उद्धव ठाकरे खुद इस बैठक में मौजूद रहेंगे और विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे। सभी नेताओं से समय पर पहुंचने का अनुरोध किया गया है।


रविवार को हुई थी सांसदों की बैठक
इससे पहले, रविवार को उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई थी। नौ लोकसभा सदस्यों में से अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजभाऊ वाजे और संजय पाटिल व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल हुए थे। संजय राउत ने बताया था कि ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापुराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ने ऑनलाइन बैठक में भाग लिया, जबकि संजय जाधव ने फोन पर ठाकरे से बात की। बता दें कि शिवसेना यूबीटी के वर्तमान में नौ सांसद हैं और 19 विधायक हैं।
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राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है और कई नेताओं ने इस पर अपनी टिप्पणी की है। घटना के बाद महाराष्ट्र के मंत्री आशीष जायसवाल, शिवसेना नेता संजय निरुपम, शिवसेना नेता कृपाल तुमाने और शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने इस पूरे मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
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संजय निरुपम का बयान
'ऑपरेशन टाइगर' पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उनके विधायकों और सांसदों का अब उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा। 2029 तक यह पार्टी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। लोग हर दिन साथ छोड़ रहे हैं। सांसदों का जाना उनका आंतरिक मामला है, लेकिन यह तय है कि यह पार्टी अब नहीं बचेगी।

कृपाल तुमाने का दावा
शिवसेना एमएलसी कृपाल तुमाने ने बड़ा दावा किया कि 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत 7 सांसद और 16 विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत आखिरी दौर में है। उन्होंने इसकी तुलना अस्पताल के ऑपरेशन से की और कहा कि जांच हो चुकी है, बस तारीख तय होना बाकी है। यह सब मानसून सत्र से पहले होगा।  हमारे लिए सारी जानकारी बताना सही नहीं है। लेकिन यह लगभग तय है कि वे हमारे साथ जुड़ेंगे। ये बातचीत एक महीने से चल रही है, लेकिन आज यह आखिरी चरण में है।

आशीष जायसवाल की राय
महाराष्ट्र के मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि यूबीटी के अंदरूनी मामलों पर बोलना ठीक नहीं है। अगर उन नेताओं को लगता है कि बालासाहेब की विरासत एकनाथ शिंदे के पास है और वे अपने भविष्य के लिए कोई फैसला लेते हैं, तो उसके बाद ही इस पर बात करना सही होगा। दलबदल विरोधी कानून के इतिहास और नियमों को ध्यान में रखते हुए वे क्या करते हैं और उनकी संख्या कितनी है, यह उनका फैसला है।

संजय राउत ने क्या कहा?
शिव सेना (UBT) के पांच सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरों पर शिव सेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को झूठ बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। चार दिन पहले ही सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे की बैठक में हिस्सा लिया और उनके नेतृत्व में भरोसा जताया। कुछ नेताओं ने तो साथ रहने की कसम भी खाई है। राउत ने कहा कि भाजपा का काम ही पार्टियों को तोड़ना है। उन्होंने पहले भी एनसीपी और शिवसेना को तोड़ा और अब तृणमूल कांग्रेस के साथ भी यही कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि सभी 9 सांसद उद्धव ठाकरे के साथ हैं और वे लोकतंत्र के लिए लड़ते रहेंगे।

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से 12 जून को दावा किया गया था कि देश की राजनीति अब केवल अपने फायदे के सौदे तक सिमटकर रह गई है। 'दल-बदलने वाले नेताओं के बढ़ते चलन के बीच राजनीति अब निजी स्वार्थ का धंधा बनी' शीर्षक से शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि वोटर किसी खास पार्टी के चुनाव चिह्न और विचारधारा के आधार पर वोट देते हैं और उम्मीद करते हैं कि उन्हें सही प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन अपना फायदा देखने वाले राजनीतिक अवसरवादी नेता अपने निजी फायदे के लिए तुरंत एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कूद जाते हैं। ये अवसरवादी नेता और उनके लीडर कूदते-फांदते दिल्ली पहुंच जाते हैं।


संपादकीय में तर्क दिया गया कि जिस तरह अंगूर और आम की कई किस्में विकसित की गई हैं, उसी तरह इन अस्थिर नेताओं की भी नई नस्लें सामने आई हैं। इनमें सबसे आगे 'सयानी घोष' किस्म है। चुनाव प्रचार के दौरान घोष ने अपने तीखे और जोशीले भाषणों से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 'मिनी-ममता' की छवि बनाई, हर रैली में भाजपा पर निशाना साधा और ममता बनर्जी को अपनी मां जैसा माना। टीएमसी के सांसदों के बीच दरारें पड़ने लगीं तो बहुत कम लोगों की उम्मीद थी कि सयानी का भी नाम उस सूची में होगा।"
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