अब कानाफूसी अभियान चलाएंगे व्यापारी, चुनाव से पहले सरकार से मनवाएंगे ये मांगें
व्यापारियों के एक प्रमुख संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक फरवरी से कानाफूसी अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वे अपनी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों और अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों से उस पार्टी के पक्ष में वोट देने की अपील करेंगे जो उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन देगा।
कैट एक फरवरी से देश भर में एक देश-एक व्यापारी-दस वोट अभियान को भी शुरू करेगा। यह अभियान 30 अप्रैल तक चलेगा। इसके तहत लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया जाएगा। कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि व्यापारी इस देश का सबसे श्रमशील समाज है। दिन रात वह अपने कार्य के माध्यम से देश के लोगों की सेवा करता है, सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
लेकिन इसके बाद भी उसे एक वर्ग के रुप में समझते हुए सरकार उसकी मांगों पर विचार नहीं करती। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सभी व्यापारी एक व्यापारी वर्ग के तहत वोट नहीं करता। लेकिन अगर उसका पूरा वोट सिर्फ व्यापार के हितों को ध्यान में रखते हुए पड़ने लगे, तो कोई भी सरकार उनकी मांगों को अनसूना नहीं कर सकेगी। उनकी कोशिश है कि व्यापारी समाज इस सच्चाई को समझे। उन्होंने कहा कि एक फरवरी से देश के 100 शहरों से एक साथ इस अभियान की शुरुआत होगी।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों की टीम अपने क्षेत्र के व्यापारियों से संपर्क करेगी और उन्हें उनकी शक्ति का एहसास कराते हुए देश की अर्थव्यवस्था में व्यापारियों के योगदान को बताते हुए एक होकर चुनाव में अपने संगठन के निर्देशानुसार मतदान करने की अपील करेगी। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी से 15 मार्च तक देश के प्रत्येक राज्य में एक रथयात्रा भी निकाली जाएगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भी बड़ा अभियान चलाया जाएगा।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में न आए सरकार
कैट के मुताबिक ऑनलाइन बाजार से सात करोड़ व्यापारियों और उनके माध्यम से रोजगार पा रहे करोड़ों परिवारों के सामने भुखमरी का संकट आ गया है। वे अपने भारी पूंजी बल के दम पर छोटे व्यापारियों को बाजार से हटा रही हैं। व्यापारियों की मांग पर अब जब सरकार ऑनलाइन बाजार की मार्केट पर नियम बना रही है तो ये सरकार को यह कहकर ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही हैं कि इससे भारत में निवेश खत्म हो जाएगा।
कैट के मुताबिक इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से पहले इन व्यापारियों के माध्यम से ही देश का काम चल रहा था। कैट की अपील है कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में न आए और कंपनियों के साथ सामान्य व्यापारी को भी बराबर का अवसर दे।
देश में 7 करोड़ छोटे व्यवसाई
देश में लगभग 7 करोड़ छोटे व्यवसाई हैं। इससे लगभग 45 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। ये व्यापारी प्रतिवर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं और सरकार को भारी मात्रा में राजस्व देते हैं। लेकिन ऑनलाइन बाजार के दबाव में इस वर्ग की कमर टूट रही है। व्यापारी बराबरी का मौका पाने के लिए सरकार पर दबाव डाल रहे हैं।