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जब चार पूर्व प्रधानमंत्रियों की एसपीजी सुरक्षा हटी तो इनमें से किसी ने नहीं किया ऐतराज...

Mon, 02 Dec 2019 10:18 PM IST
देव कश्यप जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: देव कश्यप Updated Mon, 02 Dec 2019 10:18 PM IST
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SPG security of four former Prime Ministers was removed, none of them objected
एसपीजी सुरक्षा - फोटो : SPG Website

विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस छिड़ गई है। विपक्ष का आरोप है कि गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा जानबूझकर और राजनीतिक कारणों से वापस ली गई है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने कहा है कि खतरा कम या ज्यादा होने से सुरक्षा की श्रेणी तय होती है, न कि व्यक्ति विशेष को देखकर उसका निर्धारण किया जाता है।

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जब पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, इंद्र कुमार गुजराल, पीवी नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा वापस ली गई तो इनमें से किसी ने भी ऐतराज नहीं जताया था।खास बात है कि इन पूर्व प्रधानमंत्रियों के अलावा इनकी पार्टी की ओर से भी विरोध या खिलाफत करने जैसी कोई आवाज नहीं सुनाई पड़ी। गृह मंत्रालय के पूर्व सुरक्षा सलाहकार संजय अग्रवाल कहते हैं कि एसपीजी सुरक्षा को व्यक्ति विशेष से जोड़ कर देखा जा रहा है, जबकि सच्चाई ये है कि खुफिया एजेंसियों की खतरे से संबंधित रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा का स्तर निर्धारित होता है। इसे स्टेट्स सिंबल बनाना गलत है।
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अग्रवाल के मुताबिक, देश के चार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, इंद्र कुमार गुजराल, पीवी नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि संबंधित एजेंसी की समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद वापस ली गई थी। जब एजेंसी ने कहा कि खतरे को देखते हुए इन्हें एसपीजी की जरूरत है तो सभी के पास एसपीजी रही। जब खतरा कम हो गया तो एसपीजी को हटा लिया गया।
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यदि कोई विपक्षी नेता यह मांग करता है कि आईबी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तो इसका मतलब वह व्यक्ति सुरक्षा तंत्र को ही खराब करने की मंशा पाले हुए है। आईबी का जो 'थ्रैट' विश्लेषण होता है, वह अत्याधिक प्रोफेशनल रहता है। उसमें कोई भी राजनीति या सत्ता प्रेरित बात नहीं होती। यह बात सभी लोग जानते हैं कि जिस नेता की एसपीजी हटाई गई है और उसके साथ कभी कोई घटना हो जाए तो उसका खामियाजा वही सरकार भोगेगी, जिसने वह सुरक्षा कवच हटाया था।

सूत्र बताते हैं कि 2004 से लेकर 2013 तक गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा पर करीब 18 सौ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यह तय है कि संबंधित एजेंसी ने जब सारा होमवर्क कर खतरा कम होने की रिपोर्ट दी होगी, तभी गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा वापस ली गई है।

पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को पांच साल की अवधि तक एसपीजी सुरक्षा प्राप्त होगी...

गत सप्ताह एसपीजी संशोधन विधेयक लोकसभा में पास हो गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि वे जो संशोधन लेकर आए हैं, उसके तहत एसपीजी सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री और उनके साथ आवास में रहने वालों के लिए ही होगी। सरकार द्वारा आवंटित आवास पर रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को भी पांच साल की अवधि तक एसपीजी सुरक्षा मिलेगी।



उन्होंने यह भी कहा कि जब डॉ मनमोहन सिंह की सुरक्षा बदली गई, तब भी किसी ने हल्ला नहीं किया। चिंता करने के दो मापदंड आखिर क्यों। गांधी परिवार की सुरक्षा हटाई नहीं गई है, बल्कि उसे बदला गया है। अब उन्हें सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा, एएसएल और एम्बुलेंस के साथ दी गई है। एसपीजी का गठन 1985 में बनी एक कमेटी के आधार पर हुआ था। 1985-88 तक एसपीजी एक अधिशासी आदेश के तहत काम करती रही। 1988 में एसपीजी के लिए एक कानून बनाया गया। इसके बाद साल 1991, 94, 99 और 2003 में एसपीजी सुरक्षा एक्ट में संशोधन किया गया।

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