सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court: I-PAC raids in Kolkata ED Solicitor General Tushar Mehta hearing Updates hindi

I-PAC Raid Case: ईडी और ममता सरकार आमने-सामने, सुप्रीम कोर्ट ने कहा– हम नोटिस जारी करेंगे; जानिए क्या-क्या हुआ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 15 Jan 2026 12:17 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court: I-PAC raids in Kolkata ED Solicitor General Tushar Mehta hearing Updates hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन
कोलकाता में बीते आठ जनवरी को आई-पैक के कार्यालय और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर हुई प्रवर्तन निदेशालय की रेड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। इस मामले में ईडी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
Trending Videos


'भीड़ ऐसे बुला ली गई थी, जैसे कोई प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर हो'
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा है कि वह इस मामले में नोटिस जारी कर तथ्यों की जांच करेगी। कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट में ईडी की याचिका की सुनवाई के दौरान हुई अव्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी 14 जनवरी को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान ईडी को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। ईडी ने आरोप लगाया कि कोर्ट रूम में बार-बार माइक बंद हो रहा था, जिससे पक्ष रखने में दिक्कत आई। इसके अलावा, सुनवाई के दौरान भीड़ जुटाने के लिए बसों और गाड़ियों की व्यवस्था की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ईडी के अनुसार, हालात ऐसे हो गए थे कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को आदेश देना पड़ा कि वकीलों के अलावा किसी अन्य को कोर्ट में प्रवेश न दिया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि भीड़ ऐसे बुला ली गई थी, जैसे कोई प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर हो। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए मामले की जांच का संकेत दिया।

उपस्थित अधिकारियों को निलंबित किया जाए
ईडी ने कोर्ट में आरोप लगाया कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों व अहम दस्तावेजों को जबरन अपने साथ ले गईं। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की पीठ को बताया कि कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बंगाल के डीजीपी और बड़ी पुलिस टीम भी मौजूद थी। ईडी का दावा है कि पुलिस ने एजेंसी के अधिकारियों के मोबाइल फोन तक छीन लिए, जिससे जांच में बाधा आई और एजेंसी का मनोबल गिरा।

सॉलिसिटर जनरल ने इस तरह के हस्तक्षेप से केवल ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलेगा और केंद्रीय बलों का मनोबल टूटेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य सरकारों को लगेगा कि वे हस्तक्षेप कर सकती हैं, अनियमितताएं कर सकती हैं और फिर धरने पर बैठ सकती हैं। साथ ही कोर्ट से अपील की कि स्पष्ट रूप से उपस्थित अधिकारियों को निलंबित किया जाए ताकि उदाहरण स्थापित हो। उन्होंने कहा कि आई-पैक कार्यालय में आपत्तिजनक सामग्री मिलने के सबूत मौजूद थे। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि प्रत्यक्ष अधिकार रखने वाले अधिकारियों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाए और जो कुछ हो रहा है उसका संज्ञान लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट जारी करेगी नोटिस?
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल प्रतीक जैन का लैपटॉप और उनका निजी आईफोन लेकर गई थीं, क्योंकि उसमें चुनाव से जुड़ा संवेदनशील डेटा था। सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने रेड में कोई रुकावट नहीं डाली। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह दावा सही नहीं लगता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर ईडी दस्तावेज जब्त करना चाहती, तो वह ऐसा कर सकती थी। कोर्ट ने साफ कहा हमें इस मामले की जांच करनी होगी। सरकार हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकती।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी से पूछा कि वह वहां किस जांच के सिलसिले में गई थी। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ईडी अवैध कोयला घोटाले की जांच कर रही थी, न कि किसी चुनावी डेटा को जब्त करने। उन्होंने बताया कि जांच में हवाला चैनल और करीब 20 करोड़ रुपये की नकद लेन-देन के सबूत मिले हैं, जिसके चलते 8 जनवरी को I-PAC से जुड़े 10 ठिकानों पर तलाशी ली गई।

चुनाव के समय अचानक रेड क्यों- कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि अगर कोयला घोटाले की जांच पहले से चल रही थी, तो चुनाव के समय अचानक रेड क्यों की गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव I-PAC नहीं, बल्कि चुनाव आयोग कराता है। ईडी का आरोप है कि रेड के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की गई, अहम दस्तावेज छीने गए और अधिकारियों को धमकाया गया। इसी आधार पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को जब्त कर सील करने की मांग की है।

याचिका में लगाए गए आरोप गलत- अभिषेक सिंघवी
राज्य सरकार और डीजीपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट नोटिस जारी करता भी है, तो यह साफ किया जाए कि यह उनकी आपत्ति के अधीन होगा। सिंघवी ने दलील दी कि ईडी  का सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचना केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सही ठहराया जा सकता है, जब कोई और प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध न हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईडी फोरम शॉपिंग कर रही है, क्योंकि इसी तरह की राहत पहले ही हाईकोर्ट से मांगी जा चुकी है।

वरिष्ठ वकील ने कहा कि ईडी की याचिका में लगाए गए आरोप और पंचनामा एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। उनके मुताबिक, या तो याचिका में लगाए गए आरोप गलत हैं या फिर पंचनामा ही गलत है, दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में रुकावट और तलाशी न हो पाने के दावे पंचनामा के सामने टिकते नहीं हैं। सॉलिसिटर जनरल के इस बयान पर कि राज्य सरकार को जानकारी दी गई थी, सिंघवी ने कहा कि राज्य को केवल सुबह करीब 11:30 बजे एक सामान्य ईमेल मिला, जबकि तलाशी सुबह 6:45 बजे ही शुरू हो चुकी थी। अंत में सिंघवी ने ईडी से अनुरोध किया कि वह स्पष्ट निर्देशों को रिकॉर्ड पर रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद सिर्फ रिकॉर्ड तैयार करने और अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश है।

डीजीपी राजीव कुमार के निलंबन की मांग-ईडी
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है, जिसमें पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार के निलंबन की मांग की गई है। ईडी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की है, आरोप लगाते हुए कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और दुराचार किया। सेंट्रल एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से कर्मचारी और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और गृह मंत्रालय को निर्देश देने की अपील की है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उसका पक्ष सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में TMC की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें पार्टी ने ED पर गलत तरीके से कागजात जब्त करने का आरोप लगाया था।

यह मामला 8 जनवरी की घटना से जुड़ा है, जब ईडी ने कोलकाता के सॉल्ट लेक में I-PAC कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर कोयला तस्करी मामले में छापेमारी की थी। एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान उसके काम में बाधा डाली गई। ईडी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और जांच से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत अपने साथ ले गईं। वहीं, मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ईडी पर अधिकारों से आगे बढ़ने का आरोप लगाया है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी जांच में रुकावट डालने के आरोपों से इनकार किया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

अन्य वीडियो:-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed