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Supreme Court: आरोपियों की पहचान ऑनलाइन जाहिर करने पर रोक की मांग, केंद्र और सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस

Tue, 18 Aug 2026 12:19 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 18 Aug 2026 12:19 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोपियों की पहचान ऑनलाइन जाहिर न करने की मांग की गई है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों और सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आइए जानते हैं कि याचिका में क्या सवाल उठाए गए हैं और क्या मांग की गई है।

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Supreme court issues notice to Centre on PIL for restraining police from revealing identity of accused online
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा और एक्स को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक जनहित याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें पुलिस को ऐसे कंटेंट पोस्ट करने से रोकने के निर्देश देने की मांग की गई है, जिनसे आरोपियों की पहचान जाहिर होती हो या उन्हें अपमानजनक तरीके से दिखाया जाता हो।
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याचिका में राज्यों को निर्देश देने की भी मांग
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने पीआईएल दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता हेमेंद्र पटेल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन की दलीलों पर गौर किया और केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किए। याचिका में राज्यों को निर्देश देने की मांग की गई कि वे अपने पुलिस सोशल मीडिया हैंडल से ऐसी पोस्ट तुरंत हटा दें, जिनमें आरोपियों के चेहरे या पहचान जाहिर होती हो या उन्हें अपमानजनक तरीके से दिखाया गया हो।
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याचिका में कहा गया, 'प्रतिवादी-राज्यों को निर्देश दिया जाए कि वे अपने-अपने पुलिस संगठनों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए उचित गाइडलाइंस बनाएं, खासकर ऐसे कंटेंट को अपलोड करने से रोकने के लिए जिनसे आरोपियों के चेहरे/पहचान जाहिर होती हो या उन्हें अपमानजनक तरीके से दिखाया जाता हो।'
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आरोपियों को अपमानजनक तरीके से दिखाए जाने पर आपत्ति
याचिका में ऐसी तस्वीरों या वीडियो का जिक्र किया गया है जिनमें आरोपियों को हथकड़ी पहने, रस्सियों से बंधे, डंडों से पीटते, घुटनों के बल बैठे, घसीटे जाते या सीढ़ियों से नीचे खींचे जाते हुए दिखाया गया है। याचिका में राज्यों से यह भी मांग की गई है कि वे पुलिस द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए उचित गाइडलाइंस बनाएं, ताकि भविष्य में ऐसे कंटेंट की पोस्टिंग को रोका जा सके।

सोशल मीडिया कंपनियों को भी तय गाइडलाइंस बनाने की मांग
याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स मेटा और एक्स को भी निर्देश देने की मांग की गई है कि वे अपने प्लेटफॉर्म के लिए उचित पॉलिसी और यूजर गाइडलाइंस बनाएं। जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐसा कोई कंटेंट पोस्ट न किया जाए जिससे आरोपियों की पहचान जाहिर होती हो या उन्हें अमानवीय, अपमानजनक या बेइज्जती भरे बर्ताव का शिकार होते हुए दिखाया जाता हो। 


इसमें यूजर द्वारा रिपोर्ट किए जाने पर ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए एक औपचारिक, पारदर्शी और व्यवस्थित तंत्र बनाने की भी मांग की गई है। इस मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक और एक्स कॉर्प को प्रतिवादी बनाया गया है।
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